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Jhansi News: राम वन गमन की लीला देख श्रद्धालु भावविभोर
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बानपुर। किले के मैदान बानपुर में रामलीला समिति के तत्वावधान में आयोजित रामलीला में छठवें दिन राम वनगमन लीला का मंचन देख श्रद्धालु भाव विभोर हो गए।
रामलीला मंचन का शुभारंभ राजा दशरथ की सभा से प्रारंभ हुआ, जहां वह राज्य से संबंधित कुछ अनिवार्य निर्णय ले रहे होते हैं तभी उनकी दृष्टि सभा में सामने लगे आईने पर गई और उन्हें अपने श्वेत केश दिखाई दिए। गुरु विश्वामित्र के परामर्श से वह राम का राज्याभिषेक करने का निर्णय लेते हैं। महाराज दशरथ की औपचारिक घोषणा के बाद पूरी अयोध्या नगरी खुशियों में डूब जाती है। जैसे ही यह शुभ समाचार महारानी कैकई की दासी मंथरा के कानों में जाता है, वह महारानी कैकई के पास जाती है और उनपर राम का राज्याभिषेक रोकने के लिए दबाव डालती है।
पहले तो रानी उसे भला बुरा कहती हैं, लेकिन उसके बाद दासी मंथरा रानी कैकई पर अपना शब्दजाल डालती है और उन्हें भ्रमित कर देती है। इसके बाद रानी कोप भवन में चली जाती हैं, यह समाचार जैसे ही राजा दशरथ को मिलता है वह रानी को मनाने कोप भवन में जाते हैं। उनसे उनके दुख का कारण पूछते हैं तब रानी सबसे पहले उन्हें राम की सौगंध देती हैं और अपने दो वरदान मांगती हैं। पहले में उनके पुत्र भरत को राज्य एवं दूसरे में राम को 14 वर्ष का वनवास। यह सुनकर राजा दशरथ अचेत हो जाते हैं। जब यह सूचना राम को प्राप्त होती है तो वह अपने पिता का वचन झूठा न हो, इसके लिए सहर्ष वनवास स्वीकार कर लेते हैं।
उनके साथ लक्ष्मण और माता सीता भी वन जाने को तैयार हो जाते हैं, फिर सभी एक साथ अपने पिता और माता कौशल्या, माता सुमित्रा एवं माता कैकई से आज्ञा लेकर आर्य सुमंत के साथ वन के लिए प्रस्थान करते हैं और यहीं पर का लीला का समापन होता है। इस अवसर पर अतुल रावत, ध्रुवपाल सिंह गहरवार, राकेश नामदेव, मनोज पुष्पकार, मनोज नामदेव, निशांत गहरवार, राहुल गहरवार, कुलदीप राजा, दृगपाल बैश आदि मौजूद रहे।
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रामलीला मंचन का शुभारंभ राजा दशरथ की सभा से प्रारंभ हुआ, जहां वह राज्य से संबंधित कुछ अनिवार्य निर्णय ले रहे होते हैं तभी उनकी दृष्टि सभा में सामने लगे आईने पर गई और उन्हें अपने श्वेत केश दिखाई दिए। गुरु विश्वामित्र के परामर्श से वह राम का राज्याभिषेक करने का निर्णय लेते हैं। महाराज दशरथ की औपचारिक घोषणा के बाद पूरी अयोध्या नगरी खुशियों में डूब जाती है। जैसे ही यह शुभ समाचार महारानी कैकई की दासी मंथरा के कानों में जाता है, वह महारानी कैकई के पास जाती है और उनपर राम का राज्याभिषेक रोकने के लिए दबाव डालती है।
पहले तो रानी उसे भला बुरा कहती हैं, लेकिन उसके बाद दासी मंथरा रानी कैकई पर अपना शब्दजाल डालती है और उन्हें भ्रमित कर देती है। इसके बाद रानी कोप भवन में चली जाती हैं, यह समाचार जैसे ही राजा दशरथ को मिलता है वह रानी को मनाने कोप भवन में जाते हैं। उनसे उनके दुख का कारण पूछते हैं तब रानी सबसे पहले उन्हें राम की सौगंध देती हैं और अपने दो वरदान मांगती हैं। पहले में उनके पुत्र भरत को राज्य एवं दूसरे में राम को 14 वर्ष का वनवास। यह सुनकर राजा दशरथ अचेत हो जाते हैं। जब यह सूचना राम को प्राप्त होती है तो वह अपने पिता का वचन झूठा न हो, इसके लिए सहर्ष वनवास स्वीकार कर लेते हैं।
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उनके साथ लक्ष्मण और माता सीता भी वन जाने को तैयार हो जाते हैं, फिर सभी एक साथ अपने पिता और माता कौशल्या, माता सुमित्रा एवं माता कैकई से आज्ञा लेकर आर्य सुमंत के साथ वन के लिए प्रस्थान करते हैं और यहीं पर का लीला का समापन होता है। इस अवसर पर अतुल रावत, ध्रुवपाल सिंह गहरवार, राकेश नामदेव, मनोज पुष्पकार, मनोज नामदेव, निशांत गहरवार, राहुल गहरवार, कुलदीप राजा, दृगपाल बैश आदि मौजूद रहे।
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