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मावा और बर्फी में डिटरजेंट की मिलावट
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 09 Mar 2017 12:57 AM IST
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मावा और बर्फी में डिटरजेंट की मिलावट
- फोटो : demo
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खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफडीए) की ओर से दीपावली से पहले लिए गए नमूनों की जांच रिपोर्ट आ गई है। ग्यारह में दस नमूने फेल हुए हैं। मावा और बर्फी में डिटरजेंट की मिलावट मिली है।
त्योहारों में मावा की मांग बढ़ जाती है। इससे मिलावटखोर भी सक्रिय हो जाते हैं। मावा में आलू व मैदा की मिलावट तो आम बात है, परंतु मुनाफाखोरी के चक्कर में लोग मानव स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने से भी नहीं चूकते। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि दीपावली के लिए पहले एफडीए ने विभिन्न स्थानों से खाद्य पदार्थों के ग्यारह नमूने एकत्र किए थे, जिन्हें जांच में विभागीय प्रयोगशाला भेजा गया था। इसकी रिपोर्ट आ गई है। इनमें से दस नमूने फेल हुए हैं। मावा के लिए गए दो नमूनों में दोनों ही फेल हो गए हैं। इनमें से एक में डिटरजेंट की मिलावट पाई गई, तो दूसरे में फैट नहीं था। जबकि, बर्फी के दो नमूनों में से एक में डिटरजेंट पाया गया। छैना मिठाई को दूध की जगह स्टार्च से बनाया गया था। मिल्क केक के एक और पनीर के दो नमूनों में फैट नहीं मिला था। इसके अलावा दूध के तीन नमूने फेल हुए। इनमें फैट नहीं पाया गया। एफडीए के सहायक आयुक्त एस के चौरसिया ने बताया कि नमूने फेल होने के मामले में विक्रेताओं के खिलाफ मुकदमा दायर किया जा रहा है।
जानलेवा है
डिटरजेंट मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। यह खाने की नली और आंतों में छेद कर सकता है। इससे अल्सर हो जाता है। वहीं, स्टार्च भी पेट संबंधी बीमारियां देता है। स्टार्च जानवर तो आसानी से पचा लेते हैं, परंतु इंसान के लिए इस हजम करना आसान नहीं होता। जानलेवा हो सकता है।
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- डा. जकी सिद्दीकी, असिस्टेंट प्रोफेसर - मेडिकल कालेज
एफडीए ने 10 नमूने भरे
बुधवार को खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने विभिन्न स्थानों से दस नमूने भरे। विभागीय टीम ने खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुशील सचान के नेतृत्व में मावा मंडी से मावा के दो, शर्मा स्वीट्स से केसरिया बर्फी का एक, मंडी रोड पर दूध का एक नमूना भरा। इसके अलावा मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी डी एस यादव के नेतृत्व में टीम ने जिले के ग्रामीण क्षेत्रों से छह नमूने एकत्र किए। बंगरा से सफल मटर व मक्खन, मऊरानीपुर के अंबेडकर चौराहा से बेसन का लड्डू, बस स्टैंड से मिर्च पाउडर, रानीपुर से पेठा लड्डू, बरुआसागर से गुझिया के नमूने भरे। उल्लेखनीय है कि होली पर मावा की मांग बेतहाशा रूप से बढ़ी हुई है। इसके चलते मिलावटखोर भी सक्रिय हो गए हैं। मिलावट पर अंकुश के लिए एफडीए द्वारा पिछले एक सप्ताह से अभियान चला जा रहा है। अब तक दो दर्जन से अधिक नमूने लिए जा चुके हैं।
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त्योहारों में मावा की मांग बढ़ जाती है। इससे मिलावटखोर भी सक्रिय हो जाते हैं। मावा में आलू व मैदा की मिलावट तो आम बात है, परंतु मुनाफाखोरी के चक्कर में लोग मानव स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने से भी नहीं चूकते। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि दीपावली के लिए पहले एफडीए ने विभिन्न स्थानों से खाद्य पदार्थों के ग्यारह नमूने एकत्र किए थे, जिन्हें जांच में विभागीय प्रयोगशाला भेजा गया था। इसकी रिपोर्ट आ गई है। इनमें से दस नमूने फेल हुए हैं। मावा के लिए गए दो नमूनों में दोनों ही फेल हो गए हैं। इनमें से एक में डिटरजेंट की मिलावट पाई गई, तो दूसरे में फैट नहीं था। जबकि, बर्फी के दो नमूनों में से एक में डिटरजेंट पाया गया। छैना मिठाई को दूध की जगह स्टार्च से बनाया गया था। मिल्क केक के एक और पनीर के दो नमूनों में फैट नहीं मिला था। इसके अलावा दूध के तीन नमूने फेल हुए। इनमें फैट नहीं पाया गया। एफडीए के सहायक आयुक्त एस के चौरसिया ने बताया कि नमूने फेल होने के मामले में विक्रेताओं के खिलाफ मुकदमा दायर किया जा रहा है।
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जानलेवा है
डिटरजेंट मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। यह खाने की नली और आंतों में छेद कर सकता है। इससे अल्सर हो जाता है। वहीं, स्टार्च भी पेट संबंधी बीमारियां देता है। स्टार्च जानवर तो आसानी से पचा लेते हैं, परंतु इंसान के लिए इस हजम करना आसान नहीं होता। जानलेवा हो सकता है।
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- डा. जकी सिद्दीकी, असिस्टेंट प्रोफेसर - मेडिकल कालेज
एफडीए ने 10 नमूने भरे
बुधवार को खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने विभिन्न स्थानों से दस नमूने भरे। विभागीय टीम ने खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुशील सचान के नेतृत्व में मावा मंडी से मावा के दो, शर्मा स्वीट्स से केसरिया बर्फी का एक, मंडी रोड पर दूध का एक नमूना भरा। इसके अलावा मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी डी एस यादव के नेतृत्व में टीम ने जिले के ग्रामीण क्षेत्रों से छह नमूने एकत्र किए। बंगरा से सफल मटर व मक्खन, मऊरानीपुर के अंबेडकर चौराहा से बेसन का लड्डू, बस स्टैंड से मिर्च पाउडर, रानीपुर से पेठा लड्डू, बरुआसागर से गुझिया के नमूने भरे। उल्लेखनीय है कि होली पर मावा की मांग बेतहाशा रूप से बढ़ी हुई है। इसके चलते मिलावटखोर भी सक्रिय हो गए हैं। मिलावट पर अंकुश के लिए एफडीए द्वारा पिछले एक सप्ताह से अभियान चला जा रहा है। अब तक दो दर्जन से अधिक नमूने लिए जा चुके हैं।