{"_id":"6ad91881f94aedf4a4051df7","slug":"cornea-transplants-will-now-be-possible-at-the-medical-college-jhansi-news-c-11-1-jhs1041-902455-2026-10-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jhansi News: अब मेडिकल कॉलेज में हो सकेगा कॉर्निया प्रत्यारोपण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jhansi News: अब मेडिकल कॉलेज में हो सकेगा कॉर्निया प्रत्यारोपण
विज्ञापन
झांसी। अब महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में कॉर्निया प्रत्यारोपण हो सकेगा। शासन ने पांच साल के लिए 500 बेड अस्पताल में नेत्र बैंक संचालन की मंजूरी दे दी है। नेत्र बैंक के लिए डेढ़ करोड़ रुपये के उपकरण भी खरीदे जाएंगे। जनवरी 2027 से यहां कॉर्निया प्रत्यारोपण शुरू होगा।
मेडिकल कॉलेज में 2012 से नेत्र बैंक खोलने की कवायद चल रही है। कॉलेज प्रशासन की ओर से लगातार शासन को रिमाइंडर भेजा जाता रहा। पिछले साल नौ दिसंबर को दो सदस्यीय टीम ने नेत्र बैंक के लिए मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण किया था। यहां डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ की उपलब्धता से लेकर संसाधनों तक की जानकारी टीम ने ली। इसके बाद शासन को अपनी रिपोर्ट सौंपी। सब कुछ ठीक मिलने पर अब चिकित्सा शिक्षा विभाग की महानिदेशक नेहा शर्मा की ओर से पांच साल के लिए नेत्र बैंक संचालन का प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया है।
दो महीने में खरीदे जाएंगे उपकरण
मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. जितेंद्र कुमार ने बताया कि शासन की मंजूरी के बाद अब नेत्र बैंक के लिए ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप, स्पैक्युलर माइक्रोस्कोप, डीप फ्रीजर, लीनियर एयरफ्लो, एंबुलेंस आदि की खरीद की जाएगी। इसमें करीब दो महीने का समय लग सकता है। ऐसे में जनवरी 2027 से नेत्र बैंक में कॉर्निया प्रत्यारोपण शुरू हो जाएगा। झांसी मेडिकल कॉलेज नेत्र बैंक के लिए बुंदेलखंड का नोडल सेंटर बनेगा। ऐसे में यहां बुंदेलखंड के मरीज कॉर्निया प्रत्यारोपण कराने आएंगे।
विज्ञापन
हर महीने आते 10 से 15 केस, मिलेगी निशुल्क सुविधा
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुधीर कुमार ने बताया कि चिकित्सालय में हर महीने कॉर्निया प्रत्यारोपण के 10 से 15 केस आते हैं। वहीं, 15 से 20 लोग नेत्रदान के लिए पंजीकरण कराने आते हैं। उन्होंने बताया कि कॉलेज में रोगियों को निशुल्क कॉर्निया प्रत्यारोपण की सुविधा मिलेगी, जबकि निजी अस्पताल में प्रत्यारोपण कराने पर 50 हजार से एक लाख रुपये तक खर्च आता है।
मृत्यु के छह घंटे के अंदर कॉर्निया निकालना जरूरी
विशेषज्ञों के मुताबिक, नेत्रदान करने वाले व्यक्ति की मृत्यु के अधिकतम छह घंटे के अंदर कॉर्निया (नेत्र) निकालना जरूरी होता है, क्योंकि इस समय-सीमा के बाद कॉर्निया की गुणवत्ता और कोशिकाएं खराब होने लगती हैं और वह प्रत्यारोपण के योग्य नहीं रहता। फिर अधिकतम 48 घंटे तक उसका प्रत्यारोपण किया जा सकता है।
चोट लगने और अल्सर से खराब हो जाता है कॉर्निया
डॉ. जितेंद्र कुमार ने बताया कि कॉर्निया खराब होने के कई कारण हो सकते हैं। आमतौर पर चोट लगने से यह खराब हो जाता है। इसके अलावा अल्सर के कारण भी कॉर्निया सफेद पड़ जाता है और रोशनी न पहुंचने से दिखाई देना बंद या धुंधला हो जाता है।
विज्ञापन
मेडिकल कॉलेज में 2012 से नेत्र बैंक खोलने की कवायद चल रही है। कॉलेज प्रशासन की ओर से लगातार शासन को रिमाइंडर भेजा जाता रहा। पिछले साल नौ दिसंबर को दो सदस्यीय टीम ने नेत्र बैंक के लिए मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण किया था। यहां डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ की उपलब्धता से लेकर संसाधनों तक की जानकारी टीम ने ली। इसके बाद शासन को अपनी रिपोर्ट सौंपी। सब कुछ ठीक मिलने पर अब चिकित्सा शिक्षा विभाग की महानिदेशक नेहा शर्मा की ओर से पांच साल के लिए नेत्र बैंक संचालन का प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया है।
विज्ञापन
दो महीने में खरीदे जाएंगे उपकरण
मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. जितेंद्र कुमार ने बताया कि शासन की मंजूरी के बाद अब नेत्र बैंक के लिए ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप, स्पैक्युलर माइक्रोस्कोप, डीप फ्रीजर, लीनियर एयरफ्लो, एंबुलेंस आदि की खरीद की जाएगी। इसमें करीब दो महीने का समय लग सकता है। ऐसे में जनवरी 2027 से नेत्र बैंक में कॉर्निया प्रत्यारोपण शुरू हो जाएगा। झांसी मेडिकल कॉलेज नेत्र बैंक के लिए बुंदेलखंड का नोडल सेंटर बनेगा। ऐसे में यहां बुंदेलखंड के मरीज कॉर्निया प्रत्यारोपण कराने आएंगे।
विज्ञापन
हर महीने आते 10 से 15 केस, मिलेगी निशुल्क सुविधा
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुधीर कुमार ने बताया कि चिकित्सालय में हर महीने कॉर्निया प्रत्यारोपण के 10 से 15 केस आते हैं। वहीं, 15 से 20 लोग नेत्रदान के लिए पंजीकरण कराने आते हैं। उन्होंने बताया कि कॉलेज में रोगियों को निशुल्क कॉर्निया प्रत्यारोपण की सुविधा मिलेगी, जबकि निजी अस्पताल में प्रत्यारोपण कराने पर 50 हजार से एक लाख रुपये तक खर्च आता है।
मृत्यु के छह घंटे के अंदर कॉर्निया निकालना जरूरी
विशेषज्ञों के मुताबिक, नेत्रदान करने वाले व्यक्ति की मृत्यु के अधिकतम छह घंटे के अंदर कॉर्निया (नेत्र) निकालना जरूरी होता है, क्योंकि इस समय-सीमा के बाद कॉर्निया की गुणवत्ता और कोशिकाएं खराब होने लगती हैं और वह प्रत्यारोपण के योग्य नहीं रहता। फिर अधिकतम 48 घंटे तक उसका प्रत्यारोपण किया जा सकता है।
चोट लगने और अल्सर से खराब हो जाता है कॉर्निया
डॉ. जितेंद्र कुमार ने बताया कि कॉर्निया खराब होने के कई कारण हो सकते हैं। आमतौर पर चोट लगने से यह खराब हो जाता है। इसके अलावा अल्सर के कारण भी कॉर्निया सफेद पड़ जाता है और रोशनी न पहुंचने से दिखाई देना बंद या धुंधला हो जाता है।