{"_id":"63adea156ec92c1d63766818","slug":"bjp-candidate-with-in-fight-in-jhansi-jhansi-news-jhs235931086","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jhansi News: यह क्या हो रहा है भाजपा में... कभी विधायक भिड़ रहे तो कभी कार्यकर्ता थाने पर धरना दे रहे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jhansi News: यह क्या हो रहा है भाजपा में... कभी विधायक भिड़ रहे तो कभी कार्यकर्ता थाने पर धरना दे रहे
विज्ञापन
झांसी। अनुशासन की दुहाई देने वाली सत्ताधारी पार्टी भाजपा में इस समय कुछ ठीक नहीं चल रहा है। भाजपा के दो विधायकों के बीच तनातनी जगजाहिर है। चंद दिन पहले ही भाजपा कार्यकर्ता अपनी ही सरकार में मोंठ थाने पर धरने पर बैठ गए थे। भाजपा में चल रही ये अंतर्कलह और गुटबाजी निकाय चुनाव से लेकर 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव तक में भारी पड़ सकती है। वहीं, अब झांसी से ही पूर्व सांसद रह चुकीं और बुंदेलखंड में बड़ा जनाधार रखने वालीं उमा भारती के एक बयान से भी पार्टी की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
2012 के विधानसभा चुनाव हुए तो झांसी मंडल में सिर्फ रवि शर्मा ही भाजपा के एकमात्र विधायक चुने गए। 2017 में हुए चुनाव में झांसी की चार समेत पूरे बुंदेलखंड की सभी सीटों पर भाजपा का कब्जा हो गया। चुनाव के कुछ वक्त बाद ही सदर और बबीना विधायक के समर्थकों के बीच तनातनी की खबरें सामने आने लगीं। हालांकि, पांच सालों तक दोनों ही विधायक सार्वजनिक मंच पर एक-दूसरे की तारीफ करते रहे। मगर बीते सितंबर को बबीना विधायक के करीबी माने जाने वाले अमित पालर के सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक ऑडियो ने दोनों विधायकों की बीच रार को सबके सामने ला दिया। इस ऑडियो में अमित सदर विधायक को लेकर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करता सुनाई दे रहा था। सदर विधायक ने मामले की शिकायत शासन तक की। इसके बाद अमित पर शिकंजा कसा। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी की। साथ ही रवि द्वारा अवैध खनन के आरोप जड़े गए तब प्रशासन हरकत में आया और कई वाहनों को सीज किया गया। इसके बाद सदर विधायक रवि शर्मा के करीबी अभिषेक भार्गव पर जमीनों पर कब्जों को लेकर एफआईआर दर्ज हुई। इसे भी दोनों विधायकों के बीच खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं, बीते दिनों बीजेपी के तीन कार्यकर्ताओं के खिलाफ दलित उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज होने पर रविवार को भाजपाई मोंठ थाने में धरने पर बैठ गए। इससे भी सरकार की काफी किरकिरी हुई। अब झांसी से पूर्व सांसद रहीं उमा भारती का बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसमें भाजपा की दिग्गज नेत्री कह रही हैं कि बीजेपी को वोट देने की जरूरत नहीं है। मैं कभी नहीं कहती हूं कि लोधी हो तो तुम बीजेपी को ही वोट दो। हम प्यार के बंधन से बंधे हैं, लेकिन राजनीति के बंधन से आप मेरी तरफ से स्वतंत्र हैं। अपना वोट खुद का मान-सम्मान और हित देखकर देना। इस बयान ने भी पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।
विधायकों की अंदरूनी कलह से ही छिना मंत्री पद
झांसी। पहले 2017 में झांसी में भाजपा के सभी विधायक जीते। मगर कोई विधायक मंत्री नहीं बन पाया। इसके बाद 2022 में भी बीजेपी और गठबंधन पार्टी के खाते में जिले की चारों सीटें आईं। तब ये चर्चा थी कि झांसी का एक विधायक राज्यमंत्री बनाया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक विधायकों की आपसी खींचतान से ही झांसी से किसी को मंत्री नहीं बनाया गया।
विज्ञापन
प्रदेश अध्यक्ष ने सदर और बबीना विधायक से बातचीत की थी। अब ये विवाद थम चुका है। वहीं, जो भाजपा कार्यकर्ता मोंठ थाने में धरने पर बैठे थे, वो प्रशासन की गलत कार्रवाई से नाराज थे। हालांकि, पहले कार्यकर्ताओं को पार्टी के नेताओं से बात करनी चाहिए थी। धरना देना ठीक नहीं है। पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती का बड़ा जनाधार है। उनकी वजह से भी 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कई सीटें जीती हैं। उन्होंने किस परिप्रेक्ष्य में बयान दिया वो देखना होगा। वो कभी बीजेपी का विरोध नहीं करेंगी। - अशोक राजपूत, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष, कानपुर-बुंदेलखंड।
विज्ञापन
2012 के विधानसभा चुनाव हुए तो झांसी मंडल में सिर्फ रवि शर्मा ही भाजपा के एकमात्र विधायक चुने गए। 2017 में हुए चुनाव में झांसी की चार समेत पूरे बुंदेलखंड की सभी सीटों पर भाजपा का कब्जा हो गया। चुनाव के कुछ वक्त बाद ही सदर और बबीना विधायक के समर्थकों के बीच तनातनी की खबरें सामने आने लगीं। हालांकि, पांच सालों तक दोनों ही विधायक सार्वजनिक मंच पर एक-दूसरे की तारीफ करते रहे। मगर बीते सितंबर को बबीना विधायक के करीबी माने जाने वाले अमित पालर के सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक ऑडियो ने दोनों विधायकों की बीच रार को सबके सामने ला दिया। इस ऑडियो में अमित सदर विधायक को लेकर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करता सुनाई दे रहा था। सदर विधायक ने मामले की शिकायत शासन तक की। इसके बाद अमित पर शिकंजा कसा। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी की। साथ ही रवि द्वारा अवैध खनन के आरोप जड़े गए तब प्रशासन हरकत में आया और कई वाहनों को सीज किया गया। इसके बाद सदर विधायक रवि शर्मा के करीबी अभिषेक भार्गव पर जमीनों पर कब्जों को लेकर एफआईआर दर्ज हुई। इसे भी दोनों विधायकों के बीच खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं, बीते दिनों बीजेपी के तीन कार्यकर्ताओं के खिलाफ दलित उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज होने पर रविवार को भाजपाई मोंठ थाने में धरने पर बैठ गए। इससे भी सरकार की काफी किरकिरी हुई। अब झांसी से पूर्व सांसद रहीं उमा भारती का बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसमें भाजपा की दिग्गज नेत्री कह रही हैं कि बीजेपी को वोट देने की जरूरत नहीं है। मैं कभी नहीं कहती हूं कि लोधी हो तो तुम बीजेपी को ही वोट दो। हम प्यार के बंधन से बंधे हैं, लेकिन राजनीति के बंधन से आप मेरी तरफ से स्वतंत्र हैं। अपना वोट खुद का मान-सम्मान और हित देखकर देना। इस बयान ने भी पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।
विज्ञापन
विधायकों की अंदरूनी कलह से ही छिना मंत्री पद
झांसी। पहले 2017 में झांसी में भाजपा के सभी विधायक जीते। मगर कोई विधायक मंत्री नहीं बन पाया। इसके बाद 2022 में भी बीजेपी और गठबंधन पार्टी के खाते में जिले की चारों सीटें आईं। तब ये चर्चा थी कि झांसी का एक विधायक राज्यमंत्री बनाया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक विधायकों की आपसी खींचतान से ही झांसी से किसी को मंत्री नहीं बनाया गया।
विज्ञापन
प्रदेश अध्यक्ष ने सदर और बबीना विधायक से बातचीत की थी। अब ये विवाद थम चुका है। वहीं, जो भाजपा कार्यकर्ता मोंठ थाने में धरने पर बैठे थे, वो प्रशासन की गलत कार्रवाई से नाराज थे। हालांकि, पहले कार्यकर्ताओं को पार्टी के नेताओं से बात करनी चाहिए थी। धरना देना ठीक नहीं है। पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती का बड़ा जनाधार है। उनकी वजह से भी 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कई सीटें जीती हैं। उन्होंने किस परिप्रेक्ष्य में बयान दिया वो देखना होगा। वो कभी बीजेपी का विरोध नहीं करेंगी। - अशोक राजपूत, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष, कानपुर-बुंदेलखंड।