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Jhansi News: कृषि विश्वविद्यालय को मिला एग्रो-ईको टूरिज्म स्थल का दर्जा
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झांसी। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय को प्रमुख एग्रो-ईको टूरिज्म स्थल का दर्जा मिल गया है। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की ओर से प्रकाशित झांसी और उसके आसपास के प्रमुख दर्शनीय स्थलों की पुस्तिका में विवि को यह सम्मान दिया गया है।
कुलपति प्रो. अशोक कुमार सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल कक्षाओं और प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहें, बल्कि समाज से जुड़ाव का माध्यम भी बनें। युवाओं को प्रेरित करें और किसानों को सशक्त बनाएं। निदेशक शिक्षा डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि यह संस्थान अब सिर्फ शैक्षिक गतिविधियों का केंद्र नहीं है। किसानाें और युवाओं के लिए भी व्यावसायिक प्रशिक्षण, तकनीकी नवाचार का जीवंत मंच भी बन चुका है। विश्वविद्यालय के संरक्षित खेती मॉडल में पॉलीहाउस, नेट हाउस और ड्रिप सिंचाई प्रणाली के जरिये रंगीन गोभी, खीरा, शिमला मिर्च और टमाटर की वर्टीकल खेती का प्रदर्शन किया जा रहा है। वहीं, जैविक खेती मॉडल में जीवामृत, बीजामृत, वर्मी कंपोस्ट और प्राकृतिक कीट नियंत्रण तकनीकों से पर्यावरण अनुकूल कृषि को बढ़ावा दिया गया है। बताया गया कि पिछले एक साल में देश के विभिन्न राज्यों के दस हजार से अधिक विद्यार्थी, शिक्षक, प्राचार्य और किसान विश्वविद्यालय का भ्रमण कर चुके हैं। कृषि मॉडल और नवाचारों को देख चुके हैं। विश्वविद्यालय द्वारा संचालित आठ सर्टिफिकेट कोर्स युवाओं को कृषि में कॅरियर और उद्यमिता के लिए तैयार कर रहे हैं। ब्यूरो
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कुलपति प्रो. अशोक कुमार सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल कक्षाओं और प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहें, बल्कि समाज से जुड़ाव का माध्यम भी बनें। युवाओं को प्रेरित करें और किसानों को सशक्त बनाएं। निदेशक शिक्षा डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि यह संस्थान अब सिर्फ शैक्षिक गतिविधियों का केंद्र नहीं है। किसानाें और युवाओं के लिए भी व्यावसायिक प्रशिक्षण, तकनीकी नवाचार का जीवंत मंच भी बन चुका है। विश्वविद्यालय के संरक्षित खेती मॉडल में पॉलीहाउस, नेट हाउस और ड्रिप सिंचाई प्रणाली के जरिये रंगीन गोभी, खीरा, शिमला मिर्च और टमाटर की वर्टीकल खेती का प्रदर्शन किया जा रहा है। वहीं, जैविक खेती मॉडल में जीवामृत, बीजामृत, वर्मी कंपोस्ट और प्राकृतिक कीट नियंत्रण तकनीकों से पर्यावरण अनुकूल कृषि को बढ़ावा दिया गया है। बताया गया कि पिछले एक साल में देश के विभिन्न राज्यों के दस हजार से अधिक विद्यार्थी, शिक्षक, प्राचार्य और किसान विश्वविद्यालय का भ्रमण कर चुके हैं। कृषि मॉडल और नवाचारों को देख चुके हैं। विश्वविद्यालय द्वारा संचालित आठ सर्टिफिकेट कोर्स युवाओं को कृषि में कॅरियर और उद्यमिता के लिए तैयार कर रहे हैं। ब्यूरो
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