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Jhansi News: बगैर अनुमति 40 साल पुराना काटा पीपल का पेड़, दर्जनों पक्षी मरे

Mon, 01 Sep 2025 01:11 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 01 Sep 2025 01:11 AM IST
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40 year old peepal tree cut without permission, dozens of birds died

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संवाद न्यूज एजेंसी



झांसी। नगरा में कुछ लोगों ने बगैर अनुमति के मंदिर के पास लगे 40 साल पुराने हरे-भरे पीपल के पेड़ को काट दिया। इससे पेड़ पर रहने वाले दर्जनों पक्षियों के घोंसले जमींदोज हो गए। बगुले, जल काग, चिड़ियां सहित दर्जनों पक्षी मर गए। कई पक्षी घायल भी हुए। सूचना पर पहुंची वन विभाग और पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने घायल पक्षियों का उपचार कराया। वन विभाग पेड़ काटने वाले लोगों को चिह्नित करके कार्रवाई करेगा।

नगरा में मंगल दूध वाली गली में मंदिर के पास लगे 40 साल पुराने एक पेड़ पर बगुले, जलकाग सहित अन्य पक्षियों के घोंसले बड़ी तादाद में थे। इलाके के कुछ लोगों ने वन विभाग की अनुमति के बगैर पेड़ की घनी शाखाओं को काटा और इसके बाद मुख्य तने को भी काट डाला। मोटी टहनियों में दबकर बगुले, जलकाग सहित अन्य पक्षियों की दबकर मौत हो गई। कुछ लोगों ने इसका विरोध भी किया, लेकिन लोगों ने पेड़ का काटना बंद नहीं किया। सूचना पर वन विभाग की टीम पहुंची। टीम ने घायल पक्षियों को संरक्षण में लेकर उनका इलाज किया तथा मृत पक्षियों को कब्जे में लिया। इसके पहले पेड़ काटने वाले लोगों ने घोंसलों से गिरे अंडे और अधमरे पक्षियों को गड्ढे में डालकर आग लगा दी। इस संबंध में डीएफओ नीरज आर्या ने बताया कि बगैर अनुमति के पेड़ काटा गया है। इसमें लोगों को चिह्नित किया गया है तथा दोषियों कार्रवाई की जाएगी।
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इनमें विलुप्त प्रजाति भी जल काग भी शामिल



पेड़ काटने से मरे पक्षियों में विलुप्त होती प्रजाति जलकाग भी शामिल है। इसके संरक्षण के लिए सरकार अभियान भी चला रही है। जल काग के मिलने पर वन विभाग की टीम ने भी मामले को गंभीरता से लिया और इसकी जांच शुरू कर दी है।
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बहुत कम रह गए जल काग

जल काग को कॉर्मोरेंट भी कहा जाता है। यह जलीय पक्षी अपने काले पंख, लंबी चोंच और तैरने और मछली पकड़ने के लिए गोता लगाने की क्षमता के लिए जाना जाता है। इसे पनकौवा (पनकौआ) भी कहते हैं। यह बगुले और सारस के समान पक्षी की प्रजाति है और अब यह प्रजाति विलुप्त हो रही है।
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