{"_id":"5a05ce064f1c1b6e548bc200","slug":"191510329862-jhansi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोई प्रोफेसर तो कोई बनना चाहता मैनेजर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोई प्रोफेसर तो कोई बनना चाहता मैनेजर
Updated Fri, 10 Nov 2017 09:34 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फोटो..
कोई प्रोफेसर तो कोई बनना चाहता मैनेजर
- ‘अमर उजाला’ से बातचीत में मेधावियों ने साझा किए अरमान
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के 22वें दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति स्वर्ण और रजत पदक पाने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं से ‘अमर उजाला’ ने बात की तो उन्होंने अपने अरमान और अनुभव साझा किए।
मां ने नहीं बनाया घरेलू काम करने का दबाव
प्रोफाइल
............
नाम: मनीषा राय
कोर्स: एसएससी फूड टेक्नोलॉजी
संस्थान: बीयू कैंपस
प्रतिशत: 89.33
पदक: कुलाधिपति स्वर्ण
कुलाधिपति स्वर्ण पदक विजेता मनीषा राय का कहना है कि वह कॉलेज की टॉपर रही हैं। क्लास की पढ़ाई के बाद वह सिर्फ दो घंटे पढ़ाई करती थीं लेकिन पूरी एकाग्रता के साथ। मां ने कभी घर का काम करने का दबाव नहीं बताया और न ही पिता ने कोर्स की फीस ज्यादा होने का अहसास होने दिया। मनीष अब प्रोफेसर बनना चाहती हैं। वह कोचिंग भी पढ़ाती हैं। उन्होंने कहा कि यदि उनका पढ़ाया विद्यार्थी स्वर्ण पदक चाहता है, तो यह और भी खुशी की बात होगी।
उर्दू की प्रोफेसर बन पूरा करूंगी ख्वाब
प्रोफाइल
............
नाम: सबा नसीम
कोर्स: एमए
संस्थान: महिला डिग्री कॉलेज, बांदा
प्रतिशत: 79.22
पदक: कुलाधिपति रजत
सबा का कहना है कि वह अपने परिवार की पहली टॉपर बनी हैं। इसका पूरा श्रेय शिक्षकों और सीनियर्स को जाता है। सफलता के बारे में कहा कि किताबों का गहराई से अध्ययन करना जरूरी है। खुद पर आत्मविश्वास होना चाहिए। साथ ही गाइड की भी जरूरत है। वह उर्दू की प्रोफेसर बनना चाहती हैं। बचपन से ही यह उनका ख्वाब रहा है। उन्होंने कहा कि उर्दू में तहजीब जुड़ी है। आज की पीढ़ी उर्दू से दूर हो रही है, इसलिए वह इस भाषा के लिए कुछ करना चाहती हैं।
विज्ञापन
गणित में पकड़ अच्छी थी, कॉमर्स में रुचि हो गई
प्रोफाइल
............
नाम: आर्यन त्रिपाठी
कोर्स: एमकॉम
संस्थान: परशुराम कॉलेज, जालौन
प्रतिशत: 75.6
पदक: कुलाधिपति रजत
आर्यन ने बताया कि गणित में पकड़ अच्छी थी इसलिए कॉमर्स में भी रुचि हो गई। एकाउंटेंसी विषय सबसे अधिक पसंदीदा है। सीए की भी तैयारी की थी मगर सफलता नहीं मिली। हालांकि, इसका फायदा कोर्स की पढ़ाई में हुआ। शिक्षक परिवार से ताल्लुक रखने वाले आर्यन अब किसी बैंक में जनरल मैनेजर बनना चाहते हैं। नई पीढ़ी को सलाह दी कि जिस फील्ड के प्रति रुझान हो, उसी दिशा में पूरी एकाग्रता के साथ चल दें। दो नाव पर पैर रखेंगे तो डूब जाएंगे।
विज्ञापन
कोई प्रोफेसर तो कोई बनना चाहता मैनेजर
- ‘अमर उजाला’ से बातचीत में मेधावियों ने साझा किए अरमान
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के 22वें दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति स्वर्ण और रजत पदक पाने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं से ‘अमर उजाला’ ने बात की तो उन्होंने अपने अरमान और अनुभव साझा किए।
मां ने नहीं बनाया घरेलू काम करने का दबाव
प्रोफाइल
............
नाम: मनीषा राय
कोर्स: एसएससी फूड टेक्नोलॉजी
संस्थान: बीयू कैंपस
प्रतिशत: 89.33
पदक: कुलाधिपति स्वर्ण
कुलाधिपति स्वर्ण पदक विजेता मनीषा राय का कहना है कि वह कॉलेज की टॉपर रही हैं। क्लास की पढ़ाई के बाद वह सिर्फ दो घंटे पढ़ाई करती थीं लेकिन पूरी एकाग्रता के साथ। मां ने कभी घर का काम करने का दबाव नहीं बताया और न ही पिता ने कोर्स की फीस ज्यादा होने का अहसास होने दिया। मनीष अब प्रोफेसर बनना चाहती हैं। वह कोचिंग भी पढ़ाती हैं। उन्होंने कहा कि यदि उनका पढ़ाया विद्यार्थी स्वर्ण पदक चाहता है, तो यह और भी खुशी की बात होगी।
विज्ञापन
उर्दू की प्रोफेसर बन पूरा करूंगी ख्वाब
प्रोफाइल
............
नाम: सबा नसीम
कोर्स: एमए
संस्थान: महिला डिग्री कॉलेज, बांदा
प्रतिशत: 79.22
पदक: कुलाधिपति रजत
सबा का कहना है कि वह अपने परिवार की पहली टॉपर बनी हैं। इसका पूरा श्रेय शिक्षकों और सीनियर्स को जाता है। सफलता के बारे में कहा कि किताबों का गहराई से अध्ययन करना जरूरी है। खुद पर आत्मविश्वास होना चाहिए। साथ ही गाइड की भी जरूरत है। वह उर्दू की प्रोफेसर बनना चाहती हैं। बचपन से ही यह उनका ख्वाब रहा है। उन्होंने कहा कि उर्दू में तहजीब जुड़ी है। आज की पीढ़ी उर्दू से दूर हो रही है, इसलिए वह इस भाषा के लिए कुछ करना चाहती हैं।
विज्ञापन
गणित में पकड़ अच्छी थी, कॉमर्स में रुचि हो गई
प्रोफाइल
............
नाम: आर्यन त्रिपाठी
कोर्स: एमकॉम
संस्थान: परशुराम कॉलेज, जालौन
प्रतिशत: 75.6
पदक: कुलाधिपति रजत
आर्यन ने बताया कि गणित में पकड़ अच्छी थी इसलिए कॉमर्स में भी रुचि हो गई। एकाउंटेंसी विषय सबसे अधिक पसंदीदा है। सीए की भी तैयारी की थी मगर सफलता नहीं मिली। हालांकि, इसका फायदा कोर्स की पढ़ाई में हुआ। शिक्षक परिवार से ताल्लुक रखने वाले आर्यन अब किसी बैंक में जनरल मैनेजर बनना चाहते हैं। नई पीढ़ी को सलाह दी कि जिस फील्ड के प्रति रुझान हो, उसी दिशा में पूरी एकाग्रता के साथ चल दें। दो नाव पर पैर रखेंगे तो डूब जाएंगे।