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भावों का भंडार है हिन्दी,सुरलय झंकार है हिन्दी-City
Updated Fri, 15 Sep 2017 08:43 PM IST
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‘भावों का भंडार है हिन्दी, सुर लय झंकार है हिन्दी’
हिंदी दिवस पर आयोजित गोष्ठी में भाषा के विकास पर बल दिया गया
अमर उजाला ब्यूरो
बड़ागांव।
हिन्दी दिवस के अवसर पर निराला साहित्य संगम समिति ने काव्य एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया। इसमें कवियों ने अपनी रचनाएं सुनाई तथा वक्ताओं ने राष्ट्र भाषा के विकास पर बल दिया। वरिष्ठ कवि दिनेश चंद्र ‘गुरुदेव’ के मुख्य आतिथ्य एवं डा. बृजमोहन दुबे की अध्यक्षता में हुई गोष्ठी में प्रवक्ता राजेश तिवारी एवं सुरेंद्र कुमार खरे विशिष्ट अतिथि रहे।
राकेश शरण श्रीवास्तव ने सरस्वती वंदना के बाद अपनी रचना सुनाई, ‘भावों का भंडार है हिन्दी, सुर लय झंकार है हिन्दी।’ जे आलम ने हिन्दी हिम की नदी, इसमें गोता जिसने लगाया है। अभिव्यक्ति के भव सागर में मोती उसी ने पाया है।’ मुख्य अतिथि दिनेश गुरुदेव ने ‘आकाश में जितने तारे हैं सब एक से एक निराले हैं।’ राजेश तिवारी ने ‘इस धरा का इस धरा पर सब धरा रह जाएगा’ सुनाया। इसके अलावा गोविंद वर्मा, मनोहर लाल, राजीव रिछारिया, अखिलेश श्रीवास्तव, सुधीर तिवारी, जगदीश शरण झा, अंबिका चरन झा, भगवत नारायण समाधिया, आशाराम कुशवाहा, अनिल सरावगी, राजाबाबू सोनी, महावीर कुशवाहा, अमृतलाल सेन, मनोज सोनी, बृजमोहन नगरिया आदि ने अपने विचार व्यक्त किए। आभार व्यक्त डा. आत्माराम बादल ने किया।
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‘भावों का भंडार है हिन्दी, सुर लय झंकार है हिन्दी’
हिंदी दिवस पर आयोजित गोष्ठी में भाषा के विकास पर बल दिया गया
अमर उजाला ब्यूरो
बड़ागांव।
हिन्दी दिवस के अवसर पर निराला साहित्य संगम समिति ने काव्य एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया। इसमें कवियों ने अपनी रचनाएं सुनाई तथा वक्ताओं ने राष्ट्र भाषा के विकास पर बल दिया। वरिष्ठ कवि दिनेश चंद्र ‘गुरुदेव’ के मुख्य आतिथ्य एवं डा. बृजमोहन दुबे की अध्यक्षता में हुई गोष्ठी में प्रवक्ता राजेश तिवारी एवं सुरेंद्र कुमार खरे विशिष्ट अतिथि रहे।
राकेश शरण श्रीवास्तव ने सरस्वती वंदना के बाद अपनी रचना सुनाई, ‘भावों का भंडार है हिन्दी, सुर लय झंकार है हिन्दी।’ जे आलम ने हिन्दी हिम की नदी, इसमें गोता जिसने लगाया है। अभिव्यक्ति के भव सागर में मोती उसी ने पाया है।’ मुख्य अतिथि दिनेश गुरुदेव ने ‘आकाश में जितने तारे हैं सब एक से एक निराले हैं।’ राजेश तिवारी ने ‘इस धरा का इस धरा पर सब धरा रह जाएगा’ सुनाया। इसके अलावा गोविंद वर्मा, मनोहर लाल, राजीव रिछारिया, अखिलेश श्रीवास्तव, सुधीर तिवारी, जगदीश शरण झा, अंबिका चरन झा, भगवत नारायण समाधिया, आशाराम कुशवाहा, अनिल सरावगी, राजाबाबू सोनी, महावीर कुशवाहा, अमृतलाल सेन, मनोज सोनी, बृजमोहन नगरिया आदि ने अपने विचार व्यक्त किए। आभार व्यक्त डा. आत्माराम बादल ने किया।
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