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Jaunpur News: धूमधाम से निकाला जुुलूस-ए-मोहम्मदी, जश्न में डूबे लोग

Thu, 28 Sep 2023 11:37 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 28 Sep 2023 11:37 PM IST
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Zulus-e-Mohammadi taken out with much fanfare, people engrossed in celebration
जौनपुर। बारावफात का जलसा और जुलूस अपनी परंपरा के अनुसार मनाया गया। इस्लाम धर्म के आखिरी पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के जन्मोत्सव को इस्लामिक कैलेंडर हिजरी के अनुसार 12 रबीउल अव्वल को मनाया गया। शहर में एक ऐतिहासिक जलसा व भव्य जुलूस का आयोजन हुआ। कौमी यकजहती कार्यक्रम कोतवाली के सामने किदवई पार्क में आयोजित हुआ। इसमे शहर के तमाम लोग शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत कारी यासिर हस्सान ने कलामे इलाही से किया। मुख्य अतिथि पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने कहा की धर्म सिर्फ इंसानियत और मानवतावाद का संदेश देता है। दुनिया में प्रेम था और प्रेम हमेशा रहेगा। नफरत की जगह कहीं न थी न रहेगी। जुलूस अपनी परंपरा के अनुसार शाही ईदगाह के गेट से उठा। हरी झंडी दिखा कर सदर शौकत अली मुन्ना और अरशद खा तथा निखलेश सिंह ने रवाना किया। जुलूस देर रात अपने पूरे शानो शौकत से शाही अटाला मस्जिद पर पहुंचकर एक जलसे के रूप में तब्दील हो गया। इस बीच रास्ते भर विभिन्न अखाड़े अपने-अपने हुनर दिखाए। अंजुमनों के नातिया कलाम से रात भर शहर गुलजार रहा। शहर को रंग बिरंगी झालरों, लाइट बत्ती वह झंडों से सजाया गया। इस मौके पर रियाजुल हक ने बताया की हजरत मोहम्मद सल्ललाहों अलैह व सल्लम का जन्म अरब के मक्का शहर में 570 ई. में हुआ था। 8 जून 632 ई. में उनकी वफात हुई थी। वह ईश्वरवाद में विश्वास रखते थे। इस्लाम धर्म के पहले पैगंबर आदम से लेकर इस शृंखला में इब्राहिम,मूसा, ईशा आदि पैगंबरों की तरह वह इस्लाम के आखिरी पैगंबर हैं। डॉ. कमर अब्बास ने कहा की हुजूर सबके लिए रहमत बनकर आए हैं। डा. पीसी विश्वकर्मा ने हजरत मोहम्मद की सीरत पर बयान किया। संचालन नेयाज ताहिर शैखू और आरिफ ने संयुक्त रूप से किया। एक जलसा शाही ईदगाह के प्रांगण के अंदर भी हुआ ।जिसमें शोएब खान अच्छू,हाजी इमरान,कमालुद्दीन ,तबरेज ,ताज मोहम्मद आदि मौजूद रहे ।इस मौके पर शाहिद मंसूरी,एकराम सौदागर, फिरोज़ अहमद पप्पू , सरताज अहमद सिद्दीक़ी ,मोहम्मद शकील माज़ राइन आदि मौजूद रहे।
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उधर, मदरसा अहेलसुन्नत एजाजुल उलूम के मौलाना खालिद मिस्बाही बताते हैं हजरत मुहम्मद साहिब के आगमन की याद में मुसलमान इस दिन जुलूस, जलसा, लंगर व दरूद फातेहा की महफिल आयोजित करते हैं। कुछ लोग इस दिन मस्जिद और घरों की सजावट भी करते हैं। इस दिन नबी का जिक्र करना, दरूद व सलाम भेजना, नात पढ़ना, लंगर चलाना बड़ी खुशनसीबी का काम है। नबी की याद में किसी भी दिन मीलाद व जलसा मनाया जा सकता है। खेतासराय:ईद मिलादुन्नबी के मौके पर बृहस्पतिवार को खेतासराय में कई स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए। नगर के बारा खुर्द में दावते इस्लामी के सरंक्षण में मदरसे के बच्चों ने जुलूस निकाला गया। जूलूस बरतला जामा मस्जिद से हजरत करम अली शाह की मजार तक निकाला गया। इस मौके पर गलियां रसूल की आमद मरहबा, नारा तकबीर व नारा रिसालत से गूंज उठा। हरी मसजिद अनजान शहीद में दरूद की महफिल आयोजित की गई। वृहस्पतिवार की सुबह सैय्यद तैय्यब के आवास पर भी मीलाद शरीफ की महफिल आयोजित किया गया।
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