मछलीशहर। शिवार्चन में प्रयुक्त विभिन्न वस्तुओं का भिन्न-भिन्न फल मिलने की बात शास्त्रों में कही गई है। शर्करा मिश्रित दुग्ध से शिवार्चन करने से बुद्धि विकसित होती हैं। गंगाजल की धारा से भगवान शिव की आराधना से भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है। ज्योतिष एवं तंत्र आचार्य डॉ. शैलेश मोदनवाल ने बताया कि शिवपुराण रुद्र संहिता में भगवान शिव की पूजा करने के विधान को बतलाया गया है। भगवान महादेव को विभिन्न वस्तुओं को अर्पण करने का भिन्न-भिन्न फल शास्त्रों में बतलाया गया है। जैसे- तिल से की गई भगवान शंकर की पूजा से पातकों का नाश होता है, जौ द्वारा महादेव की अर्चना से स्वर्गीय सुखों की वृद्धि होती है, मूंग के द्वारा पूजा करने से सुखों की प्राप्ति होती है, प्रियंगु (कंगनी) चढ़ाते हुए शिवार्चन करने से धर्म, अर्थ, काम और भोग की प्राप्ति होती है। भगवान पार्वती नाथ को चावल अर्पण करने से लक्ष्मी की वृद्धि होती है, घी से रुद्रार्चन करने से नपुंसकता दूर होती है। शर्करा मिश्रित दुग्ध अर्पित करने से उत्तम बुद्धि की प्राप्ति होती है। जबकि सुवाषित तेल से शिवार्चन करने से भोगों में वृद्धि होती है। मधु की धारा से भगवान का अर्चन करने से राजयक्ष्मा रोग दूर होता है। गंगाजल भगवान शिव को बहुत प्रिय है। इसलिए गंगाजल की धारा से भगवान शिव की आराधना करने से भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है।