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दूसरों के वोट दिलवाएंगे, 25 हजार लोग खुद नहीं देंगे वोट
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जौनपुर। पंचायत चुनाव में करीब 25 हजार लोग ऐसे हैं, जो दूसरों से तो वोट दिलवाएंगे, लेकिन खुद का वोट नहीं दे पाएंगे। मतदान दिवस पर चुनावी ड्यूटी होने के कारण उन्हें वोट देने का मौका नहीं मिलेगा। हर गांव में अलग-अलग प्रत्याशी होने के कारण विधानसभा और लोकसभा चुनावों की तर्ज पर उन्हें अलग से वोट देने की भी व्यवस्था नहीं की गई है। इस चुनाव में जब एक-एक वोट के लिए खींचतान मची हुई है तब इतनी बड़ी संख्या में वोट न पड़ने से प्रत्याशियों की परेशानी बढ़ सकती है।
जिले में 15 अप्रैल को 5106 बूथों पर वोट पड़ने हैं। प्रत्येक बूथ पर पीठासीन अधिकारी समेत चार कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। इसके अलावा स्टैटिक मजिस्ट्रेट, सुरक्षाकर्मी, बीएलओ सहित अन्य कार्यों के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगवाई है। इसमें अधिकांश कर्मचारी जिले के ही रहने वाले हैं। इनकी संख्या करीब 25 हजार होगी। विधानसभा और लोकसभा चुनाव में मतदान ड्यूटी करने वाले सभी कार्मिकों को प्रशिक्षण के दौरान ही वोट देने की व्यवस्था रहती है। वह पोस्टल बैलेट की सुविधा का इस्तेमाल कर अपने निर्वाचन क्षेत्र के पसंदीदा उम्मीदवार को वोट करते हैं। कई बार इनके वोटों से ही जीत-हार के आंकड़े बदल जाते हैं। पंचायतों में जब हर गांव में एक-एक वोट की मारामारी है तो चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मचारियों को मतदान का अधिकार नहीं मिलेगा। इसके पीछे व्यावहारिक दिक्कतों को कारण बताया जा रहा है। हर गांव में प्रधान, बीडीसी सदस्य, जिला पंचायत सदस्य और ग्राम पंचायत सदस्य के अलग-अलग प्रत्याशी हैं। उनके चुनाव निशान भी अलग-अलग हैं। ऐसे में हर गांव के लिए अलग-अलग व्यवस्था करना संभव नहीं है।
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जिले में 15 अप्रैल को 5106 बूथों पर वोट पड़ने हैं। प्रत्येक बूथ पर पीठासीन अधिकारी समेत चार कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। इसके अलावा स्टैटिक मजिस्ट्रेट, सुरक्षाकर्मी, बीएलओ सहित अन्य कार्यों के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगवाई है। इसमें अधिकांश कर्मचारी जिले के ही रहने वाले हैं। इनकी संख्या करीब 25 हजार होगी। विधानसभा और लोकसभा चुनाव में मतदान ड्यूटी करने वाले सभी कार्मिकों को प्रशिक्षण के दौरान ही वोट देने की व्यवस्था रहती है। वह पोस्टल बैलेट की सुविधा का इस्तेमाल कर अपने निर्वाचन क्षेत्र के पसंदीदा उम्मीदवार को वोट करते हैं। कई बार इनके वोटों से ही जीत-हार के आंकड़े बदल जाते हैं। पंचायतों में जब हर गांव में एक-एक वोट की मारामारी है तो चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मचारियों को मतदान का अधिकार नहीं मिलेगा। इसके पीछे व्यावहारिक दिक्कतों को कारण बताया जा रहा है। हर गांव में प्रधान, बीडीसी सदस्य, जिला पंचायत सदस्य और ग्राम पंचायत सदस्य के अलग-अलग प्रत्याशी हैं। उनके चुनाव निशान भी अलग-अलग हैं। ऐसे में हर गांव के लिए अलग-अलग व्यवस्था करना संभव नहीं है।
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