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काम मिलेगा अपने देश तो क्यों जाएंगे परदेश...
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जौनपुर। परदेश से घर लौट रहे प्रवासी मजदूरों के लिए केंद्र सरकार ने बृहस्पतिवार को कई घोषणाएं की। उन्हें निशुल्क राशन देने का वादा किया तो मजदूरी भी बढ़ाने का एलान किया है। सबसे बड़ी घोषणा नियुक्ति पत्र और वर्ष में एक बार स्वास्थ्य जांच से जुड़ी है। सरकार का दावा है कि सभी प्रवासी मजदूरों को एक समान रुप में इन सुविधाओं का लाभ दिया जाएगा, जिससे उनका जीवन स्तर सामान्य हो सके। कोरोना के कारण लॉक डाउन से हुई दुश्वारियां का असर कम हो जाए। सरकार की इन लोक लुभावन घोषणाओं पर मजदूरों से बात की गई तो उन्होंने इसकी सराहना की। कहा कि अगर घर पर ऐसी सुविधाएं मिले तो वह परदेश क्यों जाएं, मगर ऐसा होता नहीं है। पहले भी मजदूरों के लाभ के लिए ढेरों बातें हुई लेकिन धरातल पर वास्तविक लोगों को इसका लाभ मिलता ही नहीं। जब तक योजनाओं को लागू करने में पारदर्शिता नहीं आएगी, यह सिर्फ घोषणाएं ही रहेंगी। फिलहाल के हालात पर उन्होंने दोबारा परदेश जाने से इंकार किया।
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सरकार की बातें तो हमेशा अच्छी ही रहती हैं, लेकिन वास्तविकता से उसका कोई सरोकार नहीं होता। ऐसा नहीं होता तो क्या हमें सैकड़ों किमी दूर पैदल चलकर आना होता। हमेशा से इन योजनाओं का लाभ चंद लोगों को मिलता रहा है। मजदूर हमेशा छला जाता है। -प्रदीप।
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राशन देने की बात तो पहले ही सरकार कर चुकी है। मनरेगा के तहत मजदूरी भी बढ़ाई जा चुकी है। इसमें नया क्या है। एक देश-एक राशन की योजना अच्छी है। इससे बाहर जाने पर भी आसानी से राशन मिल सकेगा। नियुक्ति पत्र मिलेगा तो नौकरी पर अनिश्चितता दूर होगी। -जगलाल।
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लॉक डाउन के कारण रोजगार छिन गया है। जेब खाली हो चुकी है। सरकार दो माह तक निशुल्क राशन देने की व्यवस्था करती है तो काफी सहूलियत मिलेगी। तब तक रोजगार का कोई दूसरा विकल्प भी ढूंढ लिया जाएगा। हमें मजदूरी ही करनी है। गांव में मिल जाए तो परदेश क्यों जाएं। -परवेज।
---घर से दूर काम करना काफी कठिन है, यह इस लॉक डाउन ने बता दिया है। सरकार से गुजारिश है कि वह सिर्फ घर के आसपास ही रोजगार देने की व्यवस्था कर दे। अन्य सुविधाएं तो हर जगह वैसी ही हैं। घर पर अपनों के साथ रहेंगे तो आधी मुश्किल स्वत: दूर हो जाएगी। -शमशाद अली।
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सरकार की बातें तो हमेशा अच्छी ही रहती हैं, लेकिन वास्तविकता से उसका कोई सरोकार नहीं होता। ऐसा नहीं होता तो क्या हमें सैकड़ों किमी दूर पैदल चलकर आना होता। हमेशा से इन योजनाओं का लाभ चंद लोगों को मिलता रहा है। मजदूर हमेशा छला जाता है। -प्रदीप।
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राशन देने की बात तो पहले ही सरकार कर चुकी है। मनरेगा के तहत मजदूरी भी बढ़ाई जा चुकी है। इसमें नया क्या है। एक देश-एक राशन की योजना अच्छी है। इससे बाहर जाने पर भी आसानी से राशन मिल सकेगा। नियुक्ति पत्र मिलेगा तो नौकरी पर अनिश्चितता दूर होगी। -जगलाल।
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लॉक डाउन के कारण रोजगार छिन गया है। जेब खाली हो चुकी है। सरकार दो माह तक निशुल्क राशन देने की व्यवस्था करती है तो काफी सहूलियत मिलेगी। तब तक रोजगार का कोई दूसरा विकल्प भी ढूंढ लिया जाएगा। हमें मजदूरी ही करनी है। गांव में मिल जाए तो परदेश क्यों जाएं। -परवेज।
---घर से दूर काम करना काफी कठिन है, यह इस लॉक डाउन ने बता दिया है। सरकार से गुजारिश है कि वह सिर्फ घर के आसपास ही रोजगार देने की व्यवस्था कर दे। अन्य सुविधाएं तो हर जगह वैसी ही हैं। घर पर अपनों के साथ रहेंगे तो आधी मुश्किल स्वत: दूर हो जाएगी। -शमशाद अली।