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पानी, सुरक्षा, बैठने के इंतजाम नदारद
ब्यूरो/अमर उजाला, जौनपुर
Updated Thu, 30 Jun 2016 01:21 AM IST
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सिटी स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या दो-तीन पर लगे इस हैंडपंप से काफी मेहनत के बाद निकलता है पानी।
- फोटो : jaunpur
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सिटी रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुविधाएं नहीं के बराबर हैं। न तो पीने के पानी का इंतजाम है और न ही सुरक्षा का। यहां तक की बैठने के लिए भ्ाी पर्याप्त जगह नहीं है। ऐसे में यात्री परेशान रहते हैं। अमर उजाला टीम ने बुधवार का स्टेशन का मुआयना किया। तो व्यवस्था सामने आ गई।
होकर दिल्ली लखनऊ रूट की अधिकतर ट्रेने गुजरती हैं। दो दर्जन से अधिक ट्रेनों का ठहराव भी है। आकड़ों पर गौर करें तो तकरीबन पांच हजार यात्री प्रति दिन आते जाते हैं। बावजूद इसके न तो यात्रियों के पानी पीने का कोई खास इंतजाम है और न ही बैठना की ही कोई व्यवस्था है।
यात्री प्रतिक्षालय में ताला बंद रहता है। उसे किसी वीआईपी के आने पर खोला जाता है या स्टेशन पर तैनात अधिकारी बाथरूम यूज करने के लिए खोलते हैं। पूरा स्टेशन परिसर चारो तरफ से खुला है, लेकिन सुरक्षा का कोई इंतजाम नही है। कहने को आरपीएफ चौकी है, लेकिन उसमें ताला बंद रहता है। जीआरपी का कोई सिपाहियों की ड्यूटी लगती है लेकिन कम दिखते हैं।
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प्लेटफार्म संख्या एक पर एक वाटर कूलर लगा है जिसमें दो टोटी है, इसी प्लेट फार्म पर यात्री प्रतिक्षालय, आरपीएफ चौकी भी है। पड़ताल में प्रतिक्षालय और चौकी में ताला बंद मिला। जीआरपी का कोई सिपाही भी स्टेशन पर मौजूद नही था। यात्रियों की आवाजाही लगी हुई थी। कभी भी किसी को रिसिव करने या पहुंचाने आने वाला व्यक्ति यहां प्लेट फार्म टिकट नही लेता है। स्टेशन पर तैनात कर्मचारियों ने बताया कि प्लेट फार्म टिकट कभी कोई ले लेता है। पूरा स्टेशन चारो तरफ से खुला है।
प्लेटफार्म संख्या दो-तीनलखनऊ दिल्ली रूट पर जाने वाली अधिकतर गाड़ियां इसी प्लेट फार्म पर आती हैं। बावजूद इसके पीने के पानी का हैंडपंप के सिवाय कोई इंतजाम नही है। बैठने के लिए कुछ कुर्सियां लगाई गई हैं। धूप होने के कारण वह जलती रहती है। टिन शेड के नीचे कुछ कुर्सियां लगी है लेकिन पंखे नही चल रहे थे। कुछ यात्री तो छांव के कारण ओवर ब्रिज की सीढ़ियों पर ही बैठे रहे।
बे-रोक टोक यात्रियों का आना जाना लगा था। यात्री फूट ओवर ब्रिज से नही बल्कि रेलवे लाइन क्रास करके ही इधर उधर आ जा रहे थे। राजस्थान जा रहे यात्री शालू सिंह ने बताया कि कहने को यह स्टेशन माडल स्टेशन है यहां यात्री सुविधा के नाम पर कुछ नही है। विरहदपुर के अभिषेक सिंह ने बताया कि स्टेशन पर सुरक्षा का कोई इंतजाम नही है। पाकेट मार और चोरों का आतंक है। ऐेसे में कोई यात्री अपने और सामान की सुरक्षा की भ्ाला कैसे सोच सकता है।
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होकर दिल्ली लखनऊ रूट की अधिकतर ट्रेने गुजरती हैं। दो दर्जन से अधिक ट्रेनों का ठहराव भी है। आकड़ों पर गौर करें तो तकरीबन पांच हजार यात्री प्रति दिन आते जाते हैं। बावजूद इसके न तो यात्रियों के पानी पीने का कोई खास इंतजाम है और न ही बैठना की ही कोई व्यवस्था है।
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यात्री प्रतिक्षालय में ताला बंद रहता है। उसे किसी वीआईपी के आने पर खोला जाता है या स्टेशन पर तैनात अधिकारी बाथरूम यूज करने के लिए खोलते हैं। पूरा स्टेशन परिसर चारो तरफ से खुला है, लेकिन सुरक्षा का कोई इंतजाम नही है। कहने को आरपीएफ चौकी है, लेकिन उसमें ताला बंद रहता है। जीआरपी का कोई सिपाहियों की ड्यूटी लगती है लेकिन कम दिखते हैं।
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प्लेटफार्म संख्या एक पर एक वाटर कूलर लगा है जिसमें दो टोटी है, इसी प्लेट फार्म पर यात्री प्रतिक्षालय, आरपीएफ चौकी भी है। पड़ताल में प्रतिक्षालय और चौकी में ताला बंद मिला। जीआरपी का कोई सिपाही भी स्टेशन पर मौजूद नही था। यात्रियों की आवाजाही लगी हुई थी। कभी भी किसी को रिसिव करने या पहुंचाने आने वाला व्यक्ति यहां प्लेट फार्म टिकट नही लेता है। स्टेशन पर तैनात कर्मचारियों ने बताया कि प्लेट फार्म टिकट कभी कोई ले लेता है। पूरा स्टेशन चारो तरफ से खुला है।
प्लेटफार्म संख्या दो-तीनलखनऊ दिल्ली रूट पर जाने वाली अधिकतर गाड़ियां इसी प्लेट फार्म पर आती हैं। बावजूद इसके पीने के पानी का हैंडपंप के सिवाय कोई इंतजाम नही है। बैठने के लिए कुछ कुर्सियां लगाई गई हैं। धूप होने के कारण वह जलती रहती है। टिन शेड के नीचे कुछ कुर्सियां लगी है लेकिन पंखे नही चल रहे थे। कुछ यात्री तो छांव के कारण ओवर ब्रिज की सीढ़ियों पर ही बैठे रहे।
बे-रोक टोक यात्रियों का आना जाना लगा था। यात्री फूट ओवर ब्रिज से नही बल्कि रेलवे लाइन क्रास करके ही इधर उधर आ जा रहे थे। राजस्थान जा रहे यात्री शालू सिंह ने बताया कि कहने को यह स्टेशन माडल स्टेशन है यहां यात्री सुविधा के नाम पर कुछ नही है। विरहदपुर के अभिषेक सिंह ने बताया कि स्टेशन पर सुरक्षा का कोई इंतजाम नही है। पाकेट मार और चोरों का आतंक है। ऐेसे में कोई यात्री अपने और सामान की सुरक्षा की भ्ाला कैसे सोच सकता है।