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बिना लाइसेंस के चल रहा पानी का कारोबार, जमकर किया जा रहा भू जल दोहन

Tue, 26 Apr 2022 11:51 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 26 Apr 2022 11:51 PM IST
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Water business going on without license, ground water exploitation is being done fiercely
शहर में आरओ प्लांट से केन में भरा जाता आरओ का पानी। संवाद - फोटो : JAUNPUR
जौनपुर। पानी में फ्लोराइड की मात्रा लगातार बढ़ती जा रही है। पानी में खारेपन की समस्या के चलते शहर ही नहीं गांवों में भी आरओ प्लांट के पानी का उपयोग करने की होड़ मची है। इस पानी का उपयोग स्टेटस सिंबल बन गया है। शादी समारोह के अलावा रोजमर्रा के कामों में भी इस पानी का खूब उपयोग हो रहा है। लोगों को यह पता नहीं है कि वे जिस पानी को पी रहे हैं, उसके टीडीएस की मात्रा क्या है। वह उनके सेहत के लिए कितना ठीक है। वहीं, आरओ प्लांट संचालकों द्वारा जमकर भू जल दोहन भी हो रहा है। प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग को धता बताते हुए पानी के कारोबार से जुड़े लोग मिनरल वाटर के नाम पर बेझिझक होकर पानी का दोहन कर रहे हैं और उसे धड़ल्ले से बेंच रहे हैं। पानी की बोतलों से भरे वाहन दिनभर शहर की सड़कों पर दौड़ते रहते हैं। हैरानी की बात तो यह कि इसे लेकर प्रशासन के स्तर से कोई अभियान भी नहीं चलाया जाता है।
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बात अगर शहर से शुरू करें तो ऐसा कोई शायद मोहल्ला नहीं होगा, जहां यह कारोबार न चलता हो। अकेले तारापुर कालोनी में तीन प्लांट स्थापित होने बताए जाते हैं। इसी जिले में पानी का करोड़ों का कारोबार होता है, क्योंकि जिलेभर में कम से कम दो सौ से अधिक पानी के प्लांट लगे हैं, लेकिन कुछ को छोड़ दें तो किसी के पास इस धंधे के लिए लाइसेंस नहीं है। इसके कारण ऐसे कारोबारी राजस्व और प्रकृति को भी क्षति पहुंचा रहे हैं। इनके पानी का कोई ब्रांड नहीं है, फिर भी केन और पाउच वाले पानी की खूब मांग है। पानी के कारोबारी प्राकृतिक संपदा का दोहन कर रहे हैं। आरओ प्लांट में पूर्व में काम कर चुके एक कर्मचारी की मानें तो धरती का सीना छेदकर सबमर्सिबल पंप के जरिए पानी निकाला जाता है और उसे आरओ सिस्टम से फिल्टर किया जाता है। हैरानी की बात तो यह है कि इस पानी को शुद्ध करने में काफी पानी बर्बाद हो जाता है। क्योंकि जितना पानी खारा होता है उतना ही पानी बर्बाद होता है, कई इलाकों में तो आधे आध पानी बर्बाद होता है। हालांकि इसके लिए आरओ प्लांट संचालक सोख्ता अथवा पाइप के माध्यम से नाली में पानी को डलवा देते हैं। कई स्थानों पर तो आधे-आध पानी बर्बाद हो जाता है। लेकिन, इसके एवज में कहीं कोई रायल्टी भी जमा नहीं की जाती। पानी का टीडीएस गड़बड़ होने पर स्वाद नहीं आता है। इससे पानी लाभदायक की बजाए कई बार हानिकारक सिद्ध होता है। वहीं, ऐसे ही पानी की सप्लाई शहर भर में की जा रही है। शहर के अलावा शाहगंज, मछलीशहर, मडि़याहूं, केराकत, मुंगराबदशाहपुर इलाके में भी पानी के प्लांट लग गए हैं। बिना लाइसेंस के चल रहे पानी का कारोबार करोड़ों में है, लेकिन लाइसेंस न होने के कारण इस धंधे में सेल टैक्स भी दबा लिया जाता है। जबकि सरकार की तरफ से लाइसेंस के साथ आईएसआई संख्या प्राप्त करने की जरूरत होती है, तभी कोई इस व्यवसाय को कर सकता है।
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महंगाई बढ़ी पर घट गए रेट
जौनपुर। आज से आठ साल पहले आरओ का फिल्टर किए पानी का दो रेट में मिलता था। नार्मल पानी 20 रुपये केन तो वहीं ठंडा पानी 25 से 30 रुपये प्रति केन की दर से बिकता था। लेकिन अधिकांश मोहल्लों में आरओ प्लांट खुलने से पानी का कारोबार करने वालों को ठंडा पानी का रेट 20 रुपये केन करना पड़ गया है। आज बीस लीटर पानी वह भी गर्मी के दिनों में ठंडा होकर जब लोगों के घर पहुंचने लगा तो लोगों को यह काफी सस्ता लगने लगा और वे इसे लेने भी लगे हैं।
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नगर पालिका के पाइप लाइन की सप्लाई से उठा है भरोसा
जौनपुर। नगर पालिका की पाइपलाइन से की जा रही पानी की सप्लाई से लोगों का भरोसा उठ चुका था। आए दिन गंदा पानी और कहीं-कहीं कीड़े मिलने की शिकायतें आम हो गई थीं। ऐसे माहौल में लोगों को केन वाला पानी रास आने लगा।
जकड़ सकती हैं गंभीर बीमारियां
जानकारों की मानें तो पानी में सोडियम, कैल्शियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम की मात्रा का होना जरूरी है। लेकिन, मिनरल के नाम पर बाजार में बिक रहे पानी में स्वास्थ्य के लिहाज से वांछित तत्व मौजूद नहीं है। इससे लोग गंभीर बीमारियों के शिकार हो सकते हैं। लोग इसके प्रतिकूल प्रभावों से अनजान है।

नगर पालिका से इस बारे में जानकारी हासिल करूंगा। साथ ही खुद प्लांटों पर जांच करूंगा। यदि वे अवैध मिले या मानक ठीक नहीं मिला तो कार्रवाई करूंगा। - हिमांशु नागपाल, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट
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