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बैंकों की धोखाधड़ी के खिलाफ विभिन्न संगठों ने किया प्रदर्शन

Sat, 21 Sep 2019 11:51 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 21 Sep 2019 11:51 PM IST
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Various organizations demonstrated against the fraud of banks
जौनपुर। निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के विभिन्न बैंकों द्वारा जनता के खाते से धोखे से की जा रही वसूली का आरोप लगाते हुए शनिवार को विभिन्न सामाजिक संगठनों ने कलेक्ट्रेट में धरना प्रदर्शन कर हस्ताक्षर अभियान चलाया। अपनी मांग से संबंधित राष्ट्रपति, आरबीआई के गवर्नर और वित्त मंत्री भारत सरकार को संबोधित पत्रक जिलाधिकारी को सौंपा। सामाजिक संगठन दावा मंच जौनपुर, लोकतंत्र बचाओ अभियान, नागरिक सहभागिता पहल एवं फाइनेंसियल एकाउंटबिलिटी नेटवर्क इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित धरना प्रदर्शन के दौरान वक्ताओ ने कहा कि देश के बैंक जनता की गाढ़ी कमाई का करोड़ों रुपये उनक बचत खातों से धोखे से निकाल ले रहे हैं।
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नई दिल्ली से आए राजेश कुमार सिंह ने कहा कि बैंकों द्वारा लगाए गए विभिन्न शुल्कों की मार सबसे अधिक गरीब, मजदूर, किसान, छात्र, दलित और आदिवासी समाज के लोगों पर पड़ रही है। देश में इस अस्थिरता का कारण कार्पोरेट घरानों को बड़े पैमानों पर दिए गए ऋणों की वसूली में सरकार और बैंकों की नाकामी है। उन्होंने कहा कि 2014 से 2019 तक भारतीय बैंकों ने 555603 करोड़ का लोन माफ किया है। बैंक ऋण की वसूली के लिए वास्तिविक प्रयास के बजाय गरीबों की जेब से अपने नुकसान की भरपाई कर रहे हैं। दिल्ली से आए आशीष ने कहा कि 21 सार्वजनिक और तीन निजी बैंकों ने अप्रैल 2014 से सितंबर 2018 के बीच खातों में न्यूनतम शेष राशि न होने पर दंड शुल्क के रूप में बचत खातों से 12388.56 करोड़ रुपये वसूल किए हैं। सार्वजनिक बैंकों ने 2015 से 2018 के बीच अतिरिक्त एटीएम लेनदेन के रूप में 4144.99 करोड़ बचत खाताधारकों से वसूल किए हैं। एसबीआई, बैंक आफ महाराष्ट्र और यूको बैंक ने 14 लाख, 85 हजार, 755 जनधन खातों को बचत खातों में परिवर्तित कर दिया है। जिसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। वक्ताओं ने मांग की है कि बैंक शुल्क के रूप में जमा कर्ताओं पर कार्पोरेट ऋणों का बोझ डालने के बजाय भारत सरकार और आरबीआई ऋणों की वसूली के लिए स्पष्ट योजना बनाए। धरना सभा को दावा मंच की ज्योंति गौतम, लोकतंत्र बचाओ अभियान के निसार अहमद. डा. शेर बहादुर गौतम ने भी संबोधित किया।
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