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मास्टर ट्रेनर के लिए संगिनियों और बीसीपीएम को दिया प्रशिक्षण
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जौनपुर। चिकित्साधिकारी कार्यालय सभागार में बुधवार को आशा संगिनियों और ब्लॉक सामुदायिक प्रक्रिया प्रबंधक (बीसीपीएम) को प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण सीएमओ डा. लक्ष्मी सिंह ने कहा कि प्रशिक्षण से आशा संगिनियां तथा आशा तकनीकी दक्ष हो सकेंगी। उन्हें कार्य योजना बनाने, सहयोगात्मक पर्यवेक्षण करने तथा संवाद परामर्श कौशल सुदृढ़ करने में सहयोग मिलेगा। मास्टर ट्रेनर तैयार करने के लिए संगिनियों और बीसीपीएम को दिया प्रशिक्षण-प्रशिक्षण से संगिनियों तथा आशा को कार्य योजना बनाने, सहयोगात्मक पर्यवेक्षण करने में सहयोग मिलेगा। प्रशिक्षण के बाद आशा संगिनियां स्वयं अपने आशा कार्यकर्ताओं का क्षमतावर्धन कर सकेंगी।
प्रशिक्षण के दौरान उन्हें गर्भवती की प्रसव पूर्व (एएनसी) एवं प्रसव पश्चात (पीएनसी) देखभाल, शिशु स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस, प्रशिक्षण कौशल आदि विषयों की जानकारी दी। राज्य स्तर से टीएसयू के कम्युनिटी प्रोसेस के स्टेट स्पेशलिस्ट बृजेश त्रिपाठी ने कहा कि उच्च जोखिम गर्भवती (एचआरपी) की जल्दी पहचान कर उन्हें चिकित्सकीय परामर्श दिलाकर मातृ मृत्यु दर कम की जा सकती है। गर्भवती की पूर्व गर्भावस्था या पूर्व प्रसव के इतिहास के आधार पर, गर्भवती को पहले कोई बीमारी हो तो उसके आधार पर वर्तमान गर्भावस्था में जांच के आधार पर। तीनों स्थितियों के आधार पर उच्च जोखिम गर्भवती की पहचान कर तुरंत चिकित्सकीय सुविधा देकर बहुत हद तक मातृ मृत्यु रोकी जा सकती है। बच्चों एवं गर्भवतियों को टिटनेस, गलाघोंटू, कालीखांसी, वायरल निमोनिया, बैक्टीरियल निमोनिया, दस्त रोग (डायरिया), हेपेटाइटिस, टीबी, पोलियो, चेचक (खसरा), रुबेला, जापानी मस्तिष्क ज्वर से बच्चों एवं गर्भवतियों का बचाव करते हैं। इस मौके पर एसीएमओ डा. सत्य नारायण हरिश्चंद्र, डीपीएम सत्यव्रत त्रिपाठी, डीसीएम मोहम्मद खुबैब रजा, कम्युनिटी आउटरीच के डिस्ट्रिक्ट स्पेशलिस्ट फणीन्द्रमणि जायसवाल आदि ने संबोधित किया।
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प्रशिक्षण के दौरान उन्हें गर्भवती की प्रसव पूर्व (एएनसी) एवं प्रसव पश्चात (पीएनसी) देखभाल, शिशु स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस, प्रशिक्षण कौशल आदि विषयों की जानकारी दी। राज्य स्तर से टीएसयू के कम्युनिटी प्रोसेस के स्टेट स्पेशलिस्ट बृजेश त्रिपाठी ने कहा कि उच्च जोखिम गर्भवती (एचआरपी) की जल्दी पहचान कर उन्हें चिकित्सकीय परामर्श दिलाकर मातृ मृत्यु दर कम की जा सकती है। गर्भवती की पूर्व गर्भावस्था या पूर्व प्रसव के इतिहास के आधार पर, गर्भवती को पहले कोई बीमारी हो तो उसके आधार पर वर्तमान गर्भावस्था में जांच के आधार पर। तीनों स्थितियों के आधार पर उच्च जोखिम गर्भवती की पहचान कर तुरंत चिकित्सकीय सुविधा देकर बहुत हद तक मातृ मृत्यु रोकी जा सकती है। बच्चों एवं गर्भवतियों को टिटनेस, गलाघोंटू, कालीखांसी, वायरल निमोनिया, बैक्टीरियल निमोनिया, दस्त रोग (डायरिया), हेपेटाइटिस, टीबी, पोलियो, चेचक (खसरा), रुबेला, जापानी मस्तिष्क ज्वर से बच्चों एवं गर्भवतियों का बचाव करते हैं। इस मौके पर एसीएमओ डा. सत्य नारायण हरिश्चंद्र, डीपीएम सत्यव्रत त्रिपाठी, डीसीएम मोहम्मद खुबैब रजा, कम्युनिटी आउटरीच के डिस्ट्रिक्ट स्पेशलिस्ट फणीन्द्रमणि जायसवाल आदि ने संबोधित किया।
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