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सुबह और शाम तनी रही कोहरे की मोटी चादर
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Wed, 14 Jan 2015 11:48 PM IST
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ठंड और कोहरे का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। जिले में अबतक 28 से अधिक लोगों की मौत होनेे के बाद भी ठंड का कहर जारी है। बुधवार को भी ठंड और गलन से लोग कांपते रहे। बचने के लिए लोग घरों में दुबके रहे। शाम के छह बजते-बजते कोहरे की मोटी चादर तन गई।
जानलेवा ठंड पशु-पक्षियों के लिए भी मुश्किलों का सबब बन गई है। हाड़ कंपाऊं ठंड के बीच बड़ी संख्या में लोग बीमार होकर अस्पताल भी पहुंच रहे हैं। बुधवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की भीड़ रही। ओपीडी में पांच सौ से अधिक पर्चियां कटीं। ठंड ने ट्रेन के साथ-साथ सड़क यातायात पर भी असर डाला है। सड़कों पर वाहनों की रफ्तार बेहद धीमी हो गई है।
बुधवार को सुबह हुई तो घने कोहरे के बीच जनजीवन प्रभावित रहा। भीषण ठंड के बीच ज्यादातर लोग घरों में दुबके रहे। हालांकि खिचड़ी का त्योहार होने के नाते तमाम लोग कड़ाके की ठंड में डुबकी लगाने नदी भी पहुंचे। गलन की तीव्रता बढ़ाने में सर्द हवा के थपेड़ों ने आग में घी का काम किया। सरसराती हवाओं ने सड़कों पर चलने वाले दोपहिया वाहन चालकों के चेहरे सुर्ख कर दिए। भीषण ठंड और कोहरे के चलते किसानों के सामने दलहनी और तिलहनी फसलों को बचाने की चुनौती बढ़ गई है।
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किसान मेहनत की कमाई को बचाने के लिए विशेषज्ञों से परामर्श करने लगे हैं। बक्शा इलाके के किसान राम अवध यादव ने कहा कि पाला गिर रहा है। आलू और अरहर के लिए मुसीबत खड़ी हो गई है। रोग लग गया तो लागत निकलनी भी मुश्किल हो जाएगी। जफराबाद इलाके के किसान श्याम लाल सिंह की मानें तो ठंड से उनकी सरसों की फसल बर्बाद हो गई। डेढ़ बीघे रकबे में माहो रोग लग गया। कृषि विशेषज्ञों ने इससे बचने के लिए परामर्श लेकर समय पर दवा का छिड़काव करने की बात कही है।
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जानलेवा ठंड पशु-पक्षियों के लिए भी मुश्किलों का सबब बन गई है। हाड़ कंपाऊं ठंड के बीच बड़ी संख्या में लोग बीमार होकर अस्पताल भी पहुंच रहे हैं। बुधवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की भीड़ रही। ओपीडी में पांच सौ से अधिक पर्चियां कटीं। ठंड ने ट्रेन के साथ-साथ सड़क यातायात पर भी असर डाला है। सड़कों पर वाहनों की रफ्तार बेहद धीमी हो गई है।
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बुधवार को सुबह हुई तो घने कोहरे के बीच जनजीवन प्रभावित रहा। भीषण ठंड के बीच ज्यादातर लोग घरों में दुबके रहे। हालांकि खिचड़ी का त्योहार होने के नाते तमाम लोग कड़ाके की ठंड में डुबकी लगाने नदी भी पहुंचे। गलन की तीव्रता बढ़ाने में सर्द हवा के थपेड़ों ने आग में घी का काम किया। सरसराती हवाओं ने सड़कों पर चलने वाले दोपहिया वाहन चालकों के चेहरे सुर्ख कर दिए। भीषण ठंड और कोहरे के चलते किसानों के सामने दलहनी और तिलहनी फसलों को बचाने की चुनौती बढ़ गई है।
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किसान मेहनत की कमाई को बचाने के लिए विशेषज्ञों से परामर्श करने लगे हैं। बक्शा इलाके के किसान राम अवध यादव ने कहा कि पाला गिर रहा है। आलू और अरहर के लिए मुसीबत खड़ी हो गई है। रोग लग गया तो लागत निकलनी भी मुश्किल हो जाएगी। जफराबाद इलाके के किसान श्याम लाल सिंह की मानें तो ठंड से उनकी सरसों की फसल बर्बाद हो गई। डेढ़ बीघे रकबे में माहो रोग लग गया। कृषि विशेषज्ञों ने इससे बचने के लिए परामर्श लेकर समय पर दवा का छिड़काव करने की बात कही है।