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बिना दलालों के नहीं होता काम
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Sat, 18 Jun 2016 01:36 AM IST
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एआरटीओ कार्यालय में अपने लाइसेंस बनवाने के लिए कतार में लगे लोग।
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सहायक संभागीय परिवहन कार्यालय (एआरटीओ) दलालों का अड्डा बन गया है। यहां बगैर दलाल और कमीशन के कोई काम ही नहीं होता। हर काम के लिए रेट बंधा हुआ है। उसे देने के बाद ही काम होना संभव हो पाता है।
कार्यालय परिसर में काम के लिए आने वाले लोग हमेशा इस बात की चर्चा करते हैं कि आखिर यहां कब दलाली खत्म होगी। शुक्रवार को अमर उजाला ने कार्यालय की स्थितियों को देखा और लोगों से बातचीत की तो यह बात सामने आई।
शुक्रवार को सुबह 10 बजे लोगों की भीड़ कार्यालय में पहुंच गई थी। कोई ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए कर्मचारियों का इंतजार कर रहा था तो कोई नवीनीकरण कराने के लिए। कोई भी कर्मचारी 10:30 बजे तक कार्यालय नहीं पहुंचा।
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11 बजे के बाद कर्मचारियों का आना शुरू हुआ तो यह सिलसिला 12 बजे तक चलता रहा। हाल यह रहा कि कर्मचारी सबसे पहले दलालों के काम को निपटाने में जुट गए। दलाल भी उन्हें घेर लिए। आम लोग लाइन में लग कर अपनी बारी का इंतजार करते रहे।
कई बार लोगों ने हो हल्ला भी किया। डोभी ब्लाक के भीमपुर निवासी प्रदीप कुमार, सुइथाकला के छीतमपट्टी निवासी संजय कुमार सिंह सहित कई लोगों ने बताया कि दो पहिया वाहनों का लाइसेंस बनाने के लिए 700 से 800 रुपये और चार पहिया वाहनों का लाइसेंस बनाने के लिए 1000 से 1500 रुपये लिया जा रहा है।
वहीं रिनुअल करने के लिए 1500 रुपए देना पड़ रहा है। जबकि दो पहिया ड्राइविंग लाइसेंस का वाजिब शुल्क 300 लगना चाहिए। लोगों की मानें तो हर कार्य के लिए रेट बंधा है। एआरटीओ कार्यालय में कम बैठते हैं। उनके पास प्रवर्तन और प्रशासन दोनों का जिम्मा है।
इससे लोगों की समस्या और बढ़ जाती है। डीएम भानुचंद्र गोस्वामी एक साल में दो बार छापा मार चुके हैं। लेकिन इसका भी कोई असर नहीं है। जबकि पारदर्शिता दिखाने के लिए सीसीटीवी कैमरा भी लगा है।
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कार्यालय परिसर में काम के लिए आने वाले लोग हमेशा इस बात की चर्चा करते हैं कि आखिर यहां कब दलाली खत्म होगी। शुक्रवार को अमर उजाला ने कार्यालय की स्थितियों को देखा और लोगों से बातचीत की तो यह बात सामने आई।
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शुक्रवार को सुबह 10 बजे लोगों की भीड़ कार्यालय में पहुंच गई थी। कोई ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए कर्मचारियों का इंतजार कर रहा था तो कोई नवीनीकरण कराने के लिए। कोई भी कर्मचारी 10:30 बजे तक कार्यालय नहीं पहुंचा।
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11 बजे के बाद कर्मचारियों का आना शुरू हुआ तो यह सिलसिला 12 बजे तक चलता रहा। हाल यह रहा कि कर्मचारी सबसे पहले दलालों के काम को निपटाने में जुट गए। दलाल भी उन्हें घेर लिए। आम लोग लाइन में लग कर अपनी बारी का इंतजार करते रहे।
कई बार लोगों ने हो हल्ला भी किया। डोभी ब्लाक के भीमपुर निवासी प्रदीप कुमार, सुइथाकला के छीतमपट्टी निवासी संजय कुमार सिंह सहित कई लोगों ने बताया कि दो पहिया वाहनों का लाइसेंस बनाने के लिए 700 से 800 रुपये और चार पहिया वाहनों का लाइसेंस बनाने के लिए 1000 से 1500 रुपये लिया जा रहा है।
वहीं रिनुअल करने के लिए 1500 रुपए देना पड़ रहा है। जबकि दो पहिया ड्राइविंग लाइसेंस का वाजिब शुल्क 300 लगना चाहिए। लोगों की मानें तो हर कार्य के लिए रेट बंधा है। एआरटीओ कार्यालय में कम बैठते हैं। उनके पास प्रवर्तन और प्रशासन दोनों का जिम्मा है।
इससे लोगों की समस्या और बढ़ जाती है। डीएम भानुचंद्र गोस्वामी एक साल में दो बार छापा मार चुके हैं। लेकिन इसका भी कोई असर नहीं है। जबकि पारदर्शिता दिखाने के लिए सीसीटीवी कैमरा भी लगा है।