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सुहाना नहीं है मौसम...खराब हुई शहर की आबोहवा जनाब ! घर से कम ही निकलें

Sun, 21 Nov 2021 12:00 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 21 Nov 2021 12:00 AM IST
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The weather is not pleasant...the climate of the city has deteriorated leave home less
जौनपुर। इन दिनों शहर की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। सवा तीन लाख की आबादी वाले शहर का एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) शनिवार को 200 से लेकर 279 के बीच है। हालांकि 19 नवंबर की सुबह साढ़े नौ बजे यह 400 के आसपास दर्ज किया गया है। लेकिन, शाम साढ़े सात बजे तक 279 तक आया और कमोवेश इसी स्थिति में बना हुआ है।
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दीपावली के बाद से खराब हुई शहर की हवा में धूल के कण काफी मात्रा में बढ़ गए हैं। आसमान में बादल, स्थिर हवा और बढ़े धूल कणों के चलते पूरे दिन धुंध सी बनी रही। शहर की वायु गुणवत्ता सूचकांक खराब होने के प्रमुख कारण की बात करें तो शहर में बड़े पैमाने पर वाहन, सड़क से लेकर भवन के निर्माण, शहर में घटते पेड़-पौधे प्रमुख रूप से शामिल हैं। प्रदूषण को रोकने की दिशा में प्रशासनिक स्तर से कोई भी ठोस कवायद नहीं की गई है। हालत है यह कि शहर की आबादी और गाड़ियों की संख्या बढ़ती ही जा रही है और पेड़-पौधों की संख्या घटती ही जा रही है। जिम्मेदार पर्यावरण संरक्षण की बातें तो करते हैं, लेकिन अधिकांश इसके विपरीत ही काम करते हैं। इस समय शहर में किसी भी इलाके में एक-दो घंटे के लिए गाड़ी खड़ी कर दी जाए तो उसपर धूल की परत दिखाई देने लगती है। कचहरी-टीडी कालेज मार्ग पर धूल उड़ रही है। यह स्थिति पिछले छह माह से बनी हुई है। डीएम ने कार्यदायी संस्था के खिलाफ दबाव बनाने के लिए मुकदमा तक दर्ज करा दिया। लेकिन, लोगों की समस्या का समाधान नहीं हो सका। सिपाह से पचहटियां तक एक किमी मार्ग के किनारे रहने वालों के सेहत पर गहरा असर पड़ रहा है, क्योंकि यह मार्ग धूल के गुबार से भरा रहता है। आसपास के दुकानदारों की दुकानदारी तक प्रभावित हो रही है। इतना ही नहीं, इस मार्ग से जाने वालों की सांस तक फूलने लगती है। जोगियापुर के आगे से लेकर कचहरी मार्ग की भी हालत खराब है, जहां धूल के कण लोगों की आंखों पर लगते हैं। रासमंडल चौक से होटल रिवर व्यू मार्ग पर भी धूल दिखाई देते हैं।
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पांच दिन में हो सकती है हल्की बूंदाबांदी
मौसम वैज्ञानिक पंकज जायसवाल बताते हैं कि भारत मौसम विभाग द्वारा प्राप्त आंकड़ों के अनुसार जनपद में 5 दिनों में बारिश की संभावना नहीं है, लेकिन कभी-कभी हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। हल्के से मध्यम बादल छाए रहने का अनुमान है। अधिकतम तापमान 29-30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 11-16 डिग्री सेल्सियस, अधिकतम आर्द्रता 80-85% और न्यूनतम आर्द्रता 57-69% हवा की गति 4-9 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पश्चिम-उत्तर पश्चिम दिशा की ओर चलने का अनुमान है। शुक्रवार का अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 17 डिग्री सेल्सियस रहा। आने वाले दिनों में ठंड बढ़ने के आसार है।
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ठंड में कई कारणों से सांस के मरीजों की संख्या बढ़ती है। इस समय शहर में निर्माण कार्य चल रहा हैं, जिससे उड़ रहे धूल से दिक्कत बढ़ी है। पराली, अलाव, कूड़ा जलाने से दिक्कत बढ़ती है। इसलिए धुआं कम करें। जितना हो सके स्वच्छ वातावरण में रहें।
--डा. एचडी सिंह, वरिष्ठ ह्दय रोग विशेषज्ञ
कोरोना काल में मास्क आदत में आ चुका है। वातावरण में धूल कण बढ़ने की स्थिति सांस रोगियों के लिए खतरनाक है। ऐसे में मास्क लगाकर ही बाहर निकलना ठीक है। किला में सुबह घूमें, वहां पेड़-पौधे हैं और वहां का वातावरण ठीक है। जितना अधिक से अधिक हो सके गोमती नदी के तट पर पौध रोपण करना चाहिए।
- डा. वीएस उपाध्याय, वरिष्ठ ह्दय रोग विशेषज्ञ
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एक्यूआई में सुधार हो रहा है। निर्माण कार्य के कारण जहां धूल उड़ रहे हैं वहां पानी का छिड़काव करें। कूड़ा किसी कीमत पर न जलाए। पौधरोपण करें। साथ अपनी जिम्मेदारी को समझे, फिलहाल अब स्थिति में सुधार हो रहा है।
- कालिका सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड वाराणसी
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टीडी कालेज रोड़ का निर्माण कराने वाली कार्यदायी संस्था पर मुकदमा भी दर्ज कराया गया है। इस मार्ग पर एक-दो दिन में काम शुरू हो जाएगा। इसके अलावा शहर के अंदर खोदकर छोड़ी गई अन्य सड़कों का निर्माण करा रहे कार्यदायी संस्थाओं को नोटिस जारी किया गया है। जल्द से जल्द काम न शुरू कराने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। गोमती नदी के तट पर पौध रोपण का प्लान है। लोगों से अपील है कि वे मास्क लगाकर ही निकले।
-मनीष कुमार, डीएम
--एयर क्वालिटी इंडेक्स- स्वास्थ्य पर प्रभाव
101 से 200 (थोड़ा प्रदूषित) : फेफड़े की बीमारी जैसे अस्थमा व ह्दय रोग, बच्चों और बड़े वयस्कों के साथ लोगों को असुविधा के कारण सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
201-300 (खराब) : लंबे समय तक ऐसे माहौल में रहने पर लोगों को सांस लेने में तकलीफ ह्दय रोग से पीड़ित लोगों को बहुत असुविधा हो सकती है।
301-400 (बहुत खराब) : लंबे समय तक ऐसे रहने पर लोगों को सांस की बीमारी हो सकती है। फेफड़े और दिल की बीमारियों वाले लोगों पर प्रभाव अधिक खतरनक हो सकता है।

401-500 (गंभीर) : यह आपातकाल की स्थिति कही जाएगी। स्वस्थ लोगों का भी श्वसन तंत्र खराब हो सकता है। फेफड़े, ह्दय रोग वाले लोग गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं। अत: ऐसी स्थिति में पूरी तरह से घर के अंदर रहना ही उचित होता है।
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