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Jaunpur News: मुंबई जाने के 7 दिन बाद घर आया बेटा, बहू, पोता और पोती का शव, एक साथ उठे चार जनाजे तो रो पड़ा गांव

Sat, 15 Aug 2026 12:21 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 15 Aug 2026 12:21 AM IST
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The son returned home from Mumbai after 7 days, the bodies of his daughter-in-law, grandson, and granddaughter; when four funerals were held together, the village broke down in tears
सिंगरामऊ- इनामीपुर में एक साथ निकला चार जनाजा। ग्रामीण
सिंगरामऊ। इनामीपुर गांव में शुक्रवार को एक घर से चार जनाजे जब एक साथ उठे तो पूरा गांव रो पड़ा। बीते आठ अगस्त को परिवार मुंबई गया था। ठीक सात दिन बाद शुक्रवार को बेटे, बहू और दो मासूम बच्चों का शव घर लाया गया। इनामीपुर गांव निवासी मोहम्मद आरिफ (32) सिलाई का काम करके परिवार का भरण-पोषण करते थे। वे पत्नी मरजीना बानो (28), बेटी मन्नत (4) और बेटे अबान (2) के साथ मुंबई के घाटकोपर में किराए के मकान में रह रहे थे। पिता मोहम्मद अलीम ने बताया कि आरिफ आठ अगस्त को पत्नी और दोनों बच्चों के साथ मुंबई गए थे। नौ अगस्त को मुंबई पहुंचे। सोमवार को परिवार पर कहर टूट पड़ा। मुंबई में लगातार बारिश के दौरान मकान के ऊपर पेड़ और पत्थर गिर गए। इससे मकान ढह गया। मलबे में दबकर आरिफ, उनकी पत्नी मरजीना बानो, बेटी मन्नत और बेटे अबान की मौत हो गई।
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जिस आंगन में गूंजती थी किलकारी, वहां पसरा था सन्नाटा
जिस बेटे को पिता ने कुछ दिन पहले मुंबई के लिए विदा किया था, उसी बेटे का शव सामने था। बेटे के साथ बहू और दो मासूम पोते-पोती के शव देखकर मोहम्मद अलीम का कलेजा फट पड़ा। चीख-पुकार के बीच रिश्तेदार और ग्रामीण उन्हें संभालते रहे, लेकिन किसी के पास उनके दर्द को कम करने के लिए शब्द नहीं थे। चार जनाजे जब एक साथ घर से निकले तो पूरा गांव गम में डूब गया। चार साल की मन्नत और दो साल के अबान के जनाजे देखकर लोगों की आंखें भर आईं। गमगीन माहौल में चारों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। जनाजे लौटने के बाद घर के बाहर सन्नाटा पसरा रहा। जिस आंगन में कुछ दिन पहले बच्चों की किलकारियां थीं, वहां अब सिर्फ सिसकियां थीं।
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तीन भाइयों में सबसे बड़े थे आरिफ
आरिफ तीन भाइयों में सबसे बड़े थे। उनके दोनों छोटे भाई भी मुंबई में रहते हैं। परिवार की जिम्मेदारी संभालने वाले आरिफ के घर में बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं। आठ अगस्त को परिवार मुंबई गया तो किसी ने नहीं सोचा था कि महज सात दिन बाद उसी घर में चार शव लौटेंगे।
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