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कोविड के फेर में थमी कुपोषण से जंग
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जौनपुुर। कोरोना संक्रमण के दौरान जिम्मेदारों ने कुपोषित बच्चों की सुधि नहीं ली। जिम्मेदार न तो क्षेत्रों में जा रहे थे और न ही बच्चों का ख्याल रख पा रहे थे। कुपोषित बच्चों को मिलने वाली सुविधाएं भी उनको उपलब्ध नहीं हो पा रहीं थीं, जिसके कारण अब भी जिले में 55 हजार 800 बच्चे कुपोषित हैं।
जिले में कुपोषित बच्चों को स्वस्थ बनाने की जिम्मेदारी बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की है। इसके लिए जिले में 5321 आंगनबाड़ी केंद्र खोले गए हैं। बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए समय-समय पर अभियान चलाया जाता है। उनको पोषाहार भी बांटा जाता है। अधिकारियों की ओर से भी गांवों को गोद लेकर कुपोषण मुक्त बनाने का भी प्रावधान है, लेकिन कोरोना संक्रमण काल में इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया गया। संक्रमण के कारण जिम्मेदार ऐसे बच्चों की सुधि लेना भूल गए। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी एक दिन बच्चों को सिर्फ पोषाहार बांटने के लिए जा रही थीं। वहीं इस वित्तीय वर्ष में अधिकारियों ने भी कुपोषण से मुक्त बनाने के लिए गांवों को गोद नहीं लिया। इससे बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ा। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिले में कुपोषित बच्चों की संख्या 55 हजार 800 है, जिसमें छह हजार 443 बच्चे अतिकुपोषित हैं।
कोरोना संक्रमण के कारण कुपोषित बच्चों की देखभाल में दिक्कत हुई, लेकिन अब इन बच्चों के स्वास्थ्य का पूरा ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रतिदिन केंद्रों पर जाने और गांवों में कुपोषित बच्चों की जानकारी लेने का निर्देश दिया गया है। कोरोना के कारण एक भी गांव गोद नहीं लिए गए।
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- राकेश कुमार मिश्रा, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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जिले में कुपोषित बच्चों को स्वस्थ बनाने की जिम्मेदारी बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की है। इसके लिए जिले में 5321 आंगनबाड़ी केंद्र खोले गए हैं। बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए समय-समय पर अभियान चलाया जाता है। उनको पोषाहार भी बांटा जाता है। अधिकारियों की ओर से भी गांवों को गोद लेकर कुपोषण मुक्त बनाने का भी प्रावधान है, लेकिन कोरोना संक्रमण काल में इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया गया। संक्रमण के कारण जिम्मेदार ऐसे बच्चों की सुधि लेना भूल गए। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी एक दिन बच्चों को सिर्फ पोषाहार बांटने के लिए जा रही थीं। वहीं इस वित्तीय वर्ष में अधिकारियों ने भी कुपोषण से मुक्त बनाने के लिए गांवों को गोद नहीं लिया। इससे बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ा। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिले में कुपोषित बच्चों की संख्या 55 हजार 800 है, जिसमें छह हजार 443 बच्चे अतिकुपोषित हैं।
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कोरोना संक्रमण के कारण कुपोषित बच्चों की देखभाल में दिक्कत हुई, लेकिन अब इन बच्चों के स्वास्थ्य का पूरा ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रतिदिन केंद्रों पर जाने और गांवों में कुपोषित बच्चों की जानकारी लेने का निर्देश दिया गया है। कोरोना के कारण एक भी गांव गोद नहीं लिए गए।
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- राकेश कुमार मिश्रा, जिला कार्यक्रम अधिकारी