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Jaunpur News: नेत्रहीन पिता से छलपूर्वक ली गई जमीन का दान पत्र खारिज, सात महीना 21 दिन बाद मिला न्याय
Fri, 02 May 2025 09:59 AM IST
वाराणसी ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर।
Published by: वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 02 May 2025 09:59 AM IST
सार
Jaunpur News: उत्तर प्रदेश जिले के जौनपुर में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया। एक बेटे ने अपने नेत्रहीन पिता से छलपूर्वक जमीन अपने नाम दान करा लिया और पिता को घर से बाहर निकाल दिया। मामले में कोर्ट ने फैसला करते हुए दान पत्र खारिज कर दिया।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
विस्तार
एक बेटे ने नेत्रहीन पिता से जमीन अपने नाम दान करवाकर उन्हें घर से निकाल दिया। इस धोखे से मर्माहत नेत्रहीन पिता ने न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया। जॉइंट मजिस्ट्रेट कुमार सौरभ ने बृहस्पतिवार को पुत्र के पक्ष में लिखे गए दान पत्र को खारिज कर दिया।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि एक पुत्र ने अपने ही पिता से छलपूर्वक और कपटपूर्वक जमीन अपने नाम दान करवाई है, जिसे माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरणपोषण एवं कल्याण अधिनियम की धारा 23 (1) के तहत निरस्त किया जाता है। पिता को आखिरकार सात महीना 21 दिन बाद न्याय मिल ही गया। न्यायहित में लिए गए इस निर्णय की चर्चा तहसील में खूब हुई।
ये है पूरा मामला
कटाहितखास गांव निवासी रामधनी बिंद नेत्रहीन हैं। उनके दो लड़के रमाकांत, शशिकांत और एक अविवाहित बेटी माधुरी है। रामधनी के पास 16 बिस्वा भूमि थी। इसमें से 13 बिस्वा का दान पत्र 9 नवंबर 2023 को रमाकांत ने अपने हक में पिता से लिखवा लिया था। दान पत्र पाते ही पुत्र ने पिता को न सिर्फ भरण पोषण देना बंद कर दिया बल्कि घर से भी निकाल दिया।
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कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि एक पुत्र ने अपने ही पिता से छलपूर्वक और कपटपूर्वक जमीन अपने नाम दान करवाई है, जिसे माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरणपोषण एवं कल्याण अधिनियम की धारा 23 (1) के तहत निरस्त किया जाता है। पिता को आखिरकार सात महीना 21 दिन बाद न्याय मिल ही गया। न्यायहित में लिए गए इस निर्णय की चर्चा तहसील में खूब हुई।
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ये है पूरा मामला
कटाहितखास गांव निवासी रामधनी बिंद नेत्रहीन हैं। उनके दो लड़के रमाकांत, शशिकांत और एक अविवाहित बेटी माधुरी है। रामधनी के पास 16 बिस्वा भूमि थी। इसमें से 13 बिस्वा का दान पत्र 9 नवंबर 2023 को रमाकांत ने अपने हक में पिता से लिखवा लिया था। दान पत्र पाते ही पुत्र ने पिता को न सिर्फ भरण पोषण देना बंद कर दिया बल्कि घर से भी निकाल दिया।
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वादे के अनुरूप अपनी छोटी बहन की शादी करने से भी इन्कार कर दिया। इसके बाद परेशान रामधनी ने अपने पुत्र के खिलाफ अपने अधिवक्ता के माध्यम से 9 सितंबर 2024 को जॉइंट मजिस्ट्रेट के न्यायालय में दान पत्र को खारिज करने के लिए प्रार्थना पत्र दिया। चूंकि मामला माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण पोषण एवं कल्याण के अंतर्गत आता है इसलिए जॉइंट मजिस्ट्रेट कुमार सौरभ ने सुलह समझौता अधिकारी ललित मोहन तिवारी को मौके पर जांच के लिए भेजा।
इस दौरान सैकड़ों ग्राम वासियों ने रमाकांत की घोर आलोचना करते हुए रामधनी के लगाए गए आरोप को सही बताया और बयान भी दिया। जॉइंट मजिस्ट्रेट ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर उपरोक्त अधिनियम के तहत कार्यवाही करते हुए दान पत्र को निरस्त किया गया है। साथ ही दान पत्र के आधार पर कब्जा की गई जमीन को पिता को वापस किए जाने का भी आदेश दिया है। जॉइंट मजिस्ट्रेट के इस निर्णय की अधिवक्ता समाज जमकर सराहना कर रहा है।
इस दौरान सैकड़ों ग्राम वासियों ने रमाकांत की घोर आलोचना करते हुए रामधनी के लगाए गए आरोप को सही बताया और बयान भी दिया। जॉइंट मजिस्ट्रेट ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर उपरोक्त अधिनियम के तहत कार्यवाही करते हुए दान पत्र को निरस्त किया गया है। साथ ही दान पत्र के आधार पर कब्जा की गई जमीन को पिता को वापस किए जाने का भी आदेश दिया है। जॉइंट मजिस्ट्रेट के इस निर्णय की अधिवक्ता समाज जमकर सराहना कर रहा है।
ये है वरिष्ठ नागरिक अधिनियम की धारा
23धारा 23 मुख्य रूप से संपत्ति के हस्तांतरण को अमान्य करने के लिए एक तंत्र प्रदान करती है। इस धारा के तहत यदि कोई वरिष्ठ नागरिक अपनी संपत्ति को किसी अन्य व्यक्ति को दान देता है या हस्तांतरित करता है, तो यह इस शर्त के अधीन है कि प्राप्तकर्ता को बुनियादी देखभाल और भरणपोषण की सुविधाएं भी मिलती हैं। यदि प्राप्तकर्ता ऐसा करने में विफल रहता है, तो यह हस्तांतरण रद्द कर दिया जा सकता है।