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जौनपुर: 350 किमी का है शहर का दायरा, सीवर लाइन बिछाने की मंजूरी सिर्फ 160 की
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जौनपुर। गंदे पानी की समस्या से निजात दिलाने के लिए सीवर लाइन बिछाने पर ढाई सौ करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी शहर को इससे राहत नहीं मिलेगी। डीपीआर बनाते समय हुई त्रुटियों का खामियाजा शहरवासी लंबे समय तक भुगतेंगे। पूरे शहर को सीवर लाइन से संतृप्त करने के लिए साढ़े तीन सौ किमी लंबी सीवर लाइन की जरूरत है, जबकि डीपीआर में सिर्फ 160 किमी को ही रखा गया है। शेष इलाके का गंदा पानी कहां जाएगा, इसकी कोई व्यवस्था ही नहीं है। राजनीतिक दबाव में वहां पहले सीवर लाइन डाल दी गई जो डीपीआर में शामिल ही नहीं है। है। अब अन्य क्षेत्रों में कटौती की भी तैयारी चल रही है। भौतिक स्थिति को जाने बगैर तैयार डीपीआर शहरवासियों के साथ ही अब विभागीय अफसरों के लिए भी सिरदर्द बन गया है।
गंगा की सहायक नदी गोमती को स्वच्छ करने के लिए नमामि गंगे योजना के तहत 206 करोड़ से एसटीपी का निर्माण हो रहा है। एसटीपी तक गंदा पानी पहुंचाने के लिए अमृत योजना से ढाई सौ करोड़ रुपये खर्च कर शहर में सीवर लाइन बिछाने का कार्य चल रहा है। इसके लिए तीन वर्ष पूर्व डीपीआर तैयार हुआ था। निर्देश था कि डीपीआर बनाते समय अगले 20 वर्षों की स्थिति का ख्याल रखा जाए। इससे उलट मौजूदा हालात की भी अनदेखी की गई है। शहर के मध्य से गुजरी गोमती नदी के दोनों हिस्सों में सभी मोहल्लों को समाहित करने पर 350 किमी सीवर लाइन बिछाने की जरूरत होगी। इसमें ट्रांस गोमती क्षेत्र का दायरा 127 और सीत गोमती का 223 किमी है। इसके सापेक्ष डीपीआर में क्रमश: 67 और 93 किमी क्षेत्र को ही लिया गया है। शेष 190 किमी इलाके की जलनिकासी कैसे होगी, इसका कोई इंतजाम ही नहीं है। खास बात यह कि राजनीतिक दबाव में कई ऐसे इलाकों में भी सीवर लाइन बिछा दी गई, जिसे डीपीआर में रखा ही नहीं गया है। अब इसकी भरपाई को लेकर अफसर पशोपेश में पड़े हैं। उनकी मुश्किल इसलिए भी है कि अगर डीपीआर में शामिल हिस्से में लाइन नहीं डाली गई तो बजट अवमुक्त नहीं होगा और डीपीआर के अनुसार काम करें तो शहर के एक हिस्से से भी जलनिकासी पूरी नहीं हो पाएगी। अब इन खामियों के लिए पूर्व के अफसरों पर ठीकरा फोड़ते हुए जैसे-तैसे काम खत्म कराने की कवायद शुरू हो गई है।
...तो सीवर लाइन से वंचित होगा उत्तरी क्षेत्र
जौनपुर। गोमती नदी के उत्तरी हिस्से में पुराना शहर बसा हुआ है। चहारसू, कोतवाली, शाही किला, अटाला मस्जिद, रास मंडल, शकर मंडी, पुरानी बाजार सहित अन्य क्षेत्र इसके अंतर्गत आते हैं। इस क्षेत्र में कुल 223 किमी लंबी सीवर लाइन की जरूरत है। जबकि डीपीआर में सिर्फ 93 किमी एरिया ही स्वीकृत है। वहीं ओलंदगंज, नखास, रुहट्टा, पॉलीटेक्निक, अहमद खां मंडी, कलीचाबाद, जोगियापुर, सिविल लाइंस, जेसीज सहित अन्य क्षेत्र में 127 के सापेक्ष 67 किमी एरिया डीपीआर में शामिल किया गया है। शहर के दक्षिणी क्षेत्र को ही पूरी तरह संतृप्त करने के लिए उत्तरी क्षेत्र की स्वीकृत पूरी सीवर लाइन ट्रांसफर करने की कवायद भी चल रही है। ऐसा हुआ तो उत्तरी क्षेत्र में बसी घनी आबादी वाले पुराने शहर को गंदे पानी की निकासी से निजात के लिए फिर से इंतजार करना पड़ेेगा, जबकि इसी इलाके में जलनिकासी की समस्या सबसे ज्यादा गंभीर है।
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आगे और बढ़ेगा शहर का दायरा
शहर के बड़े हिस्से को डीपीआर में न लेना ही चूक नहीं है, इसे बनाते समय भविष्य की स्थिति का भी ख्याल नहीं किया गया है। शहर से सटे कई गांवों को वर्ष 2017 में नगर पालिका में शामिल किया गया है। तेजी से बढ़ते शहर में कई अन्य इलाके भी शामिल होने प्रस्तावित हैं। समय के साथ शहर का दायरा बढ़ता जाएगा लेकिन वहां सीवर लाइन की कोई योजना अभी नहीं है।
ह्य
पूरे शहर का दायरा 350 किमी का है, जबकि डीपीआर के तहत 160 किमी में ही सीवर लाइन बिछाई जानी है। इससे कुछ दिक्कतें आ रही हैं। शुरुआत में कुछ नए इलाकों में सीवर लाइन बिछाई गई थी, मगर अब तय डीपीआर के अनुसार ही काम कराया जा रहा है। वंचित इलाकों को शामिल करने के लिए नया डीपीआर भी बनाया जा रहा है। मंजूरी मिलने पर उन इलाकों में भी सीवर लाइन बिछाने का काम शुरू होगा। कार्य में मानक का पूरा पालन किया जाएगा। -एसके गुप्ता, एक्सईन, जलनिगम।
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गंगा की सहायक नदी गोमती को स्वच्छ करने के लिए नमामि गंगे योजना के तहत 206 करोड़ से एसटीपी का निर्माण हो रहा है। एसटीपी तक गंदा पानी पहुंचाने के लिए अमृत योजना से ढाई सौ करोड़ रुपये खर्च कर शहर में सीवर लाइन बिछाने का कार्य चल रहा है। इसके लिए तीन वर्ष पूर्व डीपीआर तैयार हुआ था। निर्देश था कि डीपीआर बनाते समय अगले 20 वर्षों की स्थिति का ख्याल रखा जाए। इससे उलट मौजूदा हालात की भी अनदेखी की गई है। शहर के मध्य से गुजरी गोमती नदी के दोनों हिस्सों में सभी मोहल्लों को समाहित करने पर 350 किमी सीवर लाइन बिछाने की जरूरत होगी। इसमें ट्रांस गोमती क्षेत्र का दायरा 127 और सीत गोमती का 223 किमी है। इसके सापेक्ष डीपीआर में क्रमश: 67 और 93 किमी क्षेत्र को ही लिया गया है। शेष 190 किमी इलाके की जलनिकासी कैसे होगी, इसका कोई इंतजाम ही नहीं है। खास बात यह कि राजनीतिक दबाव में कई ऐसे इलाकों में भी सीवर लाइन बिछा दी गई, जिसे डीपीआर में रखा ही नहीं गया है। अब इसकी भरपाई को लेकर अफसर पशोपेश में पड़े हैं। उनकी मुश्किल इसलिए भी है कि अगर डीपीआर में शामिल हिस्से में लाइन नहीं डाली गई तो बजट अवमुक्त नहीं होगा और डीपीआर के अनुसार काम करें तो शहर के एक हिस्से से भी जलनिकासी पूरी नहीं हो पाएगी। अब इन खामियों के लिए पूर्व के अफसरों पर ठीकरा फोड़ते हुए जैसे-तैसे काम खत्म कराने की कवायद शुरू हो गई है।
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...तो सीवर लाइन से वंचित होगा उत्तरी क्षेत्र
जौनपुर। गोमती नदी के उत्तरी हिस्से में पुराना शहर बसा हुआ है। चहारसू, कोतवाली, शाही किला, अटाला मस्जिद, रास मंडल, शकर मंडी, पुरानी बाजार सहित अन्य क्षेत्र इसके अंतर्गत आते हैं। इस क्षेत्र में कुल 223 किमी लंबी सीवर लाइन की जरूरत है। जबकि डीपीआर में सिर्फ 93 किमी एरिया ही स्वीकृत है। वहीं ओलंदगंज, नखास, रुहट्टा, पॉलीटेक्निक, अहमद खां मंडी, कलीचाबाद, जोगियापुर, सिविल लाइंस, जेसीज सहित अन्य क्षेत्र में 127 के सापेक्ष 67 किमी एरिया डीपीआर में शामिल किया गया है। शहर के दक्षिणी क्षेत्र को ही पूरी तरह संतृप्त करने के लिए उत्तरी क्षेत्र की स्वीकृत पूरी सीवर लाइन ट्रांसफर करने की कवायद भी चल रही है। ऐसा हुआ तो उत्तरी क्षेत्र में बसी घनी आबादी वाले पुराने शहर को गंदे पानी की निकासी से निजात के लिए फिर से इंतजार करना पड़ेेगा, जबकि इसी इलाके में जलनिकासी की समस्या सबसे ज्यादा गंभीर है।
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आगे और बढ़ेगा शहर का दायरा
शहर के बड़े हिस्से को डीपीआर में न लेना ही चूक नहीं है, इसे बनाते समय भविष्य की स्थिति का भी ख्याल नहीं किया गया है। शहर से सटे कई गांवों को वर्ष 2017 में नगर पालिका में शामिल किया गया है। तेजी से बढ़ते शहर में कई अन्य इलाके भी शामिल होने प्रस्तावित हैं। समय के साथ शहर का दायरा बढ़ता जाएगा लेकिन वहां सीवर लाइन की कोई योजना अभी नहीं है।
ह्य
पूरे शहर का दायरा 350 किमी का है, जबकि डीपीआर के तहत 160 किमी में ही सीवर लाइन बिछाई जानी है। इससे कुछ दिक्कतें आ रही हैं। शुरुआत में कुछ नए इलाकों में सीवर लाइन बिछाई गई थी, मगर अब तय डीपीआर के अनुसार ही काम कराया जा रहा है। वंचित इलाकों को शामिल करने के लिए नया डीपीआर भी बनाया जा रहा है। मंजूरी मिलने पर उन इलाकों में भी सीवर लाइन बिछाने का काम शुरू होगा। कार्य में मानक का पूरा पालन किया जाएगा। -एसके गुप्ता, एक्सईन, जलनिगम।