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खेत में सीधे सुपर सीडर से करें गेहूं की बुवाई
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जौनपुर। विकास खंड धर्मापुर एवं मुफ्तीगंज में कृषि सूचना तंत्र के सुदृढ़ीकरण एवं कृषक जागरूकता कार्यक्रम के तहत रबी उत्पादकता किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें किसानों से लाइन में बुवाई करने और कृषि विभाग द्वारा संचालित योजनाओं, बीज वितरण, कृषि यंत्रों पर अनुदान, कम लागत में अधिक उत्पादन वाली तकनीकी का प्रशिक्षण दिया गया।
उप परियोजना निदेशक आत्मा डॉ. रमेशचंद्र यादव ने कहा कि धान के खेत में किसान बिना जुताई किए सीधे जीरो टिल सुपर सीडर मशीन से लाइन में गेहूं की बुवाई करें। इससे बीज, खाद एवं पानी की मात्रा कम लगेगी। खाद जो बुवाई के समय देंगे, उसका भरपूर लाभ पौधों को मिलेगा। किसान इस विधि से बुवाई करके कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। धान की लंबी अवधि की प्रजातियों की कटाई के बाद नहर सिंचित क्षेत्रों में अधिक नमी होने के कारण जुताई करके खेत की तैयारी कर बुआई करने में विलंब हो जाता है। इससे उत्पादन घट जाता। सुझाव दिया कि धान की फसल काटने के बाद खड़े ठूठ में बगैर जुताई की मशीन से लाइन में बुवाई करने से कृषि निवेशों की बचत होगी। साथ ही सवा गुना ज्यादा उत्पादन प्राप्त होगा। परती खेतों में बुआई करने से सिंचाई जल की बचत होगी तथा खरपतवार भी कम निकलेंगे। लाइन में बुवाई करने पर बीज एक निश्चित गहराई वह अंतराल पर गिरता है। एक एकड़ के लिए 40 किग्रा गेहूं का बीज और 50 किग्रा डीएपी लगती है। लाइन में बुवाई से खाद एवं बीज का प्रॉपर प्लेसमेंट होता है। इसलिए उत्पादन बढ़ जाता है। बुवाई 5 सेंटीमीटर गहराई पर होती है। इसलिए जड़ों का विकास अच्छा होता है। फरवरी में जब गर्म हवाएं चलती हैं तो सिंचाई करने पर फसल गिरती नहीं, इतना ही नहीं लाइन में बुवाई से शस्य क्रियाएं आसानी से होती हैं। प्रति हेक्टेयर चार हजार लागत में कमी लाते हुए बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
कृषि वैज्ञानिक डा. संजीत कुमार ने मृदा स्वास्थ्य, उर्वरक प्रबंधन, सिंचाई प्रबंधन, खरपतवार प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी। गोष्ठी की अध्यक्षता मंडल अध्यक्ष भाजपा राधेश्याम विश्वकर्मा और संचालन एडीओ एजी आत्मा राम ने किया। इस मौके पर तकनीकी सहायक श्रवण कुमार सिंह. बीटीएम ज्ञानेश्वर मिश्र, ज्ञानेंद्र कुमार, उमेश सिंह, गुलाब मौर्य, संध्या सिंह रामाशीष, आजाद आदि किसान मौजूद रहे। एडीओ एजी अशोक कुमार सिंह ने आभार जताया।
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उप परियोजना निदेशक आत्मा डॉ. रमेशचंद्र यादव ने कहा कि धान के खेत में किसान बिना जुताई किए सीधे जीरो टिल सुपर सीडर मशीन से लाइन में गेहूं की बुवाई करें। इससे बीज, खाद एवं पानी की मात्रा कम लगेगी। खाद जो बुवाई के समय देंगे, उसका भरपूर लाभ पौधों को मिलेगा। किसान इस विधि से बुवाई करके कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। धान की लंबी अवधि की प्रजातियों की कटाई के बाद नहर सिंचित क्षेत्रों में अधिक नमी होने के कारण जुताई करके खेत की तैयारी कर बुआई करने में विलंब हो जाता है। इससे उत्पादन घट जाता। सुझाव दिया कि धान की फसल काटने के बाद खड़े ठूठ में बगैर जुताई की मशीन से लाइन में बुवाई करने से कृषि निवेशों की बचत होगी। साथ ही सवा गुना ज्यादा उत्पादन प्राप्त होगा। परती खेतों में बुआई करने से सिंचाई जल की बचत होगी तथा खरपतवार भी कम निकलेंगे। लाइन में बुवाई करने पर बीज एक निश्चित गहराई वह अंतराल पर गिरता है। एक एकड़ के लिए 40 किग्रा गेहूं का बीज और 50 किग्रा डीएपी लगती है। लाइन में बुवाई से खाद एवं बीज का प्रॉपर प्लेसमेंट होता है। इसलिए उत्पादन बढ़ जाता है। बुवाई 5 सेंटीमीटर गहराई पर होती है। इसलिए जड़ों का विकास अच्छा होता है। फरवरी में जब गर्म हवाएं चलती हैं तो सिंचाई करने पर फसल गिरती नहीं, इतना ही नहीं लाइन में बुवाई से शस्य क्रियाएं आसानी से होती हैं। प्रति हेक्टेयर चार हजार लागत में कमी लाते हुए बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
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कृषि वैज्ञानिक डा. संजीत कुमार ने मृदा स्वास्थ्य, उर्वरक प्रबंधन, सिंचाई प्रबंधन, खरपतवार प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी। गोष्ठी की अध्यक्षता मंडल अध्यक्ष भाजपा राधेश्याम विश्वकर्मा और संचालन एडीओ एजी आत्मा राम ने किया। इस मौके पर तकनीकी सहायक श्रवण कुमार सिंह. बीटीएम ज्ञानेश्वर मिश्र, ज्ञानेंद्र कुमार, उमेश सिंह, गुलाब मौर्य, संध्या सिंह रामाशीष, आजाद आदि किसान मौजूद रहे। एडीओ एजी अशोक कुमार सिंह ने आभार जताया।
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