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तो जिले में यूरिया की किल्लत हुई नहीं, कराई गई
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जौनपुर। जिले में यूरिया के लिए मारामारी की असल वजह उसकी किल्लत नहीं बल्कि वितरण में गड़बड़ी के चलते अफरातफरी मच गई। जुलाई माह में इमरजेंसी के लिए रखे गए स्टॉक में से 1835.25 टन यूरिया साधन सहकारी समितियों व इफको केंद्रों को दी गई थी। इसकी जानकारी न तो जिला प्रशासन को दी गई और न ही कृषि विभाग को। कोऑपरेटिव, इफको व पीसीएफ के जिम्मेदारों की मिलीभगत से यूरिया की किल्लत पैदा हो गई। यह बात संयुक्त निदेशक कृषि की आरंभिक जांच में सामने आई है।
खरीफ फसल के लिए पीसीएफ गोदाम में प्री पोजिसिनिंग स्टॉक के तहत 5011 टन यूरिया रखी गई थी। इसके अलावा अप्रैल, मई, जून व जुलाई माह तक समितियों व इफको केंद्रों पर 2994.15 टन यूरिया भेजी गई। धान की नर्सरी डालने और रोपाई के वक्त इसी स्टॉक से यूरिया वितरण किया जाना था। खाद की कोई किल्लत नहीं थी। इसके बावजूद एआर कोऑपरेटिव, इफको व पीसीएफ के जिला प्रबंधकों ने जिले में इमरजेंसी के लिए रखे स्टाक में से 1835.25 टन यूरिया समितियों व इफको के केंद्रों पर भेज दी।
इसकी जानकारी जिला प्रशासन और कृषि विभाग को नहीं दी गई। समितियों ने इसे अपने अनुसार बेचना शुरू कर दिया। जब धान की फसल में छिड़काव के लिए किसानों को यूरिया की आवश्यकता हुई तो समितियों पर खाद ही नहीं बची थी। जांच के दौरान स्टॉक का मिलान करने पर इमरजेंसी के लिए रखी गई यूरिया का स्टॉक कम पाया गया है। पता चला कि साधन सहकारी समितियों पर यूरिया की भले ही किल्लत हो लेकिन खरीफ फसल के लिए हर माह में यूरिया भेजी गई। अप्रैल माह में 954.585 टन, मई में 980.955 टन, जून में 670.005 टन, जुलाई में 2223.855 टन और अगस्त में अब तक 2325 टन यूरिया भेजी जा चुकी है।
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इस संबंध में संयुक्त निदेशक कृषि अखिलेश शर्मा का कहना है कि खरीफ फसल में इमरजेंसी स्टाक में से जुलाई माह में 1835.25 टन यूरिया निकाली गई। यह कहां गई इसका पता लगाया जा रहा है। जांच में गड़बड़ी मिलने पर संबंधितों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
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खरीफ फसल के लिए पीसीएफ गोदाम में प्री पोजिसिनिंग स्टॉक के तहत 5011 टन यूरिया रखी गई थी। इसके अलावा अप्रैल, मई, जून व जुलाई माह तक समितियों व इफको केंद्रों पर 2994.15 टन यूरिया भेजी गई। धान की नर्सरी डालने और रोपाई के वक्त इसी स्टॉक से यूरिया वितरण किया जाना था। खाद की कोई किल्लत नहीं थी। इसके बावजूद एआर कोऑपरेटिव, इफको व पीसीएफ के जिला प्रबंधकों ने जिले में इमरजेंसी के लिए रखे स्टाक में से 1835.25 टन यूरिया समितियों व इफको के केंद्रों पर भेज दी।
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इसकी जानकारी जिला प्रशासन और कृषि विभाग को नहीं दी गई। समितियों ने इसे अपने अनुसार बेचना शुरू कर दिया। जब धान की फसल में छिड़काव के लिए किसानों को यूरिया की आवश्यकता हुई तो समितियों पर खाद ही नहीं बची थी। जांच के दौरान स्टॉक का मिलान करने पर इमरजेंसी के लिए रखी गई यूरिया का स्टॉक कम पाया गया है। पता चला कि साधन सहकारी समितियों पर यूरिया की भले ही किल्लत हो लेकिन खरीफ फसल के लिए हर माह में यूरिया भेजी गई। अप्रैल माह में 954.585 टन, मई में 980.955 टन, जून में 670.005 टन, जुलाई में 2223.855 टन और अगस्त में अब तक 2325 टन यूरिया भेजी जा चुकी है।
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इस संबंध में संयुक्त निदेशक कृषि अखिलेश शर्मा का कहना है कि खरीफ फसल में इमरजेंसी स्टाक में से जुलाई माह में 1835.25 टन यूरिया निकाली गई। यह कहां गई इसका पता लगाया जा रहा है। जांच में गड़बड़ी मिलने पर संबंधितों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।