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लॉकडाउन में गायक बन गए पूर्व विधायक, 3.45 मिनट के गीत में सुनाई घर लौट रहे मजदूरों की पीड़ा

Fri, 22 May 2020 08:56 AM IST
स्‍वाधीन तिवारी मनीष जायसवाल, अमर उजाला, जौनपुर
मनीष जायसवाल, अमर उजाला, जौनपुर Published by: स्‍वाधीन तिवारी Updated Fri, 22 May 2020 08:56 AM IST
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Singer became former MLA in lockdown in jaunpur
पैदल घर जाते मजदूर - फोटो : अमर उजाला

कोरोना महामारी से बचाव के लिए लॉकडाउन लागू होने से देश के प्रमुख महानगरों में रोजगार-धंधा ठप होने के बाद बड़ी संख्या में मजदूर घर लौट रहे हैं। कहीं पैदल तो कहीं बस, ट्रक, बाइक, सायकिल का सहारा लेकर मीलों का सफर तय कर रहे मजदूरों की बेबसी एक बड़ी त्रासदी बनकर सामने आई है। इस पीड़ा को दर्शाती तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया में खूब वायरल हो रहे हैं, जिसके सहारे सरकार और विपक्षी दल एक-दूसरे को निशाना बना रहे हैं। मजदूरों के इसी दर्द और बेबसी को यूपी के जौनपुर जिले के एक पूर्व विधायक ने शब्दों में पिरोकर गीत का रूप दिया है।

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पूर्व विधायक के स्वर में करीब पौने चार मिनट का यह गीत यू ट्यूब पर पसंद किया जा रहा है। एक दिन में ही इसे सवा सौ से अधिक लोग देख चुके हैं। ये पूर्व विधायक हैं ओमप्रकाश उर्फ बाबा दुबे। बदलापुर से 2012 से 2017 तक सपा से विधायक रहे बाबा दुबे बड़े कारोबारी भी हैं। वह पहले भी कई बार चर्चा में रहे हैं। इस बार प्रवासी मजदूरों की बेबसी पर गाया उनका गीत चर्च में है।
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Singer became former MLA in lockdown in jaunpur
घर लौटते प्रवासी मजदूर - फोटो : amar ujala
लौट सका तो फिर आऊंगा स्वप्निल शहर बसाने को, लेकिन  आज मुझे मत रोको मन करता घर जाने को... गीत को लिखा है सुनील पांडेय ने और इसे स्वर दिया है बाबा दुबे ने। बिना किसी साज-बाज के यह गीत लोगों के दिल को छू रहा है।

 

Singer became former MLA in lockdown in jaunpur
प्रवासी मजदूर - फोटो : amar ujala

पूर्व विधायक बताते हैं कि लॉकडाउन के कारण काफी दिनों से कारोबार बंद है। वह घर में हैं। मजदूरों के दर्द ने उन्हें झकझोर दिया। सहयोगी सुनील के साथ मिलकर यह गीत रिकॉर्ड किया। वह कोई गायक नहीं औऱ न ही कवि हैं, मगर मजदूरों का हाल देखकर खुद को रोक नहीं पाए। पूर्व विधायक अपने स्तर से बिना सुर्खियों में आए लोगों की गुपचुप मदद भी कर रहे हैं, जिसका प्रदर्शन वह उचित नहीं मानते।

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