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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jaunpur News ›   Sawan Special: The history of this temple is related to Tretayuga, Shatrughan had established it

Sawan Special: त्रेतायुग से जुड़ा है इस मंदिर का इतिहास, शत्रु पर विजय पाने के लिए शत्रुघ्न ने की थी स्थापना

Sat, 15 Jul 2023 01:28 PM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जौनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जौनपुर Published by: किरन रौतेला Updated Sat, 15 Jul 2023 01:28 PM IST
सार

बुजुर्गों के अनुसार, त्रेता युग में भगवान श्रीराम के अनुज शत्रुघ्न अयोध्या से बाणासुर नामक राक्षस पर विजय प्राप्त करने के लिए जाते समय इस परिसर में पधारे। मंदिर के पुजारी चंद्रमा प्रसाद बताते हैं कि यह क्षेत्र भयंकर जंगल से आच्छादित था। बाणासुर नामक राक्षस इसी जंगल में निवास करता था। बाणासुर से कई महीने युद्ध करने के बाद भी युवराज उस पर विजय प्राप्त नहीं कर सके थे।

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Sawan Special: The history of this temple is related to Tretayuga, Shatrughan had established it
त्रेतायुग से जुड़ा है दियावा नाथ महादेव का इतिहास - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वाराणसी से सटे जौनपुर जिले के प्रसिद्ध शिव मंदिरों में दियावा महादेव मंदिर अलग ही अहमियत रखता है। मछलीशहर से मड़ियाहूं जाने वाले मार्ग पर बसुही नदी के किनारे स्थित इस मंदिर का इतिहास त्रेतायुग से जुड़ा। बताया जाता है कि यहां शिवलिंग की स्थापना भगवान राम के भाई युवराज शत्रुघ्न ने किया था। उस समय इस मंदिर का नाम दीनानाथ था, बाद में दियावांनाथ हो गया। क्षेत्र के लिए नहीं बल्कि अन्य जनपदों के लोगों के बीच आस्था के केंद्र बने इस मंदिर में हर सोमवार को शिव भक्तों का मेला लगता है। सावन माह में कावरियों के साथ-साथ हजारों की संख्या में शिव भक्त जलाभिषेक करते हैं।

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क्या बताते हैं गांव के बुजुर्ग, कैसे हुई स्थापना
बुजुर्गों के अनुसार, त्रेता युग में भगवान श्रीराम के अनुज शत्रुघ्न अयोध्या से बाणासुर नामक राक्षस पर विजय प्राप्त करने के लिए जाते समय इस परिसर में पधारे। मंदिर के पुजारी चंद्रमा प्रसाद बताते हैं कि यह क्षेत्र भयंकर जंगल से आच्छादित था। बाणासुर नामक राक्षस इसी जंगल में निवास करता था। बाणासुर से कई महीने युद्ध करने के बाद भी युवराज उस पर विजय प्राप्त नहीं कर सके थे। वह इतना शक्तिशाली था कि शत्रुघ्न को उसकी समस्त सेना के साथ मूर्छित कर दिया। जब यह सूचना दूतों ने अयोध्या के राजा भगवान श्रीराम को दी तब वे अपने गुरु वशिष्ठ के साथ यहां पहुंचे। भगवान राम के प्रताप से शत्रुघ्न समस्त सेना के साथ चेतावस्था में हो गए। इसके बाद राम ने बाणासुर पर विजय प्राप्त करने का उपाय अपने गुरु से पूछा। गुरु वशिष्ठ ने बताया कि शत्रु पर विजय प्राप्त करने की लिए सर्वप्रथम शिवलिंग स्थापित करना होगा। इस पर भगवान राम की उपस्थिति में उनके छोटे भाई शत्रुघ्न ने यहां (दियावां) में शिवलिंग की स्थापना की। 

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Sawan Special: The history of this temple is related to Tretayuga, Shatrughan had established it
दियावा नाथ महादेव - फोटो : अमर उजाला
सावन में हर दिन होती भीड़, कांवड़िये करते हैं जलाभिषेक
वैसे तो यहां पूरे वर्ष हर सोमवार को मेला लगता है, लेकिन सावन माह में भक्तों का तांता लगा रहता है। हजारों की संख्या में नर-नारी व कांवड़िये यहां जलाभिषेक करते हैं। मिन्नतें मांगने और मत्था टेकने दूर-दराज से लोग आते हैं।
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