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साठ फीसदी गांवों का आरक्षण् पूरा, जल्द शासन को जाएगी रिपोर्ट
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जौनपुर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण की अनंतिम सूची तीन मार्च को जारी होनी है। जिला स्तर पर आरक्षण तय करने में विभागीय अफसर जुटे हैं। पूर्व के आरक्षण और गांवों की आबादी का मिलान कर शासन की ओर से निर्धारित मानक के तहत आरक्षण तय किया जा रहा है। साठ फीसदी से अधिक गांवों का आरक्षण तय भी हो चुका है। शीघ्र ही इसे अंतिम रूप देकर शासन को प्रेषित कर दिया जाएगा। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद सूची का प्रकाशन किया जाएगा।
जिले के 1740 ग्राम प्रधान, 2027 बीडीसी सदस्य, 83 जिला पंचायत और 21544 ग्राम पंचायत सदस्यों का आरक्षण निर्धारित होना है। आरक्षण निर्धारण में पारदर्शिता के लिए शासन ने इस बार द्विस्तरीय प्रक्रिया अपनाई है। जिला स्तर से आरक्षण तय होने के बाद उसे शासन को भेजा जाएगा। वहां से मानक के विभिन्न बिंदुओं पर मिलान के बाद सहमति बनेगी। इसके बाद ही आरक्षण की सूची सार्वजनिक होगी। जिला स्तर पर आरक्षण निर्धारण के लिए डीएम की अध्यक्षता में चार सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। इसमें सीडीओ, डीपीआरओ व जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी सदस्य हैं। इन दिनों कार्यालय से इतर गोपनीय ढंग से यह कमेटी आरक्षण की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में जुटी है। आरक्षण निर्धारण के लिए नियमों में बदलाव से अफसरों को अधिक माथापच्ची करनी पड़ रही है। पहले उन ग्राम पंचायत व वार्डों को अलग किया जा रहा है, जहां पूर्व में कोई आरक्षण नहीं था। इसके बाद वहां अन्य श्रेणियों की आबादी का मिलान हो रहा है। उन पंचायतों व वार्डों को ही सबसे पहले आरक्षण में शामिल किया जाना है, जो अब तक अनारक्षित रहे हैं। आरक्षण की यह प्रक्रिया साठ फीसदी तक पूरी हो चुकी है। एक मार्च तक यह सूची शासन को प्रेषित करने का लक्ष्य रखा गया है।
आरक्षण का कार्य अंतिम रूप में पहुंच गया है, जिसे समय से पूरा कर लिया जाएगा। शासन से आए गाइड लाइन के अनुसार ही पंचायतों के सभी पदों का आरक्षण किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में किसी का हस्तक्षेप न हो इसके पूरी प्रक्रिया गोपनीय स्थान पर पूरी की जा रही है। खुद इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। -अनुपम शुक्ला, मुख्य विकास अधिकारी
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जिले के 1740 ग्राम प्रधान, 2027 बीडीसी सदस्य, 83 जिला पंचायत और 21544 ग्राम पंचायत सदस्यों का आरक्षण निर्धारित होना है। आरक्षण निर्धारण में पारदर्शिता के लिए शासन ने इस बार द्विस्तरीय प्रक्रिया अपनाई है। जिला स्तर से आरक्षण तय होने के बाद उसे शासन को भेजा जाएगा। वहां से मानक के विभिन्न बिंदुओं पर मिलान के बाद सहमति बनेगी। इसके बाद ही आरक्षण की सूची सार्वजनिक होगी। जिला स्तर पर आरक्षण निर्धारण के लिए डीएम की अध्यक्षता में चार सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। इसमें सीडीओ, डीपीआरओ व जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी सदस्य हैं। इन दिनों कार्यालय से इतर गोपनीय ढंग से यह कमेटी आरक्षण की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में जुटी है। आरक्षण निर्धारण के लिए नियमों में बदलाव से अफसरों को अधिक माथापच्ची करनी पड़ रही है। पहले उन ग्राम पंचायत व वार्डों को अलग किया जा रहा है, जहां पूर्व में कोई आरक्षण नहीं था। इसके बाद वहां अन्य श्रेणियों की आबादी का मिलान हो रहा है। उन पंचायतों व वार्डों को ही सबसे पहले आरक्षण में शामिल किया जाना है, जो अब तक अनारक्षित रहे हैं। आरक्षण की यह प्रक्रिया साठ फीसदी तक पूरी हो चुकी है। एक मार्च तक यह सूची शासन को प्रेषित करने का लक्ष्य रखा गया है।
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आरक्षण का कार्य अंतिम रूप में पहुंच गया है, जिसे समय से पूरा कर लिया जाएगा। शासन से आए गाइड लाइन के अनुसार ही पंचायतों के सभी पदों का आरक्षण किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में किसी का हस्तक्षेप न हो इसके पूरी प्रक्रिया गोपनीय स्थान पर पूरी की जा रही है। खुद इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। -अनुपम शुक्ला, मुख्य विकास अधिकारी
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