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दुर्गा पूजा समितियों ने पेश की सौहार्द की अनूठी मिसाल
ब्यूरो/अमर उजाला, जौनपुर
Updated Thu, 29 Sep 2016 12:53 AM IST
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पूजा महासमिति के अध्यक्ष शशांक सिंह व अजादारी काउंसिल के अध्यक्ष सैयद मोहम्मद हसन।
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ये शहर है अमन का यहां की फ़िज़ा है निराली यहां पे सब शांति शांति है। राज फिल्म का यह गीत इस प्राचीन शहर पर सटीक बैठता है। देश दुनियां में जब भी कभी सांप्रदायिक ताकतों ने समाज में जहर घोलने की कोशिश की तो यहां की आबोहवा पर कोई असर नहीं रहा। इस साल भी जब नवरात्र और मोहर्रम एक साथ आया तो बिना किसी प्रशासनिक पहल के ही दोनों संप्रदाय के लोगों नें संभावित समस्याओं का हल निकाल लिया। बीच सड़क पर स्थापित होने वाले पूजा पंडाल सड़क के किनारे लगा दिए गए और अलम के जुलूस के लिए कोई दिक्कत न हो इसके लिए सड़क के ऊपर झालरों से की जाने वाली सजावट में भी संशोधन कर लिया गया।
नवरात्र में नगर के विभिन्न इलाकों में कुल 120 दुर्गापूजा पंडाल स्थापित होते हैं। इसमें कई पंडाल ऐसे स्थान पर स्थापित होते हैं जिधर से मोहर्रम में अलम का जुलूस भी निकलता है। ऐसे में नवरात्र और मोहर्रम एक साथ होने पर प्रशासनिक अफसर भी कहीं न कहीं से परेशान थे। लेकिन हमेशा से ही एक दूसरे की भावनाओं का कद्र करते चले आए इस शहर के दोनों संप्रदाय के लोगों ने इस बार भी समझदारी का परिचय दिया और सभी संभावित समस्याओं का हल निकाल लिया।
दुर्गापूजा महासमिति के अध्यक्ष शशांस सिंह रानू कहते हैं कि मोहर्रम की पहली तारीख से लेकर दसवीं तक कई बार अलम का जुलूस निकलता है। इससे देखते हुए भारतीय दुर्गापूजा समिति द्वारा जहांगिराबाद में स्थापित होने वाला पूजा पंडाल सड़क के मध्य से हटाकर एक किनारे कर लिया गया है। यहां सड़क के ऊपर सजने वाला झालर इस बार सड़क के बगल से सजाया जाएगा। ऊपर की जगह अलम के जुलूस के लिए छोड़ दी गई है। इसके अलावा सरस्वती बाल ज्ञान संस्थान की ओर से मानिक चौक, रासमंडल, दाऊ दयाल संस्था सिपाह, न्यू कादंबरी संस्था, शिवाजी संगठन पांन दरीबा आदि इलाकों में पांजा पंडाल और वहां होने वाली साज सज्जा में संशोधन किया गया है।
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नवरात्र में नगर के विभिन्न इलाकों में कुल 120 दुर्गापूजा पंडाल स्थापित होते हैं। इसमें कई पंडाल ऐसे स्थान पर स्थापित होते हैं जिधर से मोहर्रम में अलम का जुलूस भी निकलता है। ऐसे में नवरात्र और मोहर्रम एक साथ होने पर प्रशासनिक अफसर भी कहीं न कहीं से परेशान थे। लेकिन हमेशा से ही एक दूसरे की भावनाओं का कद्र करते चले आए इस शहर के दोनों संप्रदाय के लोगों ने इस बार भी समझदारी का परिचय दिया और सभी संभावित समस्याओं का हल निकाल लिया।
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दुर्गापूजा महासमिति के अध्यक्ष शशांस सिंह रानू कहते हैं कि मोहर्रम की पहली तारीख से लेकर दसवीं तक कई बार अलम का जुलूस निकलता है। इससे देखते हुए भारतीय दुर्गापूजा समिति द्वारा जहांगिराबाद में स्थापित होने वाला पूजा पंडाल सड़क के मध्य से हटाकर एक किनारे कर लिया गया है। यहां सड़क के ऊपर सजने वाला झालर इस बार सड़क के बगल से सजाया जाएगा। ऊपर की जगह अलम के जुलूस के लिए छोड़ दी गई है। इसके अलावा सरस्वती बाल ज्ञान संस्थान की ओर से मानिक चौक, रासमंडल, दाऊ दयाल संस्था सिपाह, न्यू कादंबरी संस्था, शिवाजी संगठन पांन दरीबा आदि इलाकों में पांजा पंडाल और वहां होने वाली साज सज्जा में संशोधन किया गया है।
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