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मुठभेड में ढेर हुए प्रशांत की मोबाइल खंगाल रही पुलिस
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जौनपुर के सरपतहां में एक दिन पहले पुलिस मुठभेड़ में ढेर हुए एक लाख रुपये के इनामिया बदमाश प्रशांत पांडेय उर्फ कल्लू के पास से पुलिस ने दो मोबाइल बरामद की थी, जिसे अब पुलिस उसकी कॉल डिटेल्ड खंगालने में जुट गई है। पुलिस को जांच में यह भी पता चला है कि जौनपुर में भी उसके कुछ रिश्तेदार रहते हैं। जिनसे भी उसके बारे में पूछताछ की गई है।
कम उम्र में ही प्रशांत कुमार पांडेय और सरतपहां थाने क्षेत्र के चौबहा निवासी दीपक तिवारी उर्फ अर्पित के साथ एक के बाद एक वारदात को अंजाम देता था। वर्ष 2015 में प्रशांत के विरुद्ध कादीपुर कोतवाली में हत्या के प्रयास का पहला मुकदमा दर्ज हुआ। वह जेल गया तो अन्य शातिर अपराधियों की सोहबत में आने पर जरायम की दुनिया उसे रास आ गई। जेल से बाहर आया तो गिरोह बनाकर संगीन वारदातें करने लगा। लूट, डकैती, हत्या, चोरी, रंगदारी मांगने जैसी घटनाओं के बाद वह सुल्तानपुर, अंबेडकर नगर और जौनपुर में आतंक का दूसरा नाम बन गया। गैंगस्टर में निरुद्ध हुआ। फिर कादीपुर कोतवाली में हिस्ट्रीशीट खुली। आइजी अयोध्या ने 50 हजार तो जौनपुर व अंबेडकर नगर के एसपी ने जिंदा या मुर्दा पकड़ने पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया। क्योंकि इन जिलों में उसके खिलाफ 29 मुकदमे दर्ज हो गए थे। वह अपने दोस्त दीपक तिवारी के साथ पुलिस की निगाह से बचकर जरायम की दुनिया में आगे बढ़ता जा रहा था।
हालांकि पुलिस की नजर से वह बच नहीं पाया और उसके खिलाफ सुल्तानपुर, जौनपुर, आजमगढ़ और अंबेडकर नगर में कुल 25 मुकदमें दर्ज हुए। वहीं, पुलिस ने भी उसपर एक लाख रूपये का ईनाम घोषित किया, जिसमें जौनपुर में 50 हजार और सुल्तानपुर और अंबेडकर नगर पुलिस ने 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया जाना शामिल था।
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जिसे पुलिस ने 29 अगस्त को सुल्तानपुर से गिरफ्तार कर जेल भेज दी है। जांच में दीपक और प्रशांत की नजदीकियां सामने आई। जांच में यह भी बात सामने आई कि दोनों कम उम्र में कुख्यात के किस्म के अपराधी बन गए। ये कम साथियों के साथ ही किसी भी वारदात को अंजाम देने में विश्वास रखते थे। साथ ही घटना के समय खुद बाइक चलाते थे और मुख्य सड़क से न जाकर गलियों के रास्ते फरार होते थे। एएसपी सिटी डा. संजय कुमार ने बताया कि कम उम्र में ही प्रशांत और दीपक शातिर किस्म के अपराधी बन गए थे। प्रशांत के पास से बरामद हुए दोनों मोबाइल को विवेचना में शामिल किया गया है। इसी के सहारे उसके अन्य सहयोगियों का भी पता किया जाएगा।
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कम उम्र में ही प्रशांत कुमार पांडेय और सरतपहां थाने क्षेत्र के चौबहा निवासी दीपक तिवारी उर्फ अर्पित के साथ एक के बाद एक वारदात को अंजाम देता था। वर्ष 2015 में प्रशांत के विरुद्ध कादीपुर कोतवाली में हत्या के प्रयास का पहला मुकदमा दर्ज हुआ। वह जेल गया तो अन्य शातिर अपराधियों की सोहबत में आने पर जरायम की दुनिया उसे रास आ गई। जेल से बाहर आया तो गिरोह बनाकर संगीन वारदातें करने लगा। लूट, डकैती, हत्या, चोरी, रंगदारी मांगने जैसी घटनाओं के बाद वह सुल्तानपुर, अंबेडकर नगर और जौनपुर में आतंक का दूसरा नाम बन गया। गैंगस्टर में निरुद्ध हुआ। फिर कादीपुर कोतवाली में हिस्ट्रीशीट खुली। आइजी अयोध्या ने 50 हजार तो जौनपुर व अंबेडकर नगर के एसपी ने जिंदा या मुर्दा पकड़ने पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया। क्योंकि इन जिलों में उसके खिलाफ 29 मुकदमे दर्ज हो गए थे। वह अपने दोस्त दीपक तिवारी के साथ पुलिस की निगाह से बचकर जरायम की दुनिया में आगे बढ़ता जा रहा था।
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हालांकि पुलिस की नजर से वह बच नहीं पाया और उसके खिलाफ सुल्तानपुर, जौनपुर, आजमगढ़ और अंबेडकर नगर में कुल 25 मुकदमें दर्ज हुए। वहीं, पुलिस ने भी उसपर एक लाख रूपये का ईनाम घोषित किया, जिसमें जौनपुर में 50 हजार और सुल्तानपुर और अंबेडकर नगर पुलिस ने 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया जाना शामिल था।
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जिसे पुलिस ने 29 अगस्त को सुल्तानपुर से गिरफ्तार कर जेल भेज दी है। जांच में दीपक और प्रशांत की नजदीकियां सामने आई। जांच में यह भी बात सामने आई कि दोनों कम उम्र में कुख्यात के किस्म के अपराधी बन गए। ये कम साथियों के साथ ही किसी भी वारदात को अंजाम देने में विश्वास रखते थे। साथ ही घटना के समय खुद बाइक चलाते थे और मुख्य सड़क से न जाकर गलियों के रास्ते फरार होते थे। एएसपी सिटी डा. संजय कुमार ने बताया कि कम उम्र में ही प्रशांत और दीपक शातिर किस्म के अपराधी बन गए थे। प्रशांत के पास से बरामद हुए दोनों मोबाइल को विवेचना में शामिल किया गया है। इसी के सहारे उसके अन्य सहयोगियों का भी पता किया जाएगा।