{"_id":"6138f72b8ebc3ef2c071357e","slug":"overnight-repair-of-royal-bridge-investigation-started-jaunpur-news-vns610495337","type":"story","status":"publish","title_hn":"रातोरात की शाही पुल की मरम्मत, शुरू हुई जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रातोरात की शाही पुल की मरम्मत, शुरू हुई जांच
विज्ञापन
शाही पुल के दो पिलर के बीच लखौरिया ईंट से बनी दीवार को तोड़कर रातों रात वहां मूर्ति रखने के मामले को लेकर पुलिस-प्रशासन गंभीर है। मामले की जानकारी होने पर आनन-फानन में मंगलवार की रात तीन बजे तक दीवार चुनवा दी गई। वहीं, घटना की जानकारी होने पर बुधवार की सुबह करीब 400 लोग एकजुट हो गए। पुलिस भी सुंदरकांड शुरू कराने के मिले इनपुट के बाद हरकत में आ गई। देखते ही देखते हनुमान घाट छावनी में तब्दील हो गया, जिससे एकजुट हुए लोग वापस लौट गए। लेकिन, दूसरे दिन भी वहां फोर्स तैनात कर दी गई। साथ ही पूरे प्रकरण की जांच पुरातत्व विभाग ने शुरू कर दी है। इसी क्रम में वाराणसी पुरातत्व विभाग से आए लोगों ने फोटोग्राफी की।
शाही पुल का निर्माण 1564 में कराया गया था। सोमवार की रात इस पुल के उत्तरी छोर पर बने पिलर में लगे लखौरिया ईंट को शरारती तत्वों ने तोड़ दिया और मां काली की खंडित मूर्ति रख दी। जानकारी होने के बाद पूरे प्रकरण को प्रशासन ने ठंडे बस्ते में डाल दिया। लेकिन, देर शाम पुलिस और प्रशासनिक महकमे में इसे लेकर हड़कंप मच गया। सिटी मजिस्ट्रेट अनिल अग्निहोत्री और पुलिस के अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंच गए। रात में पूरे प्रकरण की घटना स्थल पर कोतवाल संजीव कुमार मिश्रा से जानकारी हासिल की। साथ ही लोक निर्माण विभाग और जल निगम के अधिकारियों को फटकार लगाई। साथ ही चौकियां धाम क्षेत्र से किसी तरह पांच मजदूरों को बुलाया गया। इसके बाद तोड़े गए स्थान को लखौरिया ईंट की जगह सामान्य ईंट से रात तीन बजे तक चले कार्य के दौरान चुनवा दिया गया। कोतवाल के मुताबिक इसी में ही खंडित मूर्ति को दबवा दिया गया और बाद मौके पर ही पुलिस की ड्यूटी लगा दी गई। लेकिन, सुबह होते-होते हिंदू संगठनों से जुड़े नेता-कार्यकर्ता एकजुट हो गए। पुलिस द्वारा उच्चाधिकारियों को इसकी सूचना दी गई। लेकिन, अपराह्न 11 बजे तक अचानक 400 लोग एकजुट हो गए।
उधर, पुलिस को सूचना मिली थी कि ये लोग सुंदरकांड पाठ कर सकते हैं, जिसपर उन्हें रोक लिया गया। साथ ही आनन-फानन में एक प्लार्टून पीएसी, दो पार्टी क्यूआरटी के अलावा सरायपोख्ता, राज कालेज, सिपाह, शकरमंडी, पुरानी बाजार और भंडारी चौकी इंचार्ज और उनकी फोर्स तथा शहर कोतवाली की पूरी फोर्स लगा दी गई। एकजुट हुए लोगों का कहना था है कि पुरातत्व विभाग से पूरे प्रकरण की जांच कराई जाए। इस संबंध में कोतवाल का कहना है कि कुछ लोगों द्वारा खोदे गए पुल के हिस्से की दीवार को पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के निर्देश पर बंद करा दिया। क्योंकि उनका कहना था कि यदि पुल का एक भी पत्थर खिसक गया तो पूरे पुल के अस्तित्व संकट में पड़ सकता है। सिटी मजिस्ट्रेट अनिल अग्निहोत्री का कहना है कि जैसा कि लोग बता रहे हैं कि बाढ़ के पहले यहां सीढ़ी बनी थी, जिससे बाढ़ का पानी ऊपर चला गया था। हालांकि बाद में उसे बंद करा दिया गया है। यहां कोई मंदिर नहीं था। सीओ सिटी डा.जितेंद्र दुबे का कहना है कि जो लोग उस स्थल को मंदिर बताते हुए खुलवाने के लिए आए थे, उनसे कहा गया कि यह पुरातत्व विभाग की संपत्ति है, उनसे बात करिए अगर वह कहते हैं तो खोल दिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
शाही पुल का निर्माण 1564 में कराया गया था। सोमवार की रात इस पुल के उत्तरी छोर पर बने पिलर में लगे लखौरिया ईंट को शरारती तत्वों ने तोड़ दिया और मां काली की खंडित मूर्ति रख दी। जानकारी होने के बाद पूरे प्रकरण को प्रशासन ने ठंडे बस्ते में डाल दिया। लेकिन, देर शाम पुलिस और प्रशासनिक महकमे में इसे लेकर हड़कंप मच गया। सिटी मजिस्ट्रेट अनिल अग्निहोत्री और पुलिस के अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंच गए। रात में पूरे प्रकरण की घटना स्थल पर कोतवाल संजीव कुमार मिश्रा से जानकारी हासिल की। साथ ही लोक निर्माण विभाग और जल निगम के अधिकारियों को फटकार लगाई। साथ ही चौकियां धाम क्षेत्र से किसी तरह पांच मजदूरों को बुलाया गया। इसके बाद तोड़े गए स्थान को लखौरिया ईंट की जगह सामान्य ईंट से रात तीन बजे तक चले कार्य के दौरान चुनवा दिया गया। कोतवाल के मुताबिक इसी में ही खंडित मूर्ति को दबवा दिया गया और बाद मौके पर ही पुलिस की ड्यूटी लगा दी गई। लेकिन, सुबह होते-होते हिंदू संगठनों से जुड़े नेता-कार्यकर्ता एकजुट हो गए। पुलिस द्वारा उच्चाधिकारियों को इसकी सूचना दी गई। लेकिन, अपराह्न 11 बजे तक अचानक 400 लोग एकजुट हो गए।
विज्ञापन
उधर, पुलिस को सूचना मिली थी कि ये लोग सुंदरकांड पाठ कर सकते हैं, जिसपर उन्हें रोक लिया गया। साथ ही आनन-फानन में एक प्लार्टून पीएसी, दो पार्टी क्यूआरटी के अलावा सरायपोख्ता, राज कालेज, सिपाह, शकरमंडी, पुरानी बाजार और भंडारी चौकी इंचार्ज और उनकी फोर्स तथा शहर कोतवाली की पूरी फोर्स लगा दी गई। एकजुट हुए लोगों का कहना था है कि पुरातत्व विभाग से पूरे प्रकरण की जांच कराई जाए। इस संबंध में कोतवाल का कहना है कि कुछ लोगों द्वारा खोदे गए पुल के हिस्से की दीवार को पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के निर्देश पर बंद करा दिया। क्योंकि उनका कहना था कि यदि पुल का एक भी पत्थर खिसक गया तो पूरे पुल के अस्तित्व संकट में पड़ सकता है। सिटी मजिस्ट्रेट अनिल अग्निहोत्री का कहना है कि जैसा कि लोग बता रहे हैं कि बाढ़ के पहले यहां सीढ़ी बनी थी, जिससे बाढ़ का पानी ऊपर चला गया था। हालांकि बाद में उसे बंद करा दिया गया है। यहां कोई मंदिर नहीं था। सीओ सिटी डा.जितेंद्र दुबे का कहना है कि जो लोग उस स्थल को मंदिर बताते हुए खुलवाने के लिए आए थे, उनसे कहा गया कि यह पुरातत्व विभाग की संपत्ति है, उनसे बात करिए अगर वह कहते हैं तो खोल दिया जाएगा।
विज्ञापन