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नवरात्र के पहले दिन शीतला धाम चौकिया और मैहर माता मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब
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फोटो-शीतला धाम चौकिया में दर्शन करने के लिए कतार में खड़े भक्तजन।
- फोटो : JAUNPUR
जौनपुर। चैत्र नवरात्र शनिवार से शुरू हो गया। पहले दिन घरों में कलश स्थापना और दर्शन-पूजन में लोग व्यस्त रहे। शीतला चौकिया धाम, मैहर देवी मंदिर शास्त्रीनगर परमानतपुर समेत सभी देवी मंदिरों में लोग दर्शन-पूजन करने वालों की भीड़ उमड़ी रही। सांचे दरबार की जय की गूंज सुनाई दे रही थी। वहीं, वेदपाठी ब्राह्मणों की ओर से सप्तशती श्लोक के पाठ से वातावरण धर्ममय होता रहा। भक्ति गीतों और घंट-घडि़याल की आवाज से वातावरण देवीमय हो गया।
शीतला चौकिया धाम में भोर से ही दर्शन पूजन करने वाले पहुंच गए। 4.40 बजे पुजारी शिव कुमार पंडा ने मां की मंगला आरती की। इसके बाद कपाट खोल दिया गया। दर्शन-पूजन का सिलसिला रात साढ़े नौ बजे तक चलता रहा। दो वर्ष बाद इस बार चैत्र नवरात्र में भक्त माता रानी के चरण को छूकर दर्शन प्राप्त कर रहे हैं। मंदिर प्रबंधक अजय पंडा ने बताया कि लगभग दो साल से कोरोना महामारी की वजह से भक्त माता रानी का झांकी दर्शनकर चले जाते थे। इस बार उन्हें माता रानी के चरण छूकर दर्शन करने का अवसर मिला है। इसलिए भक्तों में काफी उत्साह है। मंदिर परिसर की सुरक्षा के मद्देनजर चौकियां चौकी की पुलिस बल लगातार चक्रमण करती रही। यही स्थिति मैहर माता मंदिर में देखने को मिली। शहर के इन दोनों प्रमुख मंदिरों में पूर्वांचल के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं ने मत्था टेका। भीड़ को देखते हुए मंदिर के सभी कपाट खोल दिए गए। धाम परिसर में कंट्रोल रूम स्थापित कर लगातार भीड़ को नियंत्रित करने की अपील होती रही। बड़ी संख्या में लोग दर्शन के बाद विंध्याचल धाम को रवाना हुए। मंदिर परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। सीसी टीवी कैमरा की मदद से पुलिस निगहबानी कर रही थी। इसी तरह सद्भावना पुल के बगल स्थित नव दुर्गा मंदिर, ओलंदगंज में चौरा माता मंदिर, पांचों शिवाला, बारीनाथ मठ, जागेश्वर नाथ मंदिर, ओलंदगंज के चौरा माता मंदिर, हनुमान घाट, अचला देवी घाट समेत विभिन्न मंदिरों में भी महिलाएं और पुरुषों ने देवी को जल चढ़ाया। लोगों ने व्रत रखकर नौ दिवसीय अनुष्ठान शुरू किया है।
प्रतिपदा को निकाली कलश यात्रा
खेतासराय। नगर के गोलाबाजार में चैत्र नवरात्र पर आयोजित रामचरित मानस कथा प्रारंभ होने से पूर्व शनिवार को नगर में कलश यात्रा निकाली गई। ब्रह्मांड स्वरूप कलश को सिर धारण किए भारी संख्या में महिलाएं और युवतियां कलश यात्रा में शामिल हुईं। कलश यात्रा का समापन आरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ। गोलाबाजार के रामलीला मैदान में महिलाएं कलश के साथ उपस्थित हुईं। रामचरित मानस कथावाचक पं. राघवदास के कलश पूजन से कलश यात्रा का शुभारंभ हुआ। मेनरोड, खुटहन रोड, दुर्गा मंदिर, पुरानी बाजार होते कलश यात्रा काली मंदिर पहुंची। यहां से मेनरोड होते हुए मानस कथा यज्ञ स्थल पहुंच कर संपन्न हुई। कलश यात्रा के आगे-आगे युवकों की टोली हाथ में केसरिया ध्वज लेकर चल रही थी। मानस कथा के यजमान राधेश्याम जायसवाल सिर पर रामचरित मानस ग्रंथ धारण किए चल रहे थे। सहयोग में भृगुनाथ जायसवाल, विनोद कुमार गुप्ता, रूपेश गुप्ता, जगदंबा प्रसाद पांडेय, कृष्ण कुमार बरनवाल, पप्पू पटवा, रवि बरनवाल, विजय कुमार गुप्ता, गोरख प्रजापति आदि शामिल रहे।
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हवन पूजन से मां गायत्री मंदिर हुआ गुलजार
सतहरिया। मुंगराबादशाहपुर के स्टेशन रोड पर स्थित मां गायत्री शक्तिपीठ पर नवरात्र पर्व पर पांच कुंडीय यज्ञ का आयोजन किया गया। नवरात्र के प्रथम दिन लोग स्वच्छ परिधानों में मंदिर पहुंच कर मां गायत्री मां की विधिवत दर्शन पूजन किए। महिलाओं और श्रद्धालुओं ने यज्ञ कुंड में आहुति देकर परिवार की सुख शांति के लिए यज्ञ देवता की आराधना की। मां शैलपुत्री के दिन नव संवत्सर आरंभ में परिजनों ने विश्व कल्याण की प्रार्थना के साथ यज्ञ संपन्न किया। लोगों ने अनुष्ठान का संकल्प लिया। इस अवसर शक्तिपीठ के आचार्य गुलाब ने यज्ञ व नवरात्र पर्व के महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि यज्ञ से जहां वातावरण शुद्ध हो जाता है तो वहीं मानव जीवन निरोगी हो जाता है। नवरात्र पर्व पर मां की नौ स्वरूपों में पूजा करना बहुत ही फलदाई होता है। गुलाब जी, माया देवी, प्रेमचंद्र, नंदन त्रिपाठी, प्रमोद दूबे, पन्नालाल, रीता त्रिपाठी, राजेंद्र प्रसाद, हेमंत और केपी शर्मा गोलू आदि थे।
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शीतला चौकिया धाम में भोर से ही दर्शन पूजन करने वाले पहुंच गए। 4.40 बजे पुजारी शिव कुमार पंडा ने मां की मंगला आरती की। इसके बाद कपाट खोल दिया गया। दर्शन-पूजन का सिलसिला रात साढ़े नौ बजे तक चलता रहा। दो वर्ष बाद इस बार चैत्र नवरात्र में भक्त माता रानी के चरण को छूकर दर्शन प्राप्त कर रहे हैं। मंदिर प्रबंधक अजय पंडा ने बताया कि लगभग दो साल से कोरोना महामारी की वजह से भक्त माता रानी का झांकी दर्शनकर चले जाते थे। इस बार उन्हें माता रानी के चरण छूकर दर्शन करने का अवसर मिला है। इसलिए भक्तों में काफी उत्साह है। मंदिर परिसर की सुरक्षा के मद्देनजर चौकियां चौकी की पुलिस बल लगातार चक्रमण करती रही। यही स्थिति मैहर माता मंदिर में देखने को मिली। शहर के इन दोनों प्रमुख मंदिरों में पूर्वांचल के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं ने मत्था टेका। भीड़ को देखते हुए मंदिर के सभी कपाट खोल दिए गए। धाम परिसर में कंट्रोल रूम स्थापित कर लगातार भीड़ को नियंत्रित करने की अपील होती रही। बड़ी संख्या में लोग दर्शन के बाद विंध्याचल धाम को रवाना हुए। मंदिर परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। सीसी टीवी कैमरा की मदद से पुलिस निगहबानी कर रही थी। इसी तरह सद्भावना पुल के बगल स्थित नव दुर्गा मंदिर, ओलंदगंज में चौरा माता मंदिर, पांचों शिवाला, बारीनाथ मठ, जागेश्वर नाथ मंदिर, ओलंदगंज के चौरा माता मंदिर, हनुमान घाट, अचला देवी घाट समेत विभिन्न मंदिरों में भी महिलाएं और पुरुषों ने देवी को जल चढ़ाया। लोगों ने व्रत रखकर नौ दिवसीय अनुष्ठान शुरू किया है।
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प्रतिपदा को निकाली कलश यात्रा
खेतासराय। नगर के गोलाबाजार में चैत्र नवरात्र पर आयोजित रामचरित मानस कथा प्रारंभ होने से पूर्व शनिवार को नगर में कलश यात्रा निकाली गई। ब्रह्मांड स्वरूप कलश को सिर धारण किए भारी संख्या में महिलाएं और युवतियां कलश यात्रा में शामिल हुईं। कलश यात्रा का समापन आरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ। गोलाबाजार के रामलीला मैदान में महिलाएं कलश के साथ उपस्थित हुईं। रामचरित मानस कथावाचक पं. राघवदास के कलश पूजन से कलश यात्रा का शुभारंभ हुआ। मेनरोड, खुटहन रोड, दुर्गा मंदिर, पुरानी बाजार होते कलश यात्रा काली मंदिर पहुंची। यहां से मेनरोड होते हुए मानस कथा यज्ञ स्थल पहुंच कर संपन्न हुई। कलश यात्रा के आगे-आगे युवकों की टोली हाथ में केसरिया ध्वज लेकर चल रही थी। मानस कथा के यजमान राधेश्याम जायसवाल सिर पर रामचरित मानस ग्रंथ धारण किए चल रहे थे। सहयोग में भृगुनाथ जायसवाल, विनोद कुमार गुप्ता, रूपेश गुप्ता, जगदंबा प्रसाद पांडेय, कृष्ण कुमार बरनवाल, पप्पू पटवा, रवि बरनवाल, विजय कुमार गुप्ता, गोरख प्रजापति आदि शामिल रहे।
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हवन पूजन से मां गायत्री मंदिर हुआ गुलजार
सतहरिया। मुंगराबादशाहपुर के स्टेशन रोड पर स्थित मां गायत्री शक्तिपीठ पर नवरात्र पर्व पर पांच कुंडीय यज्ञ का आयोजन किया गया। नवरात्र के प्रथम दिन लोग स्वच्छ परिधानों में मंदिर पहुंच कर मां गायत्री मां की विधिवत दर्शन पूजन किए। महिलाओं और श्रद्धालुओं ने यज्ञ कुंड में आहुति देकर परिवार की सुख शांति के लिए यज्ञ देवता की आराधना की। मां शैलपुत्री के दिन नव संवत्सर आरंभ में परिजनों ने विश्व कल्याण की प्रार्थना के साथ यज्ञ संपन्न किया। लोगों ने अनुष्ठान का संकल्प लिया। इस अवसर शक्तिपीठ के आचार्य गुलाब ने यज्ञ व नवरात्र पर्व के महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि यज्ञ से जहां वातावरण शुद्ध हो जाता है तो वहीं मानव जीवन निरोगी हो जाता है। नवरात्र पर्व पर मां की नौ स्वरूपों में पूजा करना बहुत ही फलदाई होता है। गुलाब जी, माया देवी, प्रेमचंद्र, नंदन त्रिपाठी, प्रमोद दूबे, पन्नालाल, रीता त्रिपाठी, राजेंद्र प्रसाद, हेमंत और केपी शर्मा गोलू आदि थे।