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कांशीराम आवासीय आवासों में बाहरियों का कब्जा

Tue, 12 Jul 2022 12:45 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 12 Jul 2022 12:45 AM IST
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Occupation of outsiders in Kanshi Ram residential houses
कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना के तहत सिद्दीकपुर में बने आवासों में अधिकत बाहरी लोगों का कब्जा है। हैरानी की बात तो ये है कि यह स्थिति तब है, जब प्रशासन समय-समय पर यहां सत्यापन और छापेमारी करने का दावा करता है।
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शहरी गरीबों को छत उपलब्ध कराने के लिए बसपा शासनकाल में कांशी राम शहरी गरीब आवास योजना लागू किया गया था। योजना के तहत शहर से चार किमी दूर स्थित सिद्दीकपुर में एक ही स्थान पर बहु मंजिला बिल्डिंग तैयार की गई। यहां कुल 960 आवास बनाए गए हैं, जिसमें 15 आवास दिव्यांग और 95 आवास निराश्रित विधवाओं को तथा शेष 850 आवास अन्य गरीबों को आवंटित किए गए। लेकिन, अधिकांश गरीब ,आवास को अपने नाम आवंटित कराकर खुद नहीं रह रहे हैं, बल्कि अपने आवास को दूसरे को रहने के लिए दे दिए हैं। इसके बदले वे किराया भी वसूल रहे हैं। वहीं, कई आवासों में तो ऐसे भी लोग हैं, जो अब जबर्दस्ती कब्जा किए हुए हैं। कुछ माह पहले ज्वाइंट मजिस्ट्रेट हिमांशु नागपाल की अगुवाई में प्रशासन ने यहां छापेमारी की थी। उस दौरान यह पाया गया था कि कांशीराम आवास में 50 प्रतिशत से अधिक लोग दूसरे के नाम से अलॉट किए हैं कमरे में रह रहे हैं। हालांकि ऐसे लोगों को अल्टीमेटम दे दिया गया था, कि समय सीमा के अंदर कमरों को खाली कर दें। अन्यथा की स्थिति में उनके खिलाफ विधिक कार्यवाई की जाएगी। ले किन, समय बीतने के साथ ही अधिकारियों का ध्यान इस तरह से हट गया और कब्जा करने वालों का मनोबल बढ़ गया। ऐसे में यहां पहले से भी बदतर स्थिति हो गई, क्योंकि प्रशासन की कार्रवाई की डर से जो लोग कमरा छोड़कर भाग गए थे, वे पुन: आकर कब्जा जमा लिए हैं। इस समय तो यहां से कुछ गलत कार्यों की भी शिकायत मिलती है। मगर, जिम्मेदार इस तरह अभी ध्यान ही नहीं दे रहे हैं।
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----------तैयार होने के पहले ही 500 आवास बनें खंडहर
जौनपुर। सिद्दीकपुर में ही में करोड़ों की लागत से तैयार करीब 500 कांशीराम आवास महज बिजली और पानी की व्यवस्था है और अधूरे कामों की वजह से खाली पड़ा है, जो अब देखरेख की अभाव में तैयार होने के पहले ही खंडहर में तब्दील हो रहा है।
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साल 2008-09 में कांशीराम ग्रामीण गरीब आवास योजना को तत्कालीन बसपा सरकार में मंजूरी मिली थी। निर्माण के लिए 75 फीसदी धनराशि भी जारी हो गई थी। कार्यदायी संस्था आवास विकास परिषद में कार्य शुरू कर दिया। इसके बाद सरकार बदली तो काम भी अधूरा रह गया। तब से आज तक कांशीराम आवास का निर्माण नहीं हो सका है। करोड़ों रुपये में दोनों स्थानों पर आवास की सभी आंतरिक कार्य करा दिए थे, लेकिन बाहरी कार्य पानी की टंकी जल निकासी के लिए ड्रेनेज और बिजली व्यवस्था सुनिश्चित नहीं हो सकी थी। नतीजा गरीबों का आवंटन नहीं हो पा रहा है। डूडा और प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यकाल के लगातार चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन लगभग 500 आवास खाली रहने के बाद भी गरीबों को आवास का आवंटन नहीं किया जा रहा है। बताते हैं कि अधूरे पड़े कांशीराम आवास में आवंटन ना होने से या भवन अराजकतत्वों का अड्डा बन चुका है।

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सिद्दीकपुर में सत्यापन के दौरान बाहरियों को निकाल दिया गया था। साथ ही उन्हें नोटिस भी जारी की गई है। लेकिन, यदि ऐसा है तो फिर से सत्यापन करा लिया जा रहा है। अगर कोई अपात्र कमरे में पाया जाएगा तो कमरे को खाली करा दिया जाएगा। साथ संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।-हिमांशु नागपाल, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट
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