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अब अभिभावकों के खाते में जाएगी ड्रेस-बैग की रकम
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परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे इस बार अपनी पसंद से ड्रेस खरीद सकेंगे। इसके लिए शासन से सीधे अभिभावकों के खाते में धन भेजने की तैयारी है। इसके लिए छात्रों या उनके अभिभावकों के बैंक अकाउंट नंबर लिए जाए रहे हैं। साथ ही उसकी फीडिंग भी कराई जा रही है।
गत वर्षों तक ड्रेस वितरण का जिम्मा विद्यालय प्रबंध समिति को सौंपा गया था। प्रति छात्र छह सौ रुपये के हिसाब से ड्रेस की धनराशि एसएमसी के खातों में भेजी जाती थी। जहां से प्रधानाध्यापक स्वविवेक से किसी डीलर से कपड़ा खरीदकर विद्यार्थियों को उपलब्ध कराते थे। सिस्टम की हीलाहवाली व लगातार मिल रही शिकायतों की वजह से वर्ष भर यह प्रक्रिया चलती रहती थी। कहीं-कहीं ड्रेस की गुणवत्ता भी ठीक नहीं रहती थी। इस तरह की शिकायतों को दूर करने के लिए सरकार ने नया तरीका खोजा है। एमडीएम के कनवर्जन कॉस्ट की तरह ही अब ड्रेस का पैसा भी बच्चों के अभिभावकों के खाते में सीधे डीबीटी के जरिए भेजने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए जिले में दो हजार 802 परिषदीय विद्यालयों में पंजीकृत चार लाख 13 हजार 729 छात्र-छात्राओं का डाटा तैयार किया जा रहा है। इन पंजीकृत छात्र-छात्राओं को शासन की ओर से नि:शुल्क शिक्षा के साथ-साथ ड्रेस, जूता-मोजा, स्वेटर, स्कूल बैग आदि भी सुविधा उपलब्ध कराने की कोशिश शुरू की गई है। इसके लिए सभी संबंधित छात्रों व उनके अभिभावकों के आधार कार्ड और बैंक अकाउंट नंबर लिए जा रहे हैं। साथ ही उसकी फीडिंग का कार्य भी किया जा रहा है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डा. गोरखनाथ पटेल ने बताया कि ड्रेस के लिए इस बार अभिभावकों के खातों में पैसा भेजा जाएगा। अभिभावकों के खातों का विवरण फीड किया जा रहा है। जिले में पंजीकृत 4 लाख 13 हजार 729 बच्चों को योजना के तहत लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि किताबें भी वितरित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इस माह के अंत तक किताबों का वितरण शुरू करा दिया जाएगा।
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गत वर्षों तक ड्रेस वितरण का जिम्मा विद्यालय प्रबंध समिति को सौंपा गया था। प्रति छात्र छह सौ रुपये के हिसाब से ड्रेस की धनराशि एसएमसी के खातों में भेजी जाती थी। जहां से प्रधानाध्यापक स्वविवेक से किसी डीलर से कपड़ा खरीदकर विद्यार्थियों को उपलब्ध कराते थे। सिस्टम की हीलाहवाली व लगातार मिल रही शिकायतों की वजह से वर्ष भर यह प्रक्रिया चलती रहती थी। कहीं-कहीं ड्रेस की गुणवत्ता भी ठीक नहीं रहती थी। इस तरह की शिकायतों को दूर करने के लिए सरकार ने नया तरीका खोजा है। एमडीएम के कनवर्जन कॉस्ट की तरह ही अब ड्रेस का पैसा भी बच्चों के अभिभावकों के खाते में सीधे डीबीटी के जरिए भेजने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए जिले में दो हजार 802 परिषदीय विद्यालयों में पंजीकृत चार लाख 13 हजार 729 छात्र-छात्राओं का डाटा तैयार किया जा रहा है। इन पंजीकृत छात्र-छात्राओं को शासन की ओर से नि:शुल्क शिक्षा के साथ-साथ ड्रेस, जूता-मोजा, स्वेटर, स्कूल बैग आदि भी सुविधा उपलब्ध कराने की कोशिश शुरू की गई है। इसके लिए सभी संबंधित छात्रों व उनके अभिभावकों के आधार कार्ड और बैंक अकाउंट नंबर लिए जा रहे हैं। साथ ही उसकी फीडिंग का कार्य भी किया जा रहा है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डा. गोरखनाथ पटेल ने बताया कि ड्रेस के लिए इस बार अभिभावकों के खातों में पैसा भेजा जाएगा। अभिभावकों के खातों का विवरण फीड किया जा रहा है। जिले में पंजीकृत 4 लाख 13 हजार 729 बच्चों को योजना के तहत लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि किताबें भी वितरित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इस माह के अंत तक किताबों का वितरण शुरू करा दिया जाएगा।
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