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कट्टर नहीं नेक इंसान बनना जरूरी

Mon, 10 Apr 2017 11:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, जौनपुर
अमर उजाला ब्यूरो, जौनपुर Updated Mon, 10 Apr 2017 11:51 PM IST
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Not necessarily a good person.
पूविवि में आयोजित सामाजिक समरसता में पूर्वांचल का योगदान विषयक संगोष्ठी में कैलाश नाथ का सम्मान करते अतिथि।
चिन्तक एवं विचारक इंद्रेश कुमार ने कहा कि कट्टर नहीं नेक, अच्छे और सच्चे इंसान बनने की जरूरत है। हर जाति में ईश्वर का वास होता है। इसलिए हम सभी को जाति, द्वेष व दंश से मुक्त होकर सबका सम्मान करना चाहिए। छूआछूत अधर्म है और समानता धर्म है। सामाजिक समरसता स्थापित करने में सभी को सहभागिता समय की मांग है।
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वह सोमवार को वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के संगोष्ठी भवन में भारत समरसता मंच एवं आंतरिक गुणवत्ता प्रकोष्ठ विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में सामाजिक समरसता में पूर्वांचल का योगदान विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। संगोष्ठी का आयोजन समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फूले के जन्म दिवस के उपलब्ध में आयोजित की गई थी। उन्होंने कहा कि आज समरसता युक्त, तलाक मुक्त भारत की जरूरत है। हमारे सामाजिक संरचना में जन संस्कृति के पुरोधा रहे रामायण एवं महाभारत के रचयिता बाल्मिकी एवं वेद व्यास सामाजिक समरसता के मूल में थे। संगोष्ठी के विशिष्ट अतिथि श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आरके पांडेय ने कहा कि प्राचीन भारतीय संस्कृति में समरसता है। समाज में इसका अनुसरण न होने के कारण आज लोलुपता का विकास हो गया है। ज्ञान प्राप्ति सामाजिक समरसता का मूल था। जो व्यवहार स्वयं को अच्छा न लगे वह दूसरे के साथ नहीं करना चाहिए।
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पूर्व कुलपति प्रो. पीसी पातंजलि ने कहा कि ज्योतिबा फू ले समाज के कमजोर वर्ग के होने के बाद भी विपरीत परिस्थितियों में समाज को सुधारने में बड़ी भूमिका अदा की। जनसंत योगी देवनाथ ने कहा कि पूर्वांचल की धरती का सामाजिक समरसता में बड़ी भूमिका रही है। भगवान राम अयोध्या से निकलकर हर वर्ग के लोगों को गले लगाया। शायर अहमद निसार ने अपने गीत मैं दरिया हूं सबकी प्यास बुझाता हूं, मैं क्या जानू हिन्दू मुस्लिम के माध्यम से सामजिक समरसता का संदेश दिया। अध्यक्षता कर रहे पूर्व कुलपति प्रो.  यूपी सिंह ने कहा कि पूर्वांचल संतों व महात्माओं की भूमि रही है। कबीर, रैदास, गोरक्ष नाथ, भगवान बुद्ध, महावीर, रामानन्द जैसे अनेक लोगों ने इस क्षेत्र विशेष की सामाजिक समरसता के लिए अपना जीवन अर्पित किया है।
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समारोह में  वरिष्ठ पत्रकार कैलाश नाथ, डा. विमला सिंह, संजय सेठ, निसार अहमद, डा. कमर अब्बास एवं राजीव श्रीवास्तव को सामाजिक समरसता के लिए स्मृति चिन्ह  देकर सम्मानित किया गया। डा. पीसी पातंजलि की कृति बाबा साहब के सपनों का भारत विषयक पुस्तक का विमोचन भी हुआ। संयोजक डा. मानस पांडेय ने गोष्ठी के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। डा. अविनाश पाथर्डीकर ने स्वागत किया। डा. अमित वत्स ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन डा. एचसी पुरोहित ने किया।  इस अवसर पर प्रो. डीडी दूबे, प्रो. बीबी तिवारी, कुलसचिव डा. देवराज, सुरेन्द्र प्रताप सिंह, डा.अजय प्रताप सिंह, डा. राधेश्याम सिंह, डा. राजीव सिंह, प्रो. मुन्नी लाल, डा.  पीसी विश्वकर्मा, डा.वीडी शर्मा, अशोक सिंह, डा. मनोज मिश्र, डा. मनोज वत्स, संतोष सिंह, डा. वंदना राय, डा. वंदना सरकार, राजेश श्रीवास्तव बच्चा भईया, डा. दिग्विजय सिंह राठौर आदि मौजूद थे।

 
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