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घर में शिक्षिक की भूमिका में आएं मां, बेटी को खुलकर समझाए
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जौनपुर। विश्व मासिक धर्म स्वच्छता पखवारा के तहत मंगलवार को अमर उजाला फाउंडेशन द्वारा अपराजिता के तहत संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर 20 से अधिक महिलाओं ने शर्म छोड़ो, चुप्पी तोड़ो आगे बढ़ो, विषय पर खुलकर चर्चा की। साथ ही किशोरियों को हिचक छोड़कर आगे बढ़ने पर जोर दिया।
स्त्री रोग विशेषज्ञ व वरिष्ठ चिकित्सक डा. शैली निगम ने कहा कि माहवारी के दिनों में होने वाली समस्याओं पर चुप रहना ठीक नहीं, अपनी परेशानी को छिपाएं नहीं, बल्कि उस पर चर्चा करें, क्योंकि यह एक सामान्य प्रक्रिया है। इसके लिए मां, भाभी, बहन शिक्षक की तरह समझाना चाहिए, वजह हर महिला किशोरी को अपने शरीर के अंदर इस दौरान होने वाले बदलाव के बारे में जागरूक होने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि महिलाएं अपने परिवार की किशोरियों को इस बारे में बताएं और उन्हें हतोत्साहित न होने दें। शर्म को छोड़कर उन्हें आगे बढ़ने की जरूरत है। इस दौरान सफाई पर ही विशेष ध्यान देना होता है। किशोरियों को इस दौरान आने वाले बदलाव को समझे, खानपान को सुधारें तला-भुना पदार्थ, कार्बोहाइड्रेट की अधिकता वाले खाद्य पदार्थों से परहेज करना चाहिए और तरल पदार्थ आयरन युक्त भोजन का सेवन करना चाहिए। संवाद कार्यक्रम के दौरान महिलाओं और किशोरियों ने भी अपनी-अपनी समस्याएं रखी, जिसका निवारण डा. शैली निगम ने किया। कार्यक्रम का संचालन कर रही सखी वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष प्रीति गुप्ता ने कहा कि मातृत्व शक्ति का वरदान सिर्फ महिलाओं को मिला है, इस कारण यह शर्म की बात नहीं है, बल्कि हमारी अतिरिक्त क्षमता है, जो शारीरिक विकास को दर्शाता है। प्रत्येक नारी की अपनी अलग माहवारी साइकिल होती हैं, उन्हें खुद मानिटरिंग करना चाहिए। 10 से लेकर 40 वर्ष तक की महिलाओं और किशोरियों की यह सामान्य प्रक्रिया है। इन बदलावों को लेकर कई बार लड़कियां तनाव में आ जाती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी इसे लेकर तमाम भ्रांतियां हैं, यह जागरूकता से ही दूर होगी। पढ़ी-लिखी महिलाओं की जिम्मेदारी है कि वह इस मुद्दे पर दूसरे को जागरूक करें। घर में मां, दादी, भाभी, बड़ी बहन इन बदलाव के बारे में किशोरियों को बताएं, जिससे वह मानसिक रूप से तैयार रहे। उन्होंने घर परिवार और स्कूल को भी इस बारे में जिम्मेदारी निभाने की अपील की। उर्वशी सिंह ने कहा कि हमें पुरुषों को भी जागरूक करना होगा और इसे लेकर उत्पन्न भ्रांतियों को दूर करने के लिए उनकी सोच को भी बदलना होगा। डा. अंजना सिंह ने कहा कि सरकार को शुरू से ही सभी को इसके लिए जागरुक करना होगा, जिसकी शुरूआत घर से ही करनी होगी।
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स्त्री रोग विशेषज्ञ व वरिष्ठ चिकित्सक डा. शैली निगम ने कहा कि माहवारी के दिनों में होने वाली समस्याओं पर चुप रहना ठीक नहीं, अपनी परेशानी को छिपाएं नहीं, बल्कि उस पर चर्चा करें, क्योंकि यह एक सामान्य प्रक्रिया है। इसके लिए मां, भाभी, बहन शिक्षक की तरह समझाना चाहिए, वजह हर महिला किशोरी को अपने शरीर के अंदर इस दौरान होने वाले बदलाव के बारे में जागरूक होने की जरूरत है।
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उन्होंने कहा कि महिलाएं अपने परिवार की किशोरियों को इस बारे में बताएं और उन्हें हतोत्साहित न होने दें। शर्म को छोड़कर उन्हें आगे बढ़ने की जरूरत है। इस दौरान सफाई पर ही विशेष ध्यान देना होता है। किशोरियों को इस दौरान आने वाले बदलाव को समझे, खानपान को सुधारें तला-भुना पदार्थ, कार्बोहाइड्रेट की अधिकता वाले खाद्य पदार्थों से परहेज करना चाहिए और तरल पदार्थ आयरन युक्त भोजन का सेवन करना चाहिए। संवाद कार्यक्रम के दौरान महिलाओं और किशोरियों ने भी अपनी-अपनी समस्याएं रखी, जिसका निवारण डा. शैली निगम ने किया। कार्यक्रम का संचालन कर रही सखी वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष प्रीति गुप्ता ने कहा कि मातृत्व शक्ति का वरदान सिर्फ महिलाओं को मिला है, इस कारण यह शर्म की बात नहीं है, बल्कि हमारी अतिरिक्त क्षमता है, जो शारीरिक विकास को दर्शाता है। प्रत्येक नारी की अपनी अलग माहवारी साइकिल होती हैं, उन्हें खुद मानिटरिंग करना चाहिए। 10 से लेकर 40 वर्ष तक की महिलाओं और किशोरियों की यह सामान्य प्रक्रिया है। इन बदलावों को लेकर कई बार लड़कियां तनाव में आ जाती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी इसे लेकर तमाम भ्रांतियां हैं, यह जागरूकता से ही दूर होगी। पढ़ी-लिखी महिलाओं की जिम्मेदारी है कि वह इस मुद्दे पर दूसरे को जागरूक करें। घर में मां, दादी, भाभी, बड़ी बहन इन बदलाव के बारे में किशोरियों को बताएं, जिससे वह मानसिक रूप से तैयार रहे। उन्होंने घर परिवार और स्कूल को भी इस बारे में जिम्मेदारी निभाने की अपील की। उर्वशी सिंह ने कहा कि हमें पुरुषों को भी जागरूक करना होगा और इसे लेकर उत्पन्न भ्रांतियों को दूर करने के लिए उनकी सोच को भी बदलना होगा। डा. अंजना सिंह ने कहा कि सरकार को शुरू से ही सभी को इसके लिए जागरुक करना होगा, जिसकी शुरूआत घर से ही करनी होगी।
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