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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jaunpur News ›   Massive fraud in the name of sanitation

शौचालय निर्माण के नाम पर भारी धांधली 

Fri, 21 Oct 2016 12:50 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर Updated Fri, 21 Oct 2016 12:50 AM IST
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स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों में बनने वाले शौचालय निर्माण के नाम पर भारी धांधली उजागर हुई है। शौचालय का निर्माण हुआ ही नहीं और सरकारी धन की बंदरबाट कर ली गई। कहीं गड्ढा खोदकर छोड़ दिया गया है तो कहीं ढांचा खड़ा कर दिया गया। उसकी न तो छत बनी है और न ही दरवाजा लगाया गया है।
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जिला स्तरीय अधिकारियों जांच में बड़े पैमाने पर धांधली उजागर हुई तो जिलाधिकारी ने दोबारा जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी है। टीम की भी जांच लगभग पूरी हो चुकी है। सूत्रों की मानें तो 55 से 60 ग्राम प्रधानों ने ऐसा किया है। सभी कार्रवाई की जद में हैं। चालू वित्तीय वर्ष में 16 हजार 986 शौचालय का निर्माण कराने का दावा किया गया है।
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प्रत्येक शौचालय के निर्माण पर 12 हजार रुपये की दर से बजट भी खारिज कर लिया गया है। जिला स्तरीय अधिकारियों की जांच में पता चला 945 शौचालयों का अस्तित्व ही नहीं मिला। इनमें से कुछ का गड्ढा खोद कर छोड़ दिया गया तो कुछ का सिर्फ ढांचा खड़ा कर दिया गया है।
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कई स्थानों पर गड्ढा तक नहीं मिला जबकि कागज में वहां शौचालय का निर्माण पूरा होना दिखाया गया है। जांच रिपोर्ट को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी भानुचंद्र गोस्वामी ने शौचालय निर्माण की दोबारा जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी है। तीन सदस्यीय टीम की जांच भी अंतिम चरण में है।

सूत्रों पर भरोसा करें तो तीन सदस्यीय टीम की जांच में पैसा खारिज होने के बाद भी अस्तित्व विहीन शौचालयों की संख्या और भी बढ़ सकती है। प्रत्येक शौचालय निर्माण के नाम पर 12 हजार रुपये की दर से सरकारी धन खर्च किया गया है।


पैसा खारिज होने के बाद भी न बनने वाले शौचालयों की संख्या 945 ही मान लें तो करीब एक करोड़ 13 लाख 40 हजार रुपये का गोलमाल किया गया है।  बता दें कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण का पैसा पहले लाभार्थी के खाते में जाता था। उसका नतीजा यह हुआ कि पैसे के भुगतान के बाद भी लाभार्थी शौचालय का निर्माण नहीं करवाते थे। ऐसे तमाम मामले सामने आने के बाद लाभार्थी के खाते में पैसा भेजने की अनिवार्यता को खत्म कर दी गई।






 
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