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पर्यटन स्थल बनेंगे शहीदों के गांव और स्मारक

Fri, 15 Jan 2021 11:20 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 15 Jan 2021 11:20 PM IST
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Martyrs' villages and monuments will become tourist places
केराकत क्षेत्र के सेनापुर में स्थित शहीद स्तंभ। - फोटो : JAUNPUR
जौनपुर। अपने शौर्य और पराक्रम से ब्रिटिश हुकूमत की चूलें हिला देने वाले वीर सेनानियों की यादों को सहेजने की सरकार ने पहल की है। इनके गांव और शहीद स्मारकों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की तैयारी है। पर्यटन विभाग इन सेनानियों का ब्योरा जुटा रहा है। इसकी सूची तैयार कर शीघ्र ही निदेशालय को भेजी जाएगी। वहां से इन स्थलों पर कार्य कराने की रूपरेखा तैयार होगी।
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स्वतंत्रता आंदोलन में जौनपुर का गौरवशाली इतिहास रहा है। यहां के सेनानियों ने अदम्य साहस और वीरता का परिचय देेते हुए अंग्रेजों का डटकर मुकाबला किया। तमाम यातनाएं झेली, मगर झुके नहीं। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर 1947 के निर्णायक संघर्ष तक यहां वीरता के किस्से भरे पड़े हैं। जौनपुर के सदारत हुसैन, सल्तनत बहादुर सिंह, संग्राम सिंह, बयालसी और डोभी क्षेत्र के रघुवंशी ठाकुरों व हौज सिरकोनी के चौहानों ने अंग्रेजों की सेनाओं का बहादुरी के साथ मुकाबला किया था। सभी रणबांकुरों को पेड़ों पर लटकाकर फांसी दे दी गई थी। समय के साथ भुलाई जा रही इन यादों को सहेजने और उनकी गौरवगाथा से भावी पीढ़ी को अवगत कराने के लिए सरकार ने इन शहीद स्थलों को संवारने का निर्णय लिया है। इसके तहत पर्यटन निदेशालय ने जनपदवार सूची मांगी है।
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महानिदेशक पर्यटन की ओर से भेजे गए पत्र में 1857 से 1947 तक शहीद हुए स्वतंत्रता सेनानियों का जीवन परिचय, शहादत का विवरण, शहीद स्थल का विवरण समेत विस्तृत कार्ययोजना, शहीदों के नाम पर मेला, महोत्सव के आयोजन से संबंधित कार्ययोजना जैसा बिंदुओं पर सूचना उपलब्ध कराने को कहा गया है। इसके अलावा विभिन्न सैनिक अभियानों में शहीद हुए जवानों के बारे में भी जानकारी मांगी गई है।
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22 सपूतों को पहले फांसी दी, फिर गोलियों से भून दिया
1857 में छिड़े पहले स्वतंत्रता आंदोलन का गवाह जौनपुर जिले का सेनापुर गांव भी है। यहां सिख सैनिकों ने कमांडिंग अफसर को गोली मारकर मौत की नींद सुला दिया। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट कुप्पे को विद्रोहियों ने मार गिराया। इसकी जानकारी जब हुकूमत को हुई तो उन्होंने क्रांतिकारियों को पकड़ने के लिए फौज भेजी। गांव के 22 लोग पकड़े गए। सरेआम पंचायत में उन्हें पहले फांसी पर लटकाया और जब इससे भी मन नहीं भरा तो क्रूरता की हदें पार करते हुए सभी को गोलियों से भून दिया गया। गांव में बने शहीद स्तंभ पर आज भी यह गौरवगाथा अंकित है। शिलापट्ट पर वीर सिंह, शिवब्रत सिंह, जय मंगल सिंह, देवकी सिंह, राम दुलार सिंह, अभिलाष सिंह, ठाकुर सिंह, शिवराम अहीर, किशुन अहीर, माधव सिंह, विशेष्वर सिंह, छांगुर सिंह, रामभरोसे सिंह समेत 15 शहीदों के नाम अंकित हैं। अन्य सात शहीदों की पहचान स्पष्ट न होने के कारण उन्हें बिसरा दिया गया।
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पूजा करते समय कलम कर दिया गया सल्तनत बहादुर का सिर
अंग्रेजी हुकूमत के प्रति जौनपुर में प्रथम सशस्त्र विद्रोह डंकन के इश्तमरारी बंदोबस्त के साथ हुआ था। सल्तनत बहादुर सिंह इस विद्रोह के नायक थे। इस विद्रोह को दबाने के लिए जनरल फ्रांसीसी के नेतृत्व में फौज की टुकड़ी सल्तनत बहादुर सिंह के गांव सरोखनपुर पहुंची, मगर उनके साथियों के जबरदस्त प्रहार के आगे अंग्रेजी फौज के पांव उखड़ गए। वर्ष 1857 में सल्तनत बहादुर सिंह के पुत्र संग्राम सिंह ने शासकों की छावनी नष्ट करने के बाद कलिजरा का गोदाम लूट लिया था। सैनिक कार्रवाई में पकड़े जाने के बाद उन्हें फांसी की सजा दे दी गई। सल्तनत बहादुर सिंह से परेशान ब्रिटिश हुकूमत ने उनके सिर पर इनाम घोषित कर दिया। घर में देवी की पूजा करते समय अंग्रेजी पुलिस ने उनका सिर कलम कर दिया था।

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स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व शहीदों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। जौनपुर जिला प्रशासन को पत्र दिया गया है। कुछ शहीदों के बारे में सूचना भेजी भी जा चुकी है। जल्द ही समग्र रिपोर्ट निदेशालय को भेज दी जाएगी। इन स्थानों पर आगे क्या-क्या होना है, यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
-कीर्तिमान श्रीवास्तव, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी।
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