महराजगंज। क्षेत्र सरायभानी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा से पहले भव्य कलश यात्रा निकाली गई। प्रयागराज से पधारे विनयानंद सरस्वती के निर्देशन में यात्रा कथास्थल से शुरू होकर सराय गौरा,वर्जी, केशवपुर,राईपुर के भ्रमण कर कथा स्थल पर समाप्त हुई। इस दौरान लगभग 200 महिलाएं सिर पर कलश रखकर चल रहीं थी।
विनयानंद सरस्वती महाराज ने कहा की मंगल कलश यात्रा के साथ 33 कोटि देवताओं को कथा श्रवण में आमंत्रित किया जाता है। भागवद्कथा श्रवण से इस संसार सागर से मुक्ति व परमात्मा मिलन संभव हो पाता है। मानव के मानवीय गुणों का विकास होता है। सत्कर्म की प्रेरणा मिलती है। सत्संग से मानव महामानव व देवत्व प्राप्त करने में सक्षम हो पाता है। कथा श्रवण से प्राप्त ज्ञान के प्रकाश से व्यक्ति को स्वयं को पहचान पाता है। ऐसे में परमात्मा से साक्षात्कार की संभावना बढ़ जाती है। राजा परीक्षित से कलयुग ने अपने रहने का स्थान मांगा तो उन्होंने हिंसालय, मदिरालय, वेश्यालय जुआलय व अनीति से कमाए गए सोने में रहने का स्थान दिया था। जरासंध के चमकदार सोने के मुकुट अनीति से अर्जित किया गया था। उसी मुकुट को जब राजा परीक्षित ने अपने सिर पर धारण कर लिया तो उनके अंदर कलयुग ने प्रवेश कर लिया। इसके बाद संतों का अपमान कराया। आज भी इन पांचों जगहों पर कलयुग का वास होता है। ऐसे में हमें इन पांचों चीजों से हमेशा बचाना चाहिए। इस दौरान आयोजक सभाजीत मिश्रा, दीपक यादव, शिव प्रसाद मिश्रा, राम संजीवन मिश्रा, सुरेश तिवारी, डॉ. कैलाश नाथ मिश्रा, रामसुख मिश्रा आदि मौजूद रहे।