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जेल में बंदियों को दी गई विधिक जानकारी
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जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव शिवानी रावत की अध्यक्षता में बंदियों को मध्यस्थता, वैकल्पिक विवाद निराकरण के लिए वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बुधवार को वर्चुअल निरीक्षण एवं विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। इस दौरान उन्होंने अधीक्षक को जेल परिसर एवं बैरकों को सैनिटाइज कराने तथा नए आने वाले बंदियों को अलग बैरक में रखने का निर्देश दिया।
शिविर में बंदियों को लोक अदालत व वैकल्पिक विवाद निराकरण के बारे में जानकारी दी गई। 11 सितंबर को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में लघु अपराध से संबंधित योग्य मामलों को चिह्नित कर निस्तारण के लिए प्रार्थना पत्र देने, बंदियों के परिजनों से मुलाकात कराए जाने, महिलाओं के साथ रह रहे बच्चों के लिए खेल कूद, शिक्षा एवं समुचित आहार की सुविधा उपलब्ध कराने का उन्होंने निर्देश दिया। सचिव ने कहा कि जेल में निरुद्ध बंदियों के परिजन जेल प्रशासन को 72 घंटे के अंदर आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट दिखाकर बंदी से मुलाकात कर सकेंगे। सचिव ने बंदियों को ‘प्ली बारगेनिंग’ के बारे में बताया। कहा कि यह एक स्वैच्छिक प्रक्रिया है। इसके तहत आरोपी अपने अपराध को स्वेच्छा से स्वीकार करता है। इससे आरोपी पर लगी धाराओं को कम सजा में बदला जा सकता है। जुर्म स्वीकार का प्रार्थना पत्र देकर सुलह के माध्यम से अपने वाद को अंतिम रूप से निस्तारित करा सकते हैं। इस अवसर पर जेल अधीक्षक एसके पांडेय, दीपक, सुरेंद्र, विमल, विकास व त्रिभुवन यादव आदि मौजूद रहे।
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शिविर में बंदियों को लोक अदालत व वैकल्पिक विवाद निराकरण के बारे में जानकारी दी गई। 11 सितंबर को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में लघु अपराध से संबंधित योग्य मामलों को चिह्नित कर निस्तारण के लिए प्रार्थना पत्र देने, बंदियों के परिजनों से मुलाकात कराए जाने, महिलाओं के साथ रह रहे बच्चों के लिए खेल कूद, शिक्षा एवं समुचित आहार की सुविधा उपलब्ध कराने का उन्होंने निर्देश दिया। सचिव ने कहा कि जेल में निरुद्ध बंदियों के परिजन जेल प्रशासन को 72 घंटे के अंदर आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट दिखाकर बंदी से मुलाकात कर सकेंगे। सचिव ने बंदियों को ‘प्ली बारगेनिंग’ के बारे में बताया। कहा कि यह एक स्वैच्छिक प्रक्रिया है। इसके तहत आरोपी अपने अपराध को स्वेच्छा से स्वीकार करता है। इससे आरोपी पर लगी धाराओं को कम सजा में बदला जा सकता है। जुर्म स्वीकार का प्रार्थना पत्र देकर सुलह के माध्यम से अपने वाद को अंतिम रूप से निस्तारित करा सकते हैं। इस अवसर पर जेल अधीक्षक एसके पांडेय, दीपक, सुरेंद्र, विमल, विकास व त्रिभुवन यादव आदि मौजूद रहे।
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