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लैब टेक्नीशियन की गलती से जारी हुई एक ही सैंपल की दो रिपोर्ट
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जौनपुर। कोरोना की जांच के लिए एक ही सैंपल की निगेटिव और पॉजिटिव दोनों रिपोर्ट जारी करने के मामले में जिला अस्पताल के लैब टेक्नीशियन की गलती उजागर हुई है। इसके लिए लैब टेक्नीशियन ने लिखित रूप से अपनी गलती स्वीकार की है। अमर उजाला की खबर पर हुई जांच के बाद चिकित्सा अधीक्षक डॉ एके शर्मा ने जांच रिपोर्ट सीएमओ को सौंप दी है।
सात अगस्त को भंडारी रेलवे स्टेशन पर लावारिस हाल में मिले किशोर की कोरोना की जांच रिपोर्ट पहले निगेटिव दी गई थी। रिपोर्ट पर भरोसा कर के ही चाइल्ड लाइन के सदस्य बेखौफ होकर किशोर के साथ जौनपुर से लेकर वाराणसी तक टहलते रहे। उसी रिपोर्ट के आधार पर वाराणसी की संस्था ने किशोर को शेल्टर होम में अन्य बच्चों के साथ रख दिया गया। अगले दिन उसके कोरोना पॉजिटिव होने की रिपोर्ट जारी की गई। उसके संपर्क में आए चाइल्ड लाइन जौनपुर से लेकर शेल्टर होम वाराणसी तक लोगों में हड़कंप मच गया था। यह खबर अमर उजाला में छपी तो स्वास्थ्य महकमे में भी हड़कंप मच गया। सीएमओ के निर्देश पर सीएमएस ने मामले की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी।
जांच कमेटी में शामिल डॉ. राम कुमार जायसवाल, डॉ सुजीत कुमार यादव, डॉ रामनगीना और डॉ एसपी नारायण की टीम ने 10 अगस्त को मामले की जांच की और लैब टेक्नीशियन से पूछताछ की। जांच कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक सात अगस्त को सैंपल कलेक्शन पर अधिक भीड़ थी। कुल 135 लोगों का सैंपल लिया गया और रिपोर्ट तैयार की गई। जांच के दौरान दो स्लाइड बनाने के समय स्लाइड पर केवल शुभम अंकित किया गया। टाइटिल नहीं लिखा गया था। नतीजतन क्रमांक संख्या 62 के शुभम पांडेय के स्थान पर शुभम तिवारी (क्रमांक संख्या 7) की रिपोर्ट दर्ज हो गई। आईसीएमआर फार्म पर भेजी गई रिपोर्ट में शुभम पांडेय की रिपोर्ट पॉजिटिव और शुभम तिवारी की रिपोर्ट निगेटिव है। इसके लिए लैब टेक्नीशियन पीयूष चक्रवर्ती ने जांच कमेटी के समक्ष लिखित रूप से अपनी गलती को स्वीकार करते हुए भविष्य में ऐसी गलती न होने की बात कही है।
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सात अगस्त को भंडारी रेलवे स्टेशन पर लावारिस हाल में मिले किशोर की कोरोना की जांच रिपोर्ट पहले निगेटिव दी गई थी। रिपोर्ट पर भरोसा कर के ही चाइल्ड लाइन के सदस्य बेखौफ होकर किशोर के साथ जौनपुर से लेकर वाराणसी तक टहलते रहे। उसी रिपोर्ट के आधार पर वाराणसी की संस्था ने किशोर को शेल्टर होम में अन्य बच्चों के साथ रख दिया गया। अगले दिन उसके कोरोना पॉजिटिव होने की रिपोर्ट जारी की गई। उसके संपर्क में आए चाइल्ड लाइन जौनपुर से लेकर शेल्टर होम वाराणसी तक लोगों में हड़कंप मच गया था। यह खबर अमर उजाला में छपी तो स्वास्थ्य महकमे में भी हड़कंप मच गया। सीएमओ के निर्देश पर सीएमएस ने मामले की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी।
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जांच कमेटी में शामिल डॉ. राम कुमार जायसवाल, डॉ सुजीत कुमार यादव, डॉ रामनगीना और डॉ एसपी नारायण की टीम ने 10 अगस्त को मामले की जांच की और लैब टेक्नीशियन से पूछताछ की। जांच कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक सात अगस्त को सैंपल कलेक्शन पर अधिक भीड़ थी। कुल 135 लोगों का सैंपल लिया गया और रिपोर्ट तैयार की गई। जांच के दौरान दो स्लाइड बनाने के समय स्लाइड पर केवल शुभम अंकित किया गया। टाइटिल नहीं लिखा गया था। नतीजतन क्रमांक संख्या 62 के शुभम पांडेय के स्थान पर शुभम तिवारी (क्रमांक संख्या 7) की रिपोर्ट दर्ज हो गई। आईसीएमआर फार्म पर भेजी गई रिपोर्ट में शुभम पांडेय की रिपोर्ट पॉजिटिव और शुभम तिवारी की रिपोर्ट निगेटिव है। इसके लिए लैब टेक्नीशियन पीयूष चक्रवर्ती ने जांच कमेटी के समक्ष लिखित रूप से अपनी गलती को स्वीकार करते हुए भविष्य में ऐसी गलती न होने की बात कही है।
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