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जौनपुरः वैज्ञानिक सराभाई ने देश को अंतरिक्ष तक पहुंचाया, 102वीं जयंती पर किया नमन
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जौनपुर। देश को अंतरिक्ष तक पहुंचाने वाले महान वैज्ञानिक विक्रम अंबालाल साराभाई की 102वीं जयंती बृहस्पतिवार को सरावां स्थित शहीद लाल बहादुर गुप्त स्मारक पर मनाई गई। हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी व लक्ष्मी बाई ब्रिगेड के कार्यकर्ताओं ने शहीद स्मारक पर पुष्प अर्पित कर नमन किया।
लक्ष्मी बाई ब्रिगेड की अध्यक्ष मंजीत कौर ने कहा कि अहमदाबाद के एक अग्रणी कपड़ा व्यापारी के घर 12 अगस्त 1919 को जन्मे साराभाई की गिनती भारत के महान वैज्ञानिकों में की जाती है। वह अपने साथ काम करने वाले वैज्ञानिकों, विशेषकर युवा वैज्ञानिकों को आगे बढ़ने में काफी मदद करते थे। उन्होंने इसरो की स्थापना के लिए सरकार को राजी किया था। उन्होंने तिरुवनंतपुरम के थुंबा गांव में 21 नवंबर 1963 को एक छोटा राकेट लांच किया था। बाद में इस प्रक्षेपण स्थल का नाम विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर रखा गया। देश के कई अहम संस्थाओं की स्थापना में उनका योगदान रहा। 1947 में अहमदाबाद में भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल) की स्थापना की और थोड़ी ही समय में इसे विश्वस्तरीय संस्थान बना दिया। 15 अगस्त 1969 को इंडियन स्पेस रीसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) की स्थापना की। महज 52 साल की उम्र में 30 दिसंबर 1971 को तिरुवनंतपुरम में उनका निधन हो गया।
इसके अलावा स्मारक पर क्रांतिकारी लाल पद्मधर सिंह का 79वां बलिदान दिवस मनाया। हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी व लक्ष्मीबाई ब्रिगेड के कार्यकर्ताओं ने शहीद स्मारक पर मोमबत्ती व अगरबत्ती जलाकर श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर डॉ. धर्म सिंह , मैनेजर पांडेय, अनिरुद्ध सिंह, दिशा, मौजूद रहे।
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लक्ष्मी बाई ब्रिगेड की अध्यक्ष मंजीत कौर ने कहा कि अहमदाबाद के एक अग्रणी कपड़ा व्यापारी के घर 12 अगस्त 1919 को जन्मे साराभाई की गिनती भारत के महान वैज्ञानिकों में की जाती है। वह अपने साथ काम करने वाले वैज्ञानिकों, विशेषकर युवा वैज्ञानिकों को आगे बढ़ने में काफी मदद करते थे। उन्होंने इसरो की स्थापना के लिए सरकार को राजी किया था। उन्होंने तिरुवनंतपुरम के थुंबा गांव में 21 नवंबर 1963 को एक छोटा राकेट लांच किया था। बाद में इस प्रक्षेपण स्थल का नाम विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर रखा गया। देश के कई अहम संस्थाओं की स्थापना में उनका योगदान रहा। 1947 में अहमदाबाद में भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल) की स्थापना की और थोड़ी ही समय में इसे विश्वस्तरीय संस्थान बना दिया। 15 अगस्त 1969 को इंडियन स्पेस रीसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) की स्थापना की। महज 52 साल की उम्र में 30 दिसंबर 1971 को तिरुवनंतपुरम में उनका निधन हो गया।
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इसके अलावा स्मारक पर क्रांतिकारी लाल पद्मधर सिंह का 79वां बलिदान दिवस मनाया। हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी व लक्ष्मीबाई ब्रिगेड के कार्यकर्ताओं ने शहीद स्मारक पर मोमबत्ती व अगरबत्ती जलाकर श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर डॉ. धर्म सिंह , मैनेजर पांडेय, अनिरुद्ध सिंह, दिशा, मौजूद रहे।
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