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Jnanpith Award 2025: जगद्गुरु रामभद्राचार्य को 58वां ज्ञानपीठ पुरस्कार, राष्ट्रपति मुर्मू ने किया सम्मानित
Fri, 16 May 2025 09:29 PM IST
अनुज कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर।
Published by: अनुज कुमार
Updated Fri, 16 May 2025 09:29 PM IST
सार
Swami Rambhadracharya: राजधानी दिल्ली के विज्ञान भवन में आज जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य को 58वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें ये सम्मान दिया है।
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जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जिले के सुजनगंज निवासी महान संत जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी श्रीरामभद्राचार्य जी महाराज को शुक्रवार को भारत गणराज्य के 58वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिल्ली में दिया।
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दिल्ली स्थित जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय के सचिव आरपी मिश्रा ने बताया कि आज का दिन हमारे देश के लिए अत्यंत प्रसन्नतापूर्ण और गौरवशाली है। भारत गणराज्य की महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में भारत का 58 वां ज्ञानपीठ पुरस्कार साहित्यिक सेवा के लिए पद्म विभूषण जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी को प्रदान किया।
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यह पुरस्कार उन्हें साहित्यिक सेवा में अभूतपूर्व योगदान के लिए दिया गया है। यह पुरस्कार संस्कृत भाषा के प्रकांड विद्वान के रूप में आपकी अद्वितीय सेवाओं योगदान को अविस्मरणीय बनाती हैं। पुरस्कार में शाॅल श्रीफल, मोमेंटो, मां सरस्वती की प्रतिमा, नगद पुरस्कार का चेक दिया गया।
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भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त करते हुए पद्म विभूषण जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी ने कहा कि मुझे यह पुरस्कार संस्कृत भाषा में दिया जा रहा है। मैं इसके लिए सभी को हृयय से आभार प्रेषित करता हूं। मैं जीवन पर्यन्त साहित्यिक सेवा करता रहूंगा। मेरी लेखनी से भारत से भारत की उन्नयन में सृजन होता है।
इस ऐतिहासिक ज्ञानपीठ पुरस्कार मिलने से रामभद्राचार्य जी के पैतृक गांव शचीपुरम में बंधाई देने वाले लोगों का तांता लग गया। उनके परिवार में काका के नाम से प्रसिद्ध ब्रह्मदेव मिश्र और छोटे अनुज आचार्य चंदकांत मणि मिश्र, ओम प्रकाश मिश्र, क्षेत्रीय लोगों में उमाशंकर सिंह जज साहब, अवधेश सिंह आदि मौजूद रहे।