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Jaunpur News: सोने के ताजिये का दीदार करने उमड़े हिंदू-मुस्लिम
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मछलीशहर के जरी इमामबाड़ा में रखा गई सोने की ताजिया।-रमाशंकर शुक्ला
मछलीशहर। नगर के खानजादा मोहल्ला स्थित जरी इमामबाड़ा में सदियों से सुरक्षित सोने का ताजिया शुक्रवार को आम अकीदतमंदों के दीदार के लिए खोला गया।
इस ऐतिहासिक व बेशकीमती धरोहर को देखने के लिए बड़ी संख्या में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग पहुंचे। अकीदतमंदों ने ताजिया का दीदार कर मन्नतें मांगीं। जिनकी मन्नत पूरी हुई उन्होंने अजाखने में चांदी के घुंघरू आदि चढ़ाए।
इस इमामबाड़े की देखरेख करने वाले हैदर इकबाल रिजवी ने बताया कि सन् 1857 की क्रांति (गदर) के समय लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह ने इस स्वर्ण जड़ित ताजिया को अंग्रेजों की विनाशकारी नजरों से बचाने के लिए एक बड़े ताबूत में बंद कर गोमती नदी में प्रवाहित कर दिया था। उस दौर में प्रतापगढ़ जिले में डिप्टी कलेक्टर के पद पर कार्यरत मछलीशहर के स्थानीय निवासी अली जामिन जैदी ने इस ताबूत को नदी से सकुशल बरामद किया। वे इसे लाकर इस इमामबाड़े में सम्मानपूर्वक रखा, और तब से लेकर आज तक यह अनमोल धरोहर यहां की शोभा बढ़ा रही है।
इमामबाड़े में है स्वर्णाक्षरों वाली दुर्लभ कुरान पाक
इस स्वर्ण जड़ित ताजिया के साथ-साथ इस इमामबाड़े में एक और बेहद अनमोल और ऐतिहासिक धरोहर सुरक्षित है,सोने के अक्षरों वाली दुर्लभ कुरान शरीफ। सदियों पुरानी इस बेशकीमती विरासत को खरीदने या हासिल करने का कई लोगों ने प्रयास किया, लेकिन इमामबाड़े के पूर्व मुतवल्ली दिवंगत कलब मेहंदी ने कभी इसे खुद से अलग नहीं होने दिया। वर्तमान में इस ऐतिहासिक इमामबाड़े के मुतवल्ली के रूप में कमर रजा कार्यभार संभाल रहे हैं, जबकि स्थानीय स्तर पर इसकी पूरी देखरेख हैदर इकबाल रिजवी द्वारा की जा रही है। साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल बना यह इमामबाड़ा आज भी पूरे क्षेत्र के लिए कौमी एकता और अकीदत का एक बड़ा केंद्र है।
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इस ऐतिहासिक व बेशकीमती धरोहर को देखने के लिए बड़ी संख्या में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग पहुंचे। अकीदतमंदों ने ताजिया का दीदार कर मन्नतें मांगीं। जिनकी मन्नत पूरी हुई उन्होंने अजाखने में चांदी के घुंघरू आदि चढ़ाए।
इस इमामबाड़े की देखरेख करने वाले हैदर इकबाल रिजवी ने बताया कि सन् 1857 की क्रांति (गदर) के समय लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह ने इस स्वर्ण जड़ित ताजिया को अंग्रेजों की विनाशकारी नजरों से बचाने के लिए एक बड़े ताबूत में बंद कर गोमती नदी में प्रवाहित कर दिया था। उस दौर में प्रतापगढ़ जिले में डिप्टी कलेक्टर के पद पर कार्यरत मछलीशहर के स्थानीय निवासी अली जामिन जैदी ने इस ताबूत को नदी से सकुशल बरामद किया। वे इसे लाकर इस इमामबाड़े में सम्मानपूर्वक रखा, और तब से लेकर आज तक यह अनमोल धरोहर यहां की शोभा बढ़ा रही है।
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इमामबाड़े में है स्वर्णाक्षरों वाली दुर्लभ कुरान पाक
इस स्वर्ण जड़ित ताजिया के साथ-साथ इस इमामबाड़े में एक और बेहद अनमोल और ऐतिहासिक धरोहर सुरक्षित है,सोने के अक्षरों वाली दुर्लभ कुरान शरीफ। सदियों पुरानी इस बेशकीमती विरासत को खरीदने या हासिल करने का कई लोगों ने प्रयास किया, लेकिन इमामबाड़े के पूर्व मुतवल्ली दिवंगत कलब मेहंदी ने कभी इसे खुद से अलग नहीं होने दिया। वर्तमान में इस ऐतिहासिक इमामबाड़े के मुतवल्ली के रूप में कमर रजा कार्यभार संभाल रहे हैं, जबकि स्थानीय स्तर पर इसकी पूरी देखरेख हैदर इकबाल रिजवी द्वारा की जा रही है। साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल बना यह इमामबाड़ा आज भी पूरे क्षेत्र के लिए कौमी एकता और अकीदत का एक बड़ा केंद्र है।
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