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देश और संस्कृति को एक सूत्र में बांधती है हिंदी : प्रो. पातंजलि
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पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति सभागार में सोमवार को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में अनुवाद की भूमिका विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह आयोजन भारतीय भाषा संस्कृति एवं कला प्रकोष्ठ और जनसंचार विभाग की ओर से किया गया। बतौर मुख्य अतिथि पूर्व कुलपति प्रो. पीसी पांतजलि ने कहा कि हिंदी सशक्त भाषा है, जो सभी भाषाओं को समाहित कर लेती है। यह संस्कृति की संवाहक है। हिंदी ही देश की संस्कृति को बचाने के साथ-साथ राष्ट्र को एक सूत्र में बांधने का काम करती है। उन्होंने कहा कि हिंदी जब तक रोजगार परक नहीं बनेगी तब तक राष्ट्रवाद नहीं पनपेगा।
अध्यक्षता कर रही कुलपति प्रो. निर्मला एस मौर्य ने कहा कि बैंकिंग साहित्य में अनुवाद की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसमें रोजगार के अवसर उपलब्ध है। अनुवादक स्रोत को लक्ष्य भाषा बनाते हैं। साहित्य जानने वाले लोगों की भाषा पर पकड़ होती है। वह हर विषय पर बोल सकता है। अनुवाद का क्षेत्र बहुत बड़ा है। इसमें बहुत काम हो रहा है और रोजगार के अवसर भी उपलब्ध है।
कुलसचिव महेंद्र कुमार ने कहा कि भाषा को समझने का माध्यम अनुवाद है। संचालन जनसंचार विभाग के अध्यक्ष डा. मनोज मिश्र एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रो. अजय द्विवेदी ने किया। इस अवसर पर प्रो. बीबी तिवारी, प्रो. अविनाश, प्रो. रामनारायण, प्रो. बीडी शर्मा, प्रो. देवराज सिंह आदि उपस्थित रहे।
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अध्यक्षता कर रही कुलपति प्रो. निर्मला एस मौर्य ने कहा कि बैंकिंग साहित्य में अनुवाद की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसमें रोजगार के अवसर उपलब्ध है। अनुवादक स्रोत को लक्ष्य भाषा बनाते हैं। साहित्य जानने वाले लोगों की भाषा पर पकड़ होती है। वह हर विषय पर बोल सकता है। अनुवाद का क्षेत्र बहुत बड़ा है। इसमें बहुत काम हो रहा है और रोजगार के अवसर भी उपलब्ध है।
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कुलसचिव महेंद्र कुमार ने कहा कि भाषा को समझने का माध्यम अनुवाद है। संचालन जनसंचार विभाग के अध्यक्ष डा. मनोज मिश्र एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रो. अजय द्विवेदी ने किया। इस अवसर पर प्रो. बीबी तिवारी, प्रो. अविनाश, प्रो. रामनारायण, प्रो. बीडी शर्मा, प्रो. देवराज सिंह आदि उपस्थित रहे।
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