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अटला माता मंदिर केस: अब 27 फरवरी को होगी सुनवाई, बहस के दौरान अटाला मस्जिद को बताया है मंदिर
Sat, 21 Dec 2024 12:11 AM IST
वाराणसी ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर।
Published by: वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 21 Dec 2024 12:11 AM IST
सार
अटला माता मंदिर केस में अब 27 फरवरी को सुनवाई होगी। इस मामले में पूर्व में वादी अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने बहस के दौरान अटाला मस्जिद को अटला देवी मंदिर बताया है, जिसका निर्माण कन्नौज के राजा जयचंद राठौर ने करवाया था।
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मस्जिद को अटाला माता मंदिर बताने का मामला
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सिविल जज सीनियर डिवीजन अनुज कुमार जौहर की अदालत में अटला माता मंदिर केस में सुनवाई अब 27 फरवरी को होगी। वादी ने कोर्ट के आदेश पर मुनादी और समाचार पत्र में नोटिस प्रकाशित कराकर पत्रावली में दाखिल करा दिया है। कोर्ट ने सुनवाई के लिए 20 दिसंबर की तिथि नियत की थी। वादी पक्ष उपस्थित नहीं हुआ।
बता दें कि पूर्व में वादी अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने बहस के दौरान अटाला मस्जिद को अटला देवी मंदिर बताया है, जिसका निर्माण कन्नौज के राजा जयचंद राठौर ने करवाया था। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की रिपोर्ट में अटला देवी मंदिर के कई फोटोग्राफ दिए गए हैं, जिनमें शंख, त्रिशूल, षटदल कमल, गुड़हल के फूल, बंधन बार आदि शामिल हैं। इन्हें हिंदू शिल्पकला माना जाता है।
अटाला मस्जिद की जमीन राजस्व अभिलेखों में जामा मस्जिद के नाम से दर्ज है, जिसकी वर्तमान मालिक केंद्र सरकार है। अटाला मस्जिद का वक्फ एक्ट 1995 की धारा 4 के अनुसार आज तक सर्वे नहीं हुआ, जिसके कारण उनके केस पर वक्फ कानून लागू नहीं होता। अटाला मस्जिद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधीन संरक्षित स्मारक है, जिसके कारण केस पर पूजा स्थल अधिनियम 1991 लागू नहीं होता है।
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बता दें कि पूर्व में वादी अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने बहस के दौरान अटाला मस्जिद को अटला देवी मंदिर बताया है, जिसका निर्माण कन्नौज के राजा जयचंद राठौर ने करवाया था। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की रिपोर्ट में अटला देवी मंदिर के कई फोटोग्राफ दिए गए हैं, जिनमें शंख, त्रिशूल, षटदल कमल, गुड़हल के फूल, बंधन बार आदि शामिल हैं। इन्हें हिंदू शिल्पकला माना जाता है।
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अटाला मस्जिद की जमीन राजस्व अभिलेखों में जामा मस्जिद के नाम से दर्ज है, जिसकी वर्तमान मालिक केंद्र सरकार है। अटाला मस्जिद का वक्फ एक्ट 1995 की धारा 4 के अनुसार आज तक सर्वे नहीं हुआ, जिसके कारण उनके केस पर वक्फ कानून लागू नहीं होता। अटाला मस्जिद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधीन संरक्षित स्मारक है, जिसके कारण केस पर पूजा स्थल अधिनियम 1991 लागू नहीं होता है।
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