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पांच से 50 हजार तक की हैं देवी प्रतिमाएं
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Fri, 23 Sep 2016 01:05 AM IST
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नौपेड़वा बाजार में मूर्ति को अंतिम रूप देता कोलकाता का कलाकार।
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दुर्गा पूजा के लिए प्रतिमाओं का बाजार सजने लगा है। कलाकार प्रतिमा को अंतिम रूप दे रहे हैं। बाजार में पांच हजार से लेकर 50 हजार तक की दुर्गा प्रतिमाएं उपलब्ध हैं। पिछले तीन सालों के अंतराल में दुर्गा प्रतिमाओं की कीमत में दो सौ से लेकर एक हजार रुपये तक का इजाफा हुआ है।
जबकि मूर्ति बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले सामानों की कीमतों में अधिक इजाफा हुआ है। जिले में दुर्गा प्रतिमाओं का बाजार पूरी तरह कोलकाता के कलाकारों के हाथ में है। प्रतिमा बनाने का काम कर रहे कलाकारों का यह पुश्तैनी धंधा है।
नगर के बाजिदपुर तिराहा, टीडी कालेज गेट, सिपाह, जगतगंज, नौपेड़वा बाजार समेत जिले कुल आठ स्थानों पर खटल (प्रतिमा बनाने का स्थान) चल रहा है। ये कलाकार चार माह पहले कोलकाता से आकर यहां जगह जगह मूर्ति बनाने के काम में जुट जाते हैं।
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पहले जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति बनाते हैं। फिर गणेश पूजा पर गणेश प्रतिमा और दुर्गा प्रतिमा बनाने के बाद कलाकार वापस कोलकाता चले जाते हैं। वहां सरस्वती पूजा, काली पूजा के लिए प्रतिमा बनाने में जुट जाते हैं। नौपेड़वा में मूर्ति बना रहे वर्धमान कोलकाता के कलाकार संजय पाल कहते हैं कि मूर्ति बनाना उनका पुश्तैनी धंधा है।
उनके बच्चे भी यही काम सीख रहे हैं। पहले सादी मूर्तियां बनती थी अब डिजाइनिंग वाली मूर्तियों की डिमांड हो रही है। मूर्ति के पीछे पहाड़ वाली डिजाइनिंग की मूर्तियों की अधिक मांग है। दूसरे कलाकर सपन कुमार बताते हैं कि पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष मूर्तियां बनाने में दस से पंद्रह फीसदी खर्च बढ़ा है। बांस और पटरी का दाम बढ़ गया है।
जबकि मूर्तियों की कीमत इस अनुपात में नहीं बढ़ी। उनके साथ पिंटू, समीर, नारायन, किशन, सोना भी मूर्ति बनाने में सहयोग कर रहे हैं। मूर्ति के लिए साज सामग्री वह बंगाल से लेकर आते हैं। यहां से केवल बांस, पटरी, मिट्टी और पुआल की व्यवस्था करनी पड़ती है। बंगाल से कलाकार जिले में एक दर्जन से अधिक स्थानों पर मूर्ति बना रहे हैं।
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जबकि मूर्ति बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले सामानों की कीमतों में अधिक इजाफा हुआ है। जिले में दुर्गा प्रतिमाओं का बाजार पूरी तरह कोलकाता के कलाकारों के हाथ में है। प्रतिमा बनाने का काम कर रहे कलाकारों का यह पुश्तैनी धंधा है।
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नगर के बाजिदपुर तिराहा, टीडी कालेज गेट, सिपाह, जगतगंज, नौपेड़वा बाजार समेत जिले कुल आठ स्थानों पर खटल (प्रतिमा बनाने का स्थान) चल रहा है। ये कलाकार चार माह पहले कोलकाता से आकर यहां जगह जगह मूर्ति बनाने के काम में जुट जाते हैं।
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पहले जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति बनाते हैं। फिर गणेश पूजा पर गणेश प्रतिमा और दुर्गा प्रतिमा बनाने के बाद कलाकार वापस कोलकाता चले जाते हैं। वहां सरस्वती पूजा, काली पूजा के लिए प्रतिमा बनाने में जुट जाते हैं। नौपेड़वा में मूर्ति बना रहे वर्धमान कोलकाता के कलाकार संजय पाल कहते हैं कि मूर्ति बनाना उनका पुश्तैनी धंधा है।
उनके बच्चे भी यही काम सीख रहे हैं। पहले सादी मूर्तियां बनती थी अब डिजाइनिंग वाली मूर्तियों की डिमांड हो रही है। मूर्ति के पीछे पहाड़ वाली डिजाइनिंग की मूर्तियों की अधिक मांग है। दूसरे कलाकर सपन कुमार बताते हैं कि पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष मूर्तियां बनाने में दस से पंद्रह फीसदी खर्च बढ़ा है। बांस और पटरी का दाम बढ़ गया है।
जबकि मूर्तियों की कीमत इस अनुपात में नहीं बढ़ी। उनके साथ पिंटू, समीर, नारायन, किशन, सोना भी मूर्ति बनाने में सहयोग कर रहे हैं। मूर्ति के लिए साज सामग्री वह बंगाल से लेकर आते हैं। यहां से केवल बांस, पटरी, मिट्टी और पुआल की व्यवस्था करनी पड़ती है। बंगाल से कलाकार जिले में एक दर्जन से अधिक स्थानों पर मूर्ति बना रहे हैं।