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लॉकडाउन के पांच माह: शहर में दिन में भी छाया रहता था सियापा, अब लग रहा जाम
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जौनपुर। कोरोना संक्रमण के खतरे के कारण 25 मार्च से देश में संपूर्ण लॉक डाउन शुरू हुआ तो जैसे जिंदगी ठहर सी गई थी। शहर के जिन इलाकों में बिना जाम में फंसे गुजरना मुश्किल होता था, उन इलाकों में सियापा छा गया। सड़कों पर सन्नाटा, गलियों में वीरानी छा गई थी। स्कूल-कॉलेज, दफ्तर, दुकान सब पर ताले लग गए थे। यहां तक कि ट्रेनों की छुकछुक सुनने को कान तरस गए थे। अनलॉक में स्थितियां बदली तो धीरे-धीरे सबकुछ पटरी पर लौटने लगा। पाबंदियों के बीच शुरू हुए कामकाज में तमाम बदलाव स्वत: महसूस किए जा रहे हैं। लॉक डाउन के बाद के पांच माह ने लोगों की दिनचर्या से लेकर जीवन शैली को काफी हद तक बदल दिया है। गप्पबाजी के शौकीन अब मिलने-जुलने से परहेज कर रहे हैं। भीड़-भाड़ वाले कार्यक्रमों में लोग जाने से हिचक रहे हैं। होटल-रेस्टूरेंट में चटकारे लगाने वालों को अब घर की दाल ही स्वादिष्ट लगने लगी है। मंगलवार को लॉक डाउन के पांच माह पूरे हो रहे हैं। इन पांच माह में हमने क्या बदलाव देखे और जनजीवन पर इसका क्या असर रहा है, इस पर अमर उजाला ने पड़ताल की।
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मास्क, सैनिटाइजर हुआ जरुरी, भीड़-भाड़ से होने लगी दूरी
बदले हुए लोग और बदले आचरण के बीच सैनिटाइजर का प्रयोग बढ़ गया है। लोग पहले से कहीं ज्यादा घर की साफ-सफाई पर ध्यान दे रहे हैं। हर कोई महामारी विशेषज्ञ की भूमिका निभाने लगा है। शोसल डिस्टेंसिंग, एन-95 मास्क, रेड जोन जैसे शब्द लोगों की जुबान पर आ गए हैं। इसी के साथ बढ़ा है महामारी से बचने के उपायों का पालन। कोरोना के नए-नए लक्षणों को लेकर बातचीत होने लगी है जैसे: सुगंध न आना, पैर के अंगूठे का रंग बदल जाना। कभी-कभी स्वस्थ लोगों को चिंता बढ़ने लगी है। छह फीट या दो मीटर की सामाजिक दूरी बनाए रखने की पूरी कोशिश। हाथों से बार-बार चेहरा ना छूना, कभी-कभी घर से निकलने के बाद मास्क पहनना भूल जाने पर रास्ते में पहले मास्क खरीदना जरूरी हो गया है।
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लौट आई बाजार की रौनक
लॉकडाउन के शुरुआती दिनों में सिर्फ राशन, दवा, सब्जी जैसी दुकानों को ही खुलने की छूट थी। दवा को छोड़ राशन और सब्जी की दुकानों का बाकायदा समय निर्धारित कर दिया गया था। बाकी सारे व्यवसाय ठप हो गए थे। बाजार में बिना काम के निकले वालों का चालान कट जाता था। कुछ दिनों बद अन्य दुकानों के भी खुलने की छूट मिली सप्ताह में तीन दिन या दो दिन ही दुकाने खुल पा रही थी। फिर बदलाव आया कि सभी दुकाने खुल सकती हैं लेकिन सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक ही दुकाने खुलेंगी। बाद में दुकानों के खुलने का समय पांच बजे से बढ़ाकर शाम सात बजे कर दिया गया। अब सोमवार से दुकानों का खुलने का समय सुबह नौ बजे से रात नौ बजे तक कर दिया गया है। इससे बाजारों की रौनक बढ़ने लगी है।
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गुलजार हुए पिकनिक स्पॉट
लॉकडाउन के चलते शाही किला, वन विहार, लोहिया पार्क जैसे शहर के पिकनिक स्पॉटों पर भी लोगों के आने जाने पर पाबंदी लगा दी गई थी। सुबह से शाम तक लोगों की आवाजाही से गुलजार रहने वाले पिकनिक स्पाटों पर भी सन्नाटा पसर गया था। 25 जून के बाद से ऐसे स्थलों को भी जनता के लिए खोल दिया गया। शाही किले में ई टिकट के माध्यम से लोगों को प्रवेश दिया जा रहा है। अब यहां रोज लोग सैर सपाटे के लिए आते हैं।
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घट गए थे मरीज, अब फिर से बढ़ने लगे
लॉकडाउन के दौरान सबसे चौंकानें वाली स्थिति अस्पतालों की थी। मरीजों की संख्या में अचानक कमी आ गई थी। निजी अस्पताल तो बंद थे ही, सरकारी अस्पतालों में भी गिनती के लोग ही पहुंच रहे थे। मरीजों के अचानक से कम होने से हर कोई हतप्रभ था। बहरहाल, अब फिर से मरीजों की संख्या में इजाफा शुरू हो गया है। निजी अस्पतालों के बाहर भीड़ लगने लगी है। प्रवेश के दौरान ही उन्हें जांच की प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है। हालांकि अभी भी कई अस्पतालों ने मरीजों के दवा-उपचार को लेकर दूरी बना रखी है। अधिकांश निजी अस्पताल खुलने लगे है। अब अस्पताल जाने में लोगों को पहले जैसा डर भी नहीं लगता। स्वास्थ्य सेवाएं भी पटरी पर लौट आई हैं।
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पहले टिकट को थी मारामारी, अब ट्रेनें जा रहे खाली
लॉक डाउन से पहले महानगरों की ओर जाने के लिए ट्रेनों का टिकट पाने के लिए मारामारी मची रहती थी। बुकिंग खुलते ही टिकट के लिए लंबी कतारें लग जाती थीं। वेटिंग का टिकट लेकर स्लीपर और एसी कोच में लोग बैठकर जाते थे। जनरल कोच में पांव रखने की भी जगह नहीं होती थी। अब स्थितियां अलग हैं। महानगरों की ओर ट्रेनें तो जा रही हैं, मगर अब पहले जैसी भीड़ नहीं।ग बिना आरक्षण के किसी को भी ट्रेन में सफर की इजाजत नहीं। लोगों को स्वास्थ्य जांच के क्रम से गुजरना पड़ रहा है। पहले ही अपेक्षा ट्रेनों का संचालन भी कम हो रहा है। यह बात अलग है कि अब फिर से महानगरों की ओर जाने वालों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ने लगी है, मगर भीड़ का वह आलम पहले जैसा नहीं दिख रहा।
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कई लोगों ने बदल लिया था व्यवसाय
लॉकडाउन के चलते जब दवा, राशन और सब्जी की दुकानों को छोड़ बाकी दुकानों को बंद करा दिया गया था तो कई लोगों की आमदनी ठप होने से घर का खर्चा भी चलाना मुश्किल हो गया था। आभूषण, कपड़ा, बर्तन आदि का व्यवसाय करने वाले कई लोेगों ने सब्जी का धंधा शुरू कर दिया था। अब सभी दुकानों को खुलने की छूट मिल गई तो ऐसे लोग फिर से अपने पुराने धंधे में लौट आए है। हालांकि आर्थिक मंदी के चलते तमाम दुकानदारों का कहना है कि व्यवसाय अभी पटरी पर आने में समय लगेगा। -चंदन सोनी।
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दफ्तरों में अनिवार्य हो गया मास्क और सैनिटाइजर
सरकारी और गैर सरकारी दफ्तर भी अब खुलने लगे हैं। सभी दफ्तरों में संक्रमण से बचने के लिए मास्क, सैनिटाइजर जैसी सुरक्षा के सामानों की उपलब्धता अनिवार्य की गई है। सामाजिक दूरी के मानक के साथ दफ्तरों में कु र्सियां दूर दूर रख दी गई है। अब समय के साथ इन दफ्तरों की भी रौनक लौटने लगी हैं। शुरुआत में सरकारी दफ्तर खोलने के जब निर्देश हुए तो जरूरी काम के लिए ही कर्मचारियों को बुलाया जा रहा था। अफसर दफ्तर में बैठते थे लेकिन कर्मचारी नहीं आते थे। अब सभी अफसर, कर्मचारी के अलावा फरियादी भी पहुंच रहे हैं। -सुरेश अस्थाना।
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दुकानों पर सन्नाटा, सड़क पर जाम
अनलॉक के बाद सभी अब सभी दुकानें खुलने की छूट भले ही मिल गई है औस दुकान खुलने का समय भी बढ़ा दिया गया है पर कई कोरोबार अभी पटरी पर पूरी तरह नहीं लौट सके हैं। तमाम दुकानों पर सन्नाटा देखा जा रहा है लेकिन सड़क पर भीड़ देख कर हैरानी होती है। शहर के कोतवाली चौराहा, ओलंदगंज, कचहरी रोड पर आएदिन जाम लगता है। अगर दुकानों पर पहले जैसे ग्राहक नहीं आ रहें तो सड़क पर जाम कैसे लग रहा यह सोच कर हैरानी होती है। -अभिनव सिंह।
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मोबाइल के लिए बच्चों को मिल गई छूट
लॉक डाउन से पहले घर में जब बच्चे मोबाइल देर तक देखते तो उन्हें डांट पड़ती थी। अभिभावक उनसे मोबाइल फोन छीन लेते और किताबें पढ़ने की नसीहत देते रहते थे। लॉकडाउन ने बच्चों को मोबाइल के साथ रहने की जैसे आजादी भी दे दी है। स्कूल कॉलेज बंद हुए तो ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा दिया जाने लगा। ऐसे में बच्चे बिना मोबाइल के ऑनलाइन क्लास से नहीं जुड़ सकते थे। उन्हें अभिभावकों ने खुद मोबाइल दिए और ऑनलाइन क्लास अटेंड करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। बच्चा मोबाइल लेकर घर में बैठा है तो मान लेते हैं कि वह क्लास कर रहा है। कई शिाक्षकों ने यूट्यूब चैनल बना लिए हैं। -रविचंद्र यादव शिक्षक।
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मास्क, सैनिटाइजर हुआ जरुरी, भीड़-भाड़ से होने लगी दूरी
बदले हुए लोग और बदले आचरण के बीच सैनिटाइजर का प्रयोग बढ़ गया है। लोग पहले से कहीं ज्यादा घर की साफ-सफाई पर ध्यान दे रहे हैं। हर कोई महामारी विशेषज्ञ की भूमिका निभाने लगा है। शोसल डिस्टेंसिंग, एन-95 मास्क, रेड जोन जैसे शब्द लोगों की जुबान पर आ गए हैं। इसी के साथ बढ़ा है महामारी से बचने के उपायों का पालन। कोरोना के नए-नए लक्षणों को लेकर बातचीत होने लगी है जैसे: सुगंध न आना, पैर के अंगूठे का रंग बदल जाना। कभी-कभी स्वस्थ लोगों को चिंता बढ़ने लगी है। छह फीट या दो मीटर की सामाजिक दूरी बनाए रखने की पूरी कोशिश। हाथों से बार-बार चेहरा ना छूना, कभी-कभी घर से निकलने के बाद मास्क पहनना भूल जाने पर रास्ते में पहले मास्क खरीदना जरूरी हो गया है।
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लौट आई बाजार की रौनक
लॉकडाउन के शुरुआती दिनों में सिर्फ राशन, दवा, सब्जी जैसी दुकानों को ही खुलने की छूट थी। दवा को छोड़ राशन और सब्जी की दुकानों का बाकायदा समय निर्धारित कर दिया गया था। बाकी सारे व्यवसाय ठप हो गए थे। बाजार में बिना काम के निकले वालों का चालान कट जाता था। कुछ दिनों बद अन्य दुकानों के भी खुलने की छूट मिली सप्ताह में तीन दिन या दो दिन ही दुकाने खुल पा रही थी। फिर बदलाव आया कि सभी दुकाने खुल सकती हैं लेकिन सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक ही दुकाने खुलेंगी। बाद में दुकानों के खुलने का समय पांच बजे से बढ़ाकर शाम सात बजे कर दिया गया। अब सोमवार से दुकानों का खुलने का समय सुबह नौ बजे से रात नौ बजे तक कर दिया गया है। इससे बाजारों की रौनक बढ़ने लगी है।
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गुलजार हुए पिकनिक स्पॉट
लॉकडाउन के चलते शाही किला, वन विहार, लोहिया पार्क जैसे शहर के पिकनिक स्पॉटों पर भी लोगों के आने जाने पर पाबंदी लगा दी गई थी। सुबह से शाम तक लोगों की आवाजाही से गुलजार रहने वाले पिकनिक स्पाटों पर भी सन्नाटा पसर गया था। 25 जून के बाद से ऐसे स्थलों को भी जनता के लिए खोल दिया गया। शाही किले में ई टिकट के माध्यम से लोगों को प्रवेश दिया जा रहा है। अब यहां रोज लोग सैर सपाटे के लिए आते हैं।
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घट गए थे मरीज, अब फिर से बढ़ने लगे
लॉकडाउन के दौरान सबसे चौंकानें वाली स्थिति अस्पतालों की थी। मरीजों की संख्या में अचानक कमी आ गई थी। निजी अस्पताल तो बंद थे ही, सरकारी अस्पतालों में भी गिनती के लोग ही पहुंच रहे थे। मरीजों के अचानक से कम होने से हर कोई हतप्रभ था। बहरहाल, अब फिर से मरीजों की संख्या में इजाफा शुरू हो गया है। निजी अस्पतालों के बाहर भीड़ लगने लगी है। प्रवेश के दौरान ही उन्हें जांच की प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है। हालांकि अभी भी कई अस्पतालों ने मरीजों के दवा-उपचार को लेकर दूरी बना रखी है। अधिकांश निजी अस्पताल खुलने लगे है। अब अस्पताल जाने में लोगों को पहले जैसा डर भी नहीं लगता। स्वास्थ्य सेवाएं भी पटरी पर लौट आई हैं।
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पहले टिकट को थी मारामारी, अब ट्रेनें जा रहे खाली
लॉक डाउन से पहले महानगरों की ओर जाने के लिए ट्रेनों का टिकट पाने के लिए मारामारी मची रहती थी। बुकिंग खुलते ही टिकट के लिए लंबी कतारें लग जाती थीं। वेटिंग का टिकट लेकर स्लीपर और एसी कोच में लोग बैठकर जाते थे। जनरल कोच में पांव रखने की भी जगह नहीं होती थी। अब स्थितियां अलग हैं। महानगरों की ओर ट्रेनें तो जा रही हैं, मगर अब पहले जैसी भीड़ नहीं।ग बिना आरक्षण के किसी को भी ट्रेन में सफर की इजाजत नहीं। लोगों को स्वास्थ्य जांच के क्रम से गुजरना पड़ रहा है। पहले ही अपेक्षा ट्रेनों का संचालन भी कम हो रहा है। यह बात अलग है कि अब फिर से महानगरों की ओर जाने वालों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ने लगी है, मगर भीड़ का वह आलम पहले जैसा नहीं दिख रहा।
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कई लोगों ने बदल लिया था व्यवसाय
लॉकडाउन के चलते जब दवा, राशन और सब्जी की दुकानों को छोड़ बाकी दुकानों को बंद करा दिया गया था तो कई लोगों की आमदनी ठप होने से घर का खर्चा भी चलाना मुश्किल हो गया था। आभूषण, कपड़ा, बर्तन आदि का व्यवसाय करने वाले कई लोेगों ने सब्जी का धंधा शुरू कर दिया था। अब सभी दुकानों को खुलने की छूट मिल गई तो ऐसे लोग फिर से अपने पुराने धंधे में लौट आए है। हालांकि आर्थिक मंदी के चलते तमाम दुकानदारों का कहना है कि व्यवसाय अभी पटरी पर आने में समय लगेगा। -चंदन सोनी।
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दफ्तरों में अनिवार्य हो गया मास्क और सैनिटाइजर
सरकारी और गैर सरकारी दफ्तर भी अब खुलने लगे हैं। सभी दफ्तरों में संक्रमण से बचने के लिए मास्क, सैनिटाइजर जैसी सुरक्षा के सामानों की उपलब्धता अनिवार्य की गई है। सामाजिक दूरी के मानक के साथ दफ्तरों में कु र्सियां दूर दूर रख दी गई है। अब समय के साथ इन दफ्तरों की भी रौनक लौटने लगी हैं। शुरुआत में सरकारी दफ्तर खोलने के जब निर्देश हुए तो जरूरी काम के लिए ही कर्मचारियों को बुलाया जा रहा था। अफसर दफ्तर में बैठते थे लेकिन कर्मचारी नहीं आते थे। अब सभी अफसर, कर्मचारी के अलावा फरियादी भी पहुंच रहे हैं। -सुरेश अस्थाना।
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दुकानों पर सन्नाटा, सड़क पर जाम
अनलॉक के बाद सभी अब सभी दुकानें खुलने की छूट भले ही मिल गई है औस दुकान खुलने का समय भी बढ़ा दिया गया है पर कई कोरोबार अभी पटरी पर पूरी तरह नहीं लौट सके हैं। तमाम दुकानों पर सन्नाटा देखा जा रहा है लेकिन सड़क पर भीड़ देख कर हैरानी होती है। शहर के कोतवाली चौराहा, ओलंदगंज, कचहरी रोड पर आएदिन जाम लगता है। अगर दुकानों पर पहले जैसे ग्राहक नहीं आ रहें तो सड़क पर जाम कैसे लग रहा यह सोच कर हैरानी होती है। -अभिनव सिंह।
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मोबाइल के लिए बच्चों को मिल गई छूट
लॉक डाउन से पहले घर में जब बच्चे मोबाइल देर तक देखते तो उन्हें डांट पड़ती थी। अभिभावक उनसे मोबाइल फोन छीन लेते और किताबें पढ़ने की नसीहत देते रहते थे। लॉकडाउन ने बच्चों को मोबाइल के साथ रहने की जैसे आजादी भी दे दी है। स्कूल कॉलेज बंद हुए तो ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा दिया जाने लगा। ऐसे में बच्चे बिना मोबाइल के ऑनलाइन क्लास से नहीं जुड़ सकते थे। उन्हें अभिभावकों ने खुद मोबाइल दिए और ऑनलाइन क्लास अटेंड करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। बच्चा मोबाइल लेकर घर में बैठा है तो मान लेते हैं कि वह क्लास कर रहा है। कई शिाक्षकों ने यूट्यूब चैनल बना लिए हैं। -रविचंद्र यादव शिक्षक।