जौनपुर। अपर सत्र न्यायाधीश विशेष न्यायाधीश एस/एसटी रणजीत कुमार की अदालत ने दुष्कर्म व लूट के पांच आरोपियों को दोष मुक्त कर दिया। मछलीशहर कोतवाली के सरावां गांव का 30 साल पुराना मामला था। कोर्ट में गवाहों ने सही ढंग से घटना सिद्ध नहीं किया तो साक्ष्यों में संदेह होने के कारण सभी आरोपियों को कोर्ट ने दोष मुक्त कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी लिखा है कि यदि पीड़िता को कोई मुआवजा धनराशि सरकार से मिली है तो जिला मजिस्ट्रेट जौनपुर उसकी वसूली करें। वादिनी रामकली ने मछलीशहर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि 10 नवंबर 1994 को भोजन करने के बाद पति सुखलाल के साथ सोई थी। घर में बत्ती जल रही थी। भोर में करीब 3:00 बजे गांव के अशोक, भागवत प्रसाद, बड़ेलाल, नंदलाल, भोलानाथ अपने हाथ में कट्टा, चाकू, लाठी, डंडा लिए मड़ई की टाटी हटाकर मेरे घर में घुस आए। पति को जान से मारने की धमकी देते हुए कहा कि सारा सामान दे दो। इस पर वादिनी की सोने की नथ, बिछिया, अंगूठी और 200 रुपये नकद लूट लिए। अशोक व बड़ेलाल ने वादिनी से दुष्कर्म किया। पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मुकदमा पंजीकृत करके विवेचना करके कोर्ट में केस डायरी दाखिल की। कोर्ट में अभियोजन पक्ष ने अपना साक्ष्य सही ढंग से प्रस्तुत नहीं किया। आरोपी की तरफ से अधिवक्ता ने बहस की। इस दौरान विचरण आरोपी भोला नाथ की मृत्यु हो गई थी।