फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jaunpur News ›   Fitness running 36 school vehicle without notice, tucked up action

बिना फिटनेस दौड़ रहे 36 स्कूली वाहन, नोटिस तक सिमटी कार्रवाई

Thu, 04 Aug 2016 12:39 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर Updated Thu, 04 Aug 2016 12:39 AM IST
विज्ञापन
Fitness running 36 school vehicle without notice, tucked up action
मानक के विपरित स्कूली वाहन में ठूंसकर भरे गए बच्चे। 
आए दिन हादसे का शिकार हो रहे स्कूल वाहनों से भी पुलिस और परिवहन विभाग सबक नहीं ले रहा है। प्रशासन की लापरवाही से स्कूली वाहनों में बच्चे जोखिम भरा सफर करने के लिए विवश हैं। उनको घर से स्कूल और स्कूल से घर तक पहुंचाने के लिए तमाम स्कूलों में डग्गामार वाहनों को लगाया गया है।
विज्ञापन


इनके पास न तो फिटनेस सर्टिफिकेट होता है और न ही अन्य जरूरी कागजात। मोटी कमाई के चक्कर में स्कूल संचालक भी बच्चों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने में गुरेज नहीं कर रहे। परिवहन विभाग ने 36 स्कूली वाहनों को बिना फिटनेस के संचालित होने के आरोप में नोटिस देकर चुप बैठ गया।
विज्ञापन


 जिले में छह माह के अंदर स्कूल बसों के पलटने की कई घटनाएं हो चुकी है। इसमें दर्जन भर बच्चे घायल और एक  की मौत हो चुकी है। मछलीशहर क्षेत्र के कटाहित खास गांव दो माह पहले एक स्कूल की टाटा मैजिक पलट गई थी। जिसमें तीन बच्चे घायल हो गए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


 23 जुलाई को सिकंदरा गांव के पास स्कूली बस पलटने से पांच बच्चे घायल हो गए थे। 20 फरवरी को मल्हनी बाजार के पास एक स्कूल वाहन में जाली न होने की वजह से बच्चा सिर बाहर निकाला था। वाहन एक पोल से होकर गुजरा तो बच्चे का सिर उससे टकरा गया।

पकड़ी गांव निवासी उस बच्चे की मौत हो गई थी। बावजूद इसके प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके अलावा भी कई घटनाएं हो चुकी हैं। अभी भी स्कूलों में डग्गा मार वाहनों का संचालन धड़ल्ले से किया जा रहा है।

इसका अंदाजा परिवहन विभाग के आंकड़े को देखने से ही लगाया जा सकता है कि पुलिस व परिवहन विभाग इसको लेकर कितना गंभीर हैं। इन वाहनों की न तो कभी जांच की जाती है और न ही  धर पकड़ । उप संभागीय परिवहन कार्यालय में 434 स्कूली वाहन पंजीकृत हैं। जिसमें 286 छोटे और 148 बस हैं।


इन वाहनों में 36 वाहन बिना फीटनेस के चल रहे हैं। इसकी जानकारी अभिभावकों को भी नहीं होती है। वे बच्चों की सुरक्षा के दृष्टि से ऐसे स्कूल वाहनों से बच्चों को भेजने को विवश हैं। लेकिन उन्हें क्या मालूम है कि उनका बच्चा जान जोखिम में डालकर विद्यालय जा रहा है। इसके लिए जिम्मेदार परिवहन विभाग भी कार्यवाही के नाम पर नोटिस भेज कर चुप्पी साध लेता है। 
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed